विद्या परिसरों से आत्म-निर्भर युवा निकलें

भोपाल, अगस्त 2014/ उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने नये सत्र के आरंभ पर सभी प्राचार्य, प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक एवं अन्य स्टॉफ को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा है कि उच्च शिक्षा संस्थान इस बात पर विचार करें कि बदलती परिस्थितियों में विद्या परिसरों से सिर्फ शिक्षित युवा नहीं, बल्कि आत्म-निर्भर युवा बाहर निकलें।

श्री गुप्ता ने कहा है कि यह सत्र प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिये केवल अकादमिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास की दिशा में भी उपलब्धियों का वर्ष होगा। संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा दिया जाये। प्रचलित पाठ्यक्रमों का स्तर सुधारकर उन्हें वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाये।

प्रगति बहुत जरूरी है, किन्तु इसका आशय यह नहीं है कि हम इस महान देश की संस्कृति और परम्पराओं से मुख मोड़ लें। इस सत्र से शासन द्वारा नैतिक मूल्यों को आधार पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है और विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिये व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। प्रकोष्ठ के माध्यम से प्रत्येक महाविद्यालय में विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले व्याख्यान करवाये जायेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा है कि पिछले दो सत्र में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं ने महाविद्यालयों में प्रवेश किया है। इस प्रक्रिया से जहाँ प्रवेश पंजीकरण बढ़ा है, वहीं अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छात्र-छात्राओं ने भी श्रेष्ठ महाविद्यालयों में प्रवेश लिया है। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आयी है। इसके साथ ही आओ कॉलेज चलें अभियान से ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को महाविद्यालयों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

श्री गुप्ता ने कहा है कि गुणवत्ता वर्ष और गुणवत्ता विस्तार वर्ष में जिला एवं संभाग-स्तर पर एम्बेसडर प्राध्यापकों के दौरे, प्रतिभा बेंकों का गठन, हिन्दी और अंग्रेजी के लिये भाषा सुधार अभियान, सत्र के प्रारंभ में शून्य कक्षाएँ, स्टूडेंट चार्टर, महाविद्यालयों के न्यूज लेटर, संचालनालय-स्तर से जारी ई-न्यूज लेटर और वर्चुअल कक्षाओं में विशेषज्ञों के व्याख्यान जैसे अनेक कार्य किये गये हैं। प्रदेश के महाविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन निरंतर चल रहा है। इस संबंध में मुझे व्यक्तिगत रूप से अथवा अकादमिक शाखा को अपने मूल्यवान सुझावों से अवगत करवाया जा सकता है। विश्वास है कि सम्पूर्ण स्टॉफ युवाओं के भविष्य निर्माण में महती भूमिका निभायेगा। सबके प्रयासों से डिग्री प्राप्त करते समय युवाओं के चेहरे पर मुस्कान एवं आत्म-विश्वास की झलक दिखेगी।

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