सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिये अलग मंत्रालय

भोपाल, अक्टूबर  2014/ ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2014 का शुभारंभ आज यहाँ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के सम्मेलन से हुआ। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिये अलग मंत्रालय बनाने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड गठित करने की घोषणा की।

केन्द्रीय सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री श्री कलराज मिश्र ने प्रदेश में उद्यमियों को प्रशिक्षण देने के लिये 30 से 40 इनक्यूबेशन केन्द्र खोलने और 150 करोड़ की लागत से एक टूल रूम खोलने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि देश में 500 इनक्यूबेशन केन्द्र खुलेंगे।

समिट की अध्यक्षता करते हुए लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में विकास के अद्भुत दौर का अनुभव कर रहा है। लोक सभा अध्यक्ष ने सूक्ष्म और लघु उद्योग क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश और देश का गौरव बढ़ेगा। श्रीमती महाजन ने कहा कि प्रदेश ने पिछले एक दशक में विकास का अद्भुत दौर का अनुभव किया है। हर क्षेत्र में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को किसी भी तरह से बाधा नहीं आने दी जायेगी। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म उद्योग कम लागत में ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं इसलिये राज्य को इनसे विशेष लगाव है। उन्होंने लघु उद्योगों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिये इंदौर में एक प्रदर्शनी सेंटर की स्थापना की आवश्यकता बताई।

केन्द्रीय मंत्री श्री कलराज मिश्र ने बताया कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों की बेंक लोन समस्या दूर करने के लिये क्रेडिट गारंटी फंड स्थापित किया गया है। इसमें राज्यों के योगदान का दस गुना उन्हें वापस दिया जायेगा। उन्होंने मध्यप्रदेश से इस फंड में योगदान देने का आग्रह करते हुए कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्यमियों के लिये केन्द्रीय सूक्ष्म और लघु उद्योग मंत्रालय की ओर से बेंकों को गारंटी दी जायेगी।

श्री मिश्र ने कहा कि यदि सूक्ष्म और लघु उद्योगों का टर्नओवर निर्धारित सीमा से बढ़ जाये तो भी उनकी श्रेणी में परिवर्तन नहीं होगा। वे सूक्ष्म और लघु उद्योग की श्रेणी में ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिये नई नीति बनाई जा रही है जिसमें उद्यमिता विकास और कौशल विकास पर ध्यान दिया जायेगा। साथ ही प्रदेश में 150 करोड़ की लागत से एक टूल रूम खोला जायेगा, जिसमें तकनीकी शिक्षा प्राप्त उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। पूरे देश में ऐसे 15 टूल रूम खोले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब सूक्ष्म और लघु उद्योगों का पंजीयन आनलाइन होगा। इसके लिये सेल्फ सर्टिफिकेशन को आधार बनाया जायेगा। श्री मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया मिशन को पूरा करने में मध्यप्रदेश ने मेक इन मध्यप्रदेश मिशन बनाकर सकारात्मक पहल की है।

श्री मिश्र ने मध्यप्रदेश में आर्थिक और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति को अद्भुत बताते हुए कहा कि प्रदेश ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों के विकास में उल्लेखनीय काम किया है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों की सबसे बड़ी आवश्यकता भूमि और बिजली को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति को देखते हुए कृषि आधारित सूक्ष्म उद्योगों की अपार संभावनाएँ हैं।

श्री मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश में आज औद्योगिक विकास के अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक संकुलों की उपस्थिति और आधारभूत अधोसंरचना से प्रदेश की प्रगति और सूक्ष्म उद्योगों के विकास के स्वर्णिम अवसर बने हैं। बड़े और छोटे उद्योगों को परस्पर आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा भूमि बेंक बनाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में उत्पादन का रिकार्ड बनाया है। अब मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास दर में भी रिकार्ड बनायेगा। उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्र का समान विकास होगा। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्योग से जुड़े उद्यमियों को केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से पूरा संरक्षण, समर्थन और सुरक्षा दी जायेगी।

श्री मिश्र ने बताया कि देश में सूक्ष्म और लघु उद्योगों का भारत के औद्योगिक विकास में 8 प्रतिशत का योगदान है। इसमें से 45 प्रतिशत निर्माण क्षेत्र में और 40 प्रतिशत निर्यात क्षेत्र में है। इस समय देश में 3 करोड़ 60 लाख इकाइयाँ हैं, जिनमें आठ करोड़ से ज्यादा लोगों को काम मिला है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लघु और सूक्ष्म उद्योगों के विकास के लिये अलग से मंत्रालय बनाया और इन उद्योगों को परिभाषित करने का काम किया था।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को अनावश्यक कानूनों से मुक्त किया जायेगा। प्रदेश में उद्योग व्यवसायों के लिये स्व-घोषित एक ही रिटर्न जमा करने की योजना लागू की जायेगी। लायसेंस रजिस्ट्रेशन देने की समय-सीमा निर्धारित होगी। समय-सीमा में लायसेंस रजिस्ट्रेशन जारी नहीं हुआ तो स्वत: जारी होना मान लिया जायेगा। प्रदेश में 16 श्रम अधिनियम के तहत संधारित की जाने वाली 61 पंजी के स्थान पर एक ही पंजी की व्यवस्था लागू की जायेगी। इसी तरह 13 रिटर्न के स्थान पर 2 रिटर्न ही भरने होंगे। नौ श्रम कानून के प्रावधानों से सूक्ष्म उद्योगों को छूट दी जायेगी। लघु उद्योगों पर स्टेण्डिंग आर्डर एक्ट तभी लागू किया जायेगा जब श्रमिकों की संख्या 50 से अधिक होगी, वर्तमान में यह संख्या 20 है। प्रदेश में नवाचारी उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिये 100 करोड़ रूपये का वेंचर फण्ड स्थापित किया जायेगा। लघु और कुटीर उद्योगों के लिये औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम 20 प्रतिशत भूमि आरक्षित रखी जायेगी। बड़े उद्योगों के साथ सहायक इकाई के रूप में कार्यरत लघु उद्योग यदि बड़े उद्योग को 75 प्रतिशत उत्पाद देते हैं तो उन्हें भी वही छूट दी जायेगी जो बड़े उद्योग को दी गई है। बड़े उद्योग को अपने सहयोगी छोटे उद्योग को भूमि सब लीज करने की सुविधा दी जायेगी। लघु और मध्यम उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र लगाने पर पूंजी अनुदान दिया जायेगा। लघु उद्योगों के लिये ब्याज अनुदान की सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रूपये की जायेगी। लघु, मध्यम उद्योगों को वेट की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तत्काल तथा 25 प्रतिशत कर निर्धारण के बाद कर दी जायेगी। इसमें अपात्र उद्योगों की संख्या 52 से घटाकर 19 की जायेगी ताकि अधिक से अधिक उद्योगों को सहायता प्राप्त हो सके। विशेष पेकेज के लिये जिलों के स्थान पर अब विकासखण्ड को पिछड़ा मानकर उद्योग लगाने पर विशेष सुविधाएँ दी जायेंगी। प्रदूषण मंडल से सहमति का आवेदन अब ऑनलाइन तथा निर्धारित समय-सीमा में जारी किया जायेगा। जारी सहमति का नवीनीकरण अब 5 से 15 साल के लिये वैध होगा। जिन्होंने सहमति का नवीनीकरण नहीं कराया है उन्हें वन टाइम सेटलमेंट की सुविधा दी जायेगी। लघु श्रेणी के 544 प्रकार की इकाइयाँ अब ऑनलाइन आवेदन जमा करके ही आवश्यक सहमति प्राप्त कर सकेंगी। फूड एण्ड ड्रग कंट्रोल से अनुमति और लायसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा। उत्पाद निर्माण का प्रमाणीकरण अब हर साल नहीं बल्कि 5 साल में एक बार लेना होगा। नये उत्पाद को शामिल करने के आवेदन का निराकरण 5 दिन में कर दिया जायेगा। परफार्मेंस सर्टिफिकेट तीन दिन में जारी किया जायेगा। यदि लघु उद्योग के पास भारत शासन की अनापत्ति है तो उसे तीन दिन में राज्य शासन से अनुमति दी जायेगी। समय-सीमा में स्वीकृति जारी करने को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में शामिल किया जायेगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों में विपणन का कार्य मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम करेगा।

मुख्यमंत्री ने अपील की कि स्वच्छ भारत अभियान में भागीदारी करें, नये उत्पाद के निर्माण के साथ 10 पेड़ लगायें, बेटी बचाओ अभियान में भागीदारी करें तथा हर बच्चा स्कूल जाये इसके लिये स्कूल चले हम अभियान में सहयोग करें। मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में सहयोग करें।

उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों की प्रदेश में अपार संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार और युवा उद्यमी योजनाओं के चलते सफलता की कई कहानियाँ सामने आई हैं। उन्होंने सूक्ष्म और लघु उद्योगों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रदेश में लघु उद्यमियों के उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार लेगी। उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रयासों से प्रदेश निवेश कारीडोर बन रहा है।

कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को वर्ष 2011-12 तथा वर्ष 2012-13 के लिये राज्य स्तरीय पुरस्कार दिये गये। वर्ष 2011-12 के लिये प्रथम पुरस्कार मेसर्स रामा वुड क्राफ्ट-सतना, द्वितीय पुरस्कार मेसर्स कम्फर्ट सिस्टम-भोपाल और तृतीय पुरस्कार मेसर्स श्री पेकर्स प्रायवेट लिमिटेड- उज्जैन को दिया गया। वर्ष 2012-13 के लिये प्रथम पुरस्कार मेसर्स माइका प्लाई-मण्डीदीप, द्वितीय पुरस्कार मेसर्स यूनाईटेड इंजीनियरिंग-भोपाल तथा तृतीय पुरस्कार मेसर्स भंवरदीप कापर स्ट्रिप लिमिटेड-मंडीदीप को दिया गया। कार्यक्रम में ‘लेंड बेंक 2014” पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसमें उद्योगों के लिये प्रदेश में आरक्षित 26 हजार हेक्टेयर भूमि तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आये राजदूत तथा हाई-कमिश्नर सहित वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुश्री कुसुम महदेले, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री विजय शाह, महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, श्रम मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य, पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, महापौर श्री कृष्णमुरारी मोघे, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, विधायक, जन-प्रतिनिधि तथा उद्यमी उपस्थित थे।

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