रेल्वे बजट में मध्यप्रदेश की उपेक्षा -मुख्यमंत्री

भोपाल, फरवरी 2013/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रेल बजट में मध्यप्रदेश की उपेक्षा हुई है। बजट मध्यप्रदेश के संदर्भ में अत्यंत निराशाजनक है। वर्ष 2012-13 के रेल बजट में गेज कन्वर्जन, नवीन रेल्वे लाइन निर्माण के लक्ष्य थे उन्हें भी पुनरीक्षित करते हुये कम कर दिया गया है।

श्री चौहान ने रेल्वे बजट पर प्रतिक्रिया करते हुये कहा है कि रेल्वे में जिस प्रकार भविष्य के विस्तार को देखते हुये पूंजी निवेश की आवश्यकता है उस पर ध्यान नहीं दिया गया। बजट में मेकेनाइज्ड मोटर बोगीस रिपेरिंग यूनिट मिसरोद और रतलाम में कौशल उन्नयन प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाने के प्रस्ताव का स्वागत किया पर मध्यप्रदेश की अपेक्षाओं और जरूरतों की तरफ ध्यान नहीं दिये जाने पर निराशा व्यक्त की है। भोपाल से प्रारंभ होने वाली कोई भी नवीन रेल प्रस्तावित नहीं की गयी। प्रदेश की माँग थी कि भिण्ड-इटावा लाइन को शीघ्र पूर्ण किया जाये। ग्वालियर-श्योपुरकला के मध्य ब्रॉडगेज लाइन, ग्वालियर-पूना रेल, ग्वालियर में रेल कोच निर्माण की फैक्ट्री, झांसी-लखनऊ इंटरसिटी का ग्वालियर तक विस्तार, अनारक्षित कोच की संख्या को बढ़ाने, इंदौर-पटना एक्सप्रेस को दरभंगा तक बढ़ाने तथा इंदौर-महू रेल लाइन के विद्युतीकरण जैसी महत्वपूर्ण माँगें पूरी नहीं की गयी।

��्�� ���@ चपेट में आ गए। दोनों बच्चों की मौत के बाद सैकड़ों की संख्या में आ जुटे लोगों ने स्टेशन पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे बचने के लिए एएसएम संकेत बंसल और स्टाफ पैनल रूम में बंद हो गए। उपद्रवियों ने पैनल रूम पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे रेलवे के पीडब्ल्यूएस कर्मचारी भगवानदास की मौत हो गई और संकेत बंसल गंभीर रूप से झुलस गए। पैनल रूम में बंद लोगों को निकालने के प्रयास में गुलाबगंज तहसीलदार हरिशंकर विश्वकर्मा और एक अन्य चंद्रकांत मोंगिया भी झुलस गए।

 

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