सशक्‍त कानून बने और निर्णय की समय सीमा तय हो

नई दिल्‍ली, जनवरी 2013/ राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के नई दिल्ली में संपन्न सम्मेलन में मध्यप्रदेश की ओर से मुख्य सचिव आर. परशुराम और पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने भाग लिया और अपने विचार रखे। सम्मेलन विज्ञान भवन में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिन्दे की अध्यक्षता में हुआ। सम्मेलन में महिलाओं के विरूद्ध अपराध और अनुसूचित जाति और जनजातियों पर होने वाले अत्याचारों पर चर्चा की गयी।

मुख्य सचिव ने महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के बारे में जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक ने कानून को सशक्त बनाने पर जोर देते हुए महिला अपराधों में तथाकथित अपराधियों को जमानत न दिये जाने की बात भी कही। चार्जशीट से लेकर निर्णय देने की प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित करने की भी मांग करते हुए 15 दिन के अंदर चार्जशीट और 45 से 60 दिन के अंदर निर्णय दिये जाने की बात कही। पुलिस महानिदेशक ने अजाक थाने की तर्ज पर सभी जिलों में महिला थाने की मांग की। श्री दुबे ने फोरेन्सिक लेब को उत्तम तकनीकी से लैस करने और जिला स्तर पर फोरेन्सिक लेब की इकाई खोलने के लिए केन्द्र से सहायता की भी मांग की।

सम्मेलन में महिलाओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति की सुरक्षा, महिलाओं के विरूद्ध अपराध, महिलाओं के विरूद्ध हिंसा को रोकने की रणनीति, महिलाओं के विरूद्ध विभिन्न अपराधों का विश्लेषण, शिशु हत्या, बालिका भ्रूण हत्या, महिलाओं पर तेजाब फेंकने के अपराध और पीडि़त क्षतिपूर्ति योजना जैसे विषयों और चुनौतियों पर चर्चा की गयी। सम्मेलन में कमजोर वर्ग के खिलाफ अत्याचार, संस्थानिक कार्य-प्रणाली, क्षमता निर्माण, मानक कार्य प्रक्रियाओं (एस ओ पी) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम-1989 और अपराधिक कानून संशोधन विधेयक-2012 पर भी चर्चा हुई।

सम्मेलन में केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कुमारी शैलजा, केन्द्रीय महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्रीद्वय आर.पी.एन. सिंह और मुल्लापल्ली रामचन्द्रन सहित केन्द्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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