सभी जिलों में होगी नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई

भोपाल, जून 2013/ प्रदेश में संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 15 अगस्त 2013 तक सभी जिलों में नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश यह उपलब्धि प्राप्त करने वाला देश का प्रथम राज्य होगा। वर्तमान में संचालित 44 शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से प्रदेश में लगभग एक लाख 50 हजार शिशुओं का उपचार किया गया है। वर्तमान में 6 जिलों में शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों की स्थापना का कार्य चल रहा है। कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिए विकासखण्ड स्तर तक पोषण पुनर्वास केन्द्र स्थापित किए गए हैं।

मध्यप्रदेश में मातृ, शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य सुविधा की दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में खास उपाय किए जा रहे हैं। कम्पोजिट हेल्थ इंडेक्स के अनुसार प्रदेश के 17 जिले जिनमें रायसेन, टीकमगढ़, सीधी, सिंगरौली, सागर, दमोह, सतना, डिण्डोरी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, छतरपुर, पन्ना, बड़वानी, मण्डला, झाबुआ और अलीराजपुर उच्च प्राथमिकता के लिए चिन्हित किए गए हैं।

प्रदेश में वर्ष 2017 तक मातृ मृत्यु दर 100 प्रति लाख, जीवित जन्म शिशु मृत्यु दर 25 प्रति हजार, जीवित जन्म तथा सकल प्रजनन 2.1 स्तर तक लाने के उद्देश्य से रणनीति निर्धारित की जा रही है। बाल उत्तरजीविता अभियान भी आरंभ किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 500 अतिरिक्त प्रसव केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संजीवनी-108 एवं जननी एक्सप्रेस की एकीकृत सेवाएँ प्रारंभ की गई हैं। इनके द्वारा 1574 वाहन सतत् रूप से कॉल सेन्टर के माध्यम से सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इससे हर साल लगभग एक लाख मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।

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