शिवराज ने जयराम रमेश से मांगा मप्र का हक

भोपाल, नवंबर 2012/ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने केन्द्र सरकार से महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से लाभान्वित अनुसूचित जाति, जनजाति के हितग्राहियों और भूमिहीन श्रमिकों के भुगतान के लिये 1076 करोड़ की राशि तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है। श्री चौहान ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश को लिखे अपने पत्र में कहा कि केन्द्र द्वारा राशि उपलब्ध नहीं करवाये जाने से मजदूरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है और नवीन कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं।

श्री चौहान ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार के विरूद्ध नकारात्मक अभियान चलाये जाने की चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इस बात के लिये संकल्पित है कि पात्र हितग्राहियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो और उन्हें उनका हक नियमानुसार समय पर प्राप्त हो सके। राज्य सरकार योजना का क्रियान्वयन उत्कृष्ट रूप से करने के लिये प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने पत्र में आय-व्यय की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि आगामी माहों के लिये पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है।

मुख्यमंत्री ने विस्तृत रूप से तथ्यात्मक जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा मैनेजमेंट इंफरमेशन सिस्टम में उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर राशि की उपलब्धता दर्शाई जा रही है जबकि राज्य सरकार द्वारा जिलों में वास्तविक रूप से उपलब्धता के आधार पर राशि की मांग की जा रही है। भ्रम की यह स्थिति आँकड़ों की स्रोत की भिन्नता के कारण हुई है। राज्य द्वारा केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को पूर्व में भी निरंतर रूप से उपलब्ध राशि एवं व्यय के संबंध में जानकारी दी गयी है। मुख्यमंत्री ने वित्तीय अनियमितताओं को रोकने और शिकायतों एवं समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये अनेक कदमों का उल्लेख किया। इसके अलावा दोषी अधिकारियों के विरूद्ध भी कार्यवाही किए जाने का पत्र में उल्लेख है।

श्री चौहान ने राज्य रोजगार गारंटी निधि के कुशल प्रबंधन की दृष्टि से उठाये जा रहे कदमों की चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश में 22 हजार 21 ग्राम रोजगार सहायक की भर्ती की जा रही है। अब तक 16 हजार ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

श्री चौहान ने कहा कि भारत सरकार द्वारा विकसित नरेगा सॉफ्ट की एंट्री ऑनलाइन ई-मस्टर एवं भुगतान की प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिये ग्राम पंचायत में लैपटॉप उपलब्ध करवाये गये हैं। मजदूरों को समय पर भुगतान करने के लिये प्रत्येक जिले की बैंक मेपिंग करवाई गयी है। जहाँ बैंक सुविधा नहीं है और बिजनेस कारस्पांडेंस, मोबाइल वेन, कियोस्क, बायो मेट्रिक ए.टी.एम. एवं अति सूक्ष्म बैंक शाखा खोलकर मजदूरों को भुगतान की कार्यवाही की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2012-13 के प्रथम छह माह में अतिवृष्टि के चलते जो कार्य धीमे थे अब तेजी से प्रारंभ होंगे।

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