विद्यार्थी समाज-हित में ज्ञान का उपयोग करें: राष्‍ट्रपति

इंदौर, जून 2013/ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि ज्ञान आधारित अर्थ-व्यवस्था वर्तमान समय की आवश्यकता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भौतिक अधोसंरचना विस्तार के साथ नवाचार की संस्कृति के विकास और गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है। श्री मुखर्जी इंदौर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर के प्रथम दीक्षाँत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले स्नातकों का आव्हान किया कि वे हर दिन और हर समय सीखते रहने की प्रेरणा लें। विद्यार्थियों की शिक्षा पर समाज ने निवेश किया है इसलिये समाज के हित में अपने ज्ञान का उपयोग करें। देश में 2 करोड़ 50 लाख विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और 12वीं योजना में एक करोड़ विद्यार्थी और जुड़ जायेंगे। जर्मनी में दाखिले का प्रतिशत 21 और अमेरिका में 37 प्रतिशत है जो भारत में सात प्रतिशत है। इसे देखते हुए देश में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में 659 विश्वविद्यालय और 33 हजार कॉलेज हैं। उच्च शिक्षा के लिये स्कालरशिप देने की दिशा में और ज्यादा काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत में क्षमता और प्रतिभा है, जिसका पूरा उपयोग करना चाहिये। नवाचार को प्रोत्साहित करना सर्वाधिक श्रेष्ठ विकल्प है। उच्च शिक्षा अधोसंरचना में विस्तार, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें।

आईआईटी संचालक मंडल के अध्यक्ष अजय पीरामल ने कहा कि वर्तमान अर्थ-व्यवस्था में युवाओं के लिये पर्याप्त अवसर हैं। विज्ञान और तकनीकी के विकास से लोगों के जीवन में बदलाव आना चाहिये। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप माथुर ने संस्थान की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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