समग्र विकास में हो सहकारिता का उपयोग: बिसेन

भोपाल, फरवरी 2013/ सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि सहकारिता का उपयोग खेती-किसानी तक ही सीमित न रहे, बल्कि इसका उपयोग गाँव और किसान के समग्र विकास में किए जाने की जरूरत है। श्री बिसेन भोपाल में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव राज्यों के सहकारिता से जुड़े अधिकारी मौजूद थे।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने देश भर में कृषि उत्पादन के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश की कृषि विकास दर 18 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे माहौल में सहकारी संस्थाओं की मजबूती के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं। एन.सी.डी.सी. कृषि के साथ-साथ इससे जुड़े अन्य क्षेत्र पशुपालन, मत्स्य-पालन, सौर एवं पवन ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध करवाने की पहल करे। राज्य सरकार ने प्रदेश के 4,500 से अधिक प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्थाओं को गोदाम निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि उपलब्ध करवाए जाने का निर्णय लिया है। प्रदेश में एन.सी.डी.सी. के सहयोग से 300 गोदाम बनाये जाने के लिए एम.ओ.यू. किया है। केन्द्र सरकार की ओर से सहकारी संस्थाओं को दी जाने वाली आर्थिक मदद में 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इसे 50 प्रतिशत तक किए जाने की जरूरत है। एन.सी.डी.सी. से भी ब्याज दर में कमी करने का अनुरोध है।

एन.सी.डी.सी. के प्रबंध संचालक सी.बी. पालीवाल ने बताया कि भारत में सहकारिता की मजबूती के लिए इस दशक को सहकारिता दशक के रूप में मनाने का फैसला किया है। विश्वव्यापी मंदी के दौर के बावजूद भी सहकारी संस्थाओं पर इसका कम असर देखा गया। देश भर में सहकारिता के माध्यम से 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। रजिस्ट्रार एवं आयुक्त सहकारिता मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 30 हजार सहकारी संस्थाएँ काम कर रही हैं। इन्हें और बढ़ाये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 100 बहुउद्देश्यीय किसान केन्द्र प्रारंभ किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से किसानों को हर तरह की सहायता उपलब्ध करवायी जाएगी। आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में एन.सी.डी.सी. के माध्यम से वर्तमान में 38 जिलों में योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का विस्तार शेष जिलों में भी किया जाएगा।

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