संस्कृत के अध्ययन से बनेगा भारत दुनिया का सिरमौर

उज्‍जैन, फरवरी 2013/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संस्कृत संसार की सबसे समृद्ध भाषा है और सरकार इसे जन-जन की भाषा बनाने की दिशा में हर जरूरी कदम उठायेगी। संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन से भारत दुनिया के सिरमौर राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

श्री चौहान उज्जैन में तीन दिवसीय संस्कृत साहित्योत्सव का शुभारम्भ कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि संस्कृत भाषा के बिना भारत की संस्कृति को जाना नहीं जा सकता। संस्कृत के विद्वान संस्कृत को आम जनता की भाषा बनाने के उपाय ढूँढ़े। पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहित करने के लिये कुछ विनम्र प्रयास किये हैं। अंग्रेजी के ज्ञान का अभाव ग्रामीण अंचलों के बच्चों की प्रतिभा को कुंठित कर देता है। राज्य सरकार इस स्थिति को बदलने के लिये संकल्पबद्ध है। हिन्दी विश्वविद्यालय में अभियांत्रिकी, चिकित्सा और विज्ञान आदि सभी विषय हिन्दी में पढ़ाये जायेंगे।

कार्यक्रम के अध्यक्ष जनसम्पर्क एवं संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा कि साहित्योत्सव में संस्कृत भाषा के उत्थान के लिये मूर्धन्य विद्वानों के मार्गदर्शन में योजना तैयार होगी। मुख्यमंत्री ने ‘शब्द वेदः’ ग्रंथ का विमोचन भी किया।

12 हजार संस्कृत शिक्षक की होगी नियुक्ति

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार इसी वर्ष 12 हजार संस्कृत शिक्षक नियुक्त करेगी। इससे संस्कृत के महान् ग्रंथों का पठन-पाठन लोकप्रिय होगा। मुख्यमंत्री संस्कृत ग्राम के विद्यालय भी पहुँचे और बच्चों के साथ कक्षा में भी कुछ देर बैठे।

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