सहकारी संस्थाओं के चुनाव के लिये अलग प्राधिकारी बनेगा

भोपाल, फरवरी 2013/ मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी (संशोधन) अधिनियम-2012 आज से प्रभावशील हो गया है। इस संशोधित अधिनियम के प्रभावशील होने के बाद मध्यप्रदेश स्वायत्त सहकारिता अधिनियम का निरसन हो गया है। संशोधित अधिनियम में सहकारी संस्थाओं के निर्वाचन कराये जाने के लिये पृथक सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी के गठन का प्रावधान है। अब प्रदेश में भविष्य में सहकारी संस्थाओं के निर्वाचन पृथक रूप से नियुक्त इस प्राधिकारी द्वारा ही करवाये जायेंगे।

संशोधित अधिनियम के नवीन प्रावधान के अनुसार शासकीय सहायता प्राप्त सहकारी संस्थाओं के संचालक मण्डल का अधिक्रमण अधिकतम 6 माह की अवधि के लिये ही किया जा सकेगा। संस्थाओं के अंकेक्षण के लिये अंकेक्षक की नियुक्ति आमसभा एवं रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित पैनल में से की जा सकेगी। संशोधित अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद 6 माह के भीतर आमसभा का आयोजन किया जाये और अपनी वित्तीय विवरणियाँ आदि 30 सितम्बर तक रजिस्ट्रार सहकारिता को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किये जाने की बाध्यता सहकारी संस्थाओं के लिये होगी। ऐसा नहीं करने वाली संस्थाओं के विरुद्ध अधिनियम में दण्ड का भी प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा स्वायत्त सहकारिता अधिनियम के निरसन होने पर प्रदेश में पंजीकृत सभी स्वायत्त सहकारी संस्थाएँ अब सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के अंतर्गत पंजीकृत सहकारी संस्थाएँ हो गई हैं। अधिनियम के लागू होने पर इन सहकारी संस्थाओं को 6 माह के अंदर अपने उप नियमों में भी संशोधन करना होगा।

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