सरकार और लोगों के बीच महज एक कॉल का फासला

भोपाल, अगस्‍त 2014/ मध्‍यप्रदेश में सरकार सुदूर ग्रामीण अँचलों में रहने वाले लोगों की समस्याओं के निराकरण की दिशा में लगातार प्रयासरत है। हरेक सप्ताह के एक निश्चित दिन राज्य से लेकर अनुभाग-स्तर तक जन-सुनवाई के जरिये जन-समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। ‘समाधान ऑन लाइन” के माध्यम से भी समस्याओं के निदान की व्यवस्था जारी है। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर प्रदेश में ‘सी.एम. हेल्पलाइन” की अभिनव व्यवस्था की शुरुआत इसी कड़ी में एक और जन-हितैषी पहल है। इसके जरिये टोल-फ्री नम्बर पर प्रतिदिन पाँच से लेकर 10 हजार कॉल रिसीव कर संबंधित को मामले निराकरण के लिये भेजे जा रहे हैं। यही नहीं, बल्कि निराकरण की स्थिति से भी आवेदकों को अवगत करवाया जा रहा है। हेल्पलाइन में 100 से अधिक कॉल एक साथ रिसीव करने की व्यवस्था है।

टोल-फ्री नम्बर 181 पर टेलीफोन लगाते ही सुनाई देता है; नमस्कार मैं सी.एम. हेल्पलाइन से बोल रही /रहा हूँ। बताइये आप किस संबंध में शिकायत या समस्या दर्ज करवाना चाहते हैं। एक सप्ताह में आपकी समस्या/शिकायत के निराकरण की कोशिश की जायेगी और आपको सूचित किया जायेगा।

‘जन हेतु जन सेतु” के ध्‍येय -वाक्‍य के साथ शुरू की गई इस पहल में टोल-फ्री नम्बर 181 पर कोई भी व्यक्ति प्रतिदिन प्रात: 7 से रात 11 बजे तक अपनी शिकायत-समस्या दर्ज करवा सकता है। शहर से लेकर दूर-दराज के गाँव तक शासन के किसी भी विभाग की शिकायत या समस्या यहाँ दर्ज की जा सकती है। इसी प्रकार राज्य शासन की विभिन्‍न योजना और कल्‍याणकारी कार्यक्रम की जानकारी भी प्रदाय की जाती है। यह व्यवस्था परीक्षण के तौर पर जनवरी 2014 से प्रचलित थी। परीक्षण के दौरान मिली सफलता और लोगों से मिले प्रतिसाद के मद्देनजर इसे लागू किया जा रहा है। एक निजी प्रोफेशनल एजेंसी के माध्यम से इसका संचालन किया जा रहा है।

सी.एम. हेल्पलाइन में लगभग 230 युवा काम कर रहे हैं, जो स्नातक तक शिक्षा प्राप्त हैं और जिनकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी है। टोल-फ्री नम्बर पर संबंधित शिकायतकर्ता को एक नम्बर दिया जाता है, जिस पर शिकायत/समस्या दर्ज की जाती है। संबंधित अधिकारियों के प्रथम-स्तर पर भी समस्या का निराकरण संभव नहीं हो तो समस्या के स्वरूप के आधार पर उच्च अधिकारी के स्तर पर संबंधित समस्या स्वत: ट्रान्सफर हो जाती है। संबंधित शिकायतकर्ता को क्लोजर कॉल द्वारा सूचित किया जाता है। समस्या/शिकायत निर्धारित फार्मेट पर हिन्दी में दर्ज की जाती है।

हेल्पलाइन में समस्या/शिकायत निराकरण के 4 स्तर निर्धारित हैं, जो राज्य-स्तर से अनुभाग-स्तर के अधिकारी स्तर के है। इसके जरिये न केवल समस्या/शिकायत का निराकरण, बल्कि शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।आम नागरिकों द्वारा हेल्पलाइन नम्बर 181 पर कॉल किये जाने पर कॉल आपरेटर को आई.व्ही.आर. (इंटरेक्टिव वाइस रिस्पांस) के जरिये फारवर्ड किया जाता है। इसमें प्रथम बार शिकायत/समस्या दर्ज करवाने वाले का नाम, पता आदि की जानकारी ली जाती है। प्रत्येक शिकायत/समस्या दर्ज करने पर एक यूनिक नम्बर जनरेट होता है।

हेल्पलाइन की अवधारणा में कहा गया है कि ‘शासन और नागरिकों के मध्य अब केवल एक कॉल का फासला है। प्रदेश की जनता को सी.एम. हेल्पलाइन से मिलेगी त्वरित जानकारी और होगा शिकायतों का त्वरित समाधान। सुशासन को और अधिक बेहतर बनाने और ई–गवर्नेंस–एम-गवर्नेंस की दिशा में यह राज्य सरकार की अनूठी पहल है।’

सी.एम.हेल्‍पलाइन की यह अभिनव व्‍यवस्‍था देश में सुशासन की दिशा में सर्वथा अनूठी पहल है। साथ ही यह राज्‍य शासन के दृष्टि पत्र-2018 में सम्मिलित सुशासन को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दिये जाने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। एम.गवर्नेंस के माध्‍यम से क्रियान्वित की जा रही सी.एम.हेल्‍पलाईन आम नागरिकों से सीधे संवाद तथा उनकी समस्‍याओं/ शिकायतों/मांगों के त्‍वरित निराकरण की दिशा में एक उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है।

सी.एम. हेल्पलाइन की परीक्षण अवधि के दौरान विगत 22 जुलाई, 2014 तक दर्ज की गई 1 लाख 11 हजार 100 शिकायत/समस्याओं में से 71 हजार 199 का यथा-संभव निराकरण किया जा चुका है। यह लगभग 64 फीसदी है। शेष समस्याएँ निराकरण के विभिन्न स्तर पर हैं।

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