स्टेट आई.टी.सेंटर बहुत बड़ी उपलब्धि: मुख्यमंत्री

भोपाल, दिसंबर 2012/ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 2013 को सूचना प्रौद्योगिकी सशक्तिकरण वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का माइंडसेट विकसित करने का अभियान चलाया जायेगा। शासकीय कर्मचारियों, नौजवानों, माताओं-बहिनों सहित प्रदेशवासियों को सूचना प्रौद्योगिकी उपयोग करने के लिये प्रशिक्षण केन्द्र प्रारंभ किये जायेंगे। श्री चौहान आज यहाँ स्टेट आई.टी.सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

श्री चौहान ने कहा कि आई.टी.सेंटर मध्यप्रदेश निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम बनेगा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही पृथक से आई.टी.संचालनालय बनाया जायेगा। आई.टी. कॉडर का गठन किया जायेगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट क्लस्टर विकसित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान का अधिकतम उपयोग आम आदमी के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में होना चाहिये। मध्यप्रदेश में ई-गवर्नेंस के द्वारा गुड-गवर्नेंस के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। जिनकी देश में ही नहीं वरन् अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। समय-सीमा में शासकीय सेवायें देने के लिये प्रदेश को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सर्विस सेक्टर का अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया है। जापान, कोरिया और सिंगापुर जैसे आधुनिक देशों में जब 84 लाख मैट्रिक टन गेहूँ उपार्जन की जानकारी दी गयी तो उन देशों के विशेषज्ञ भी चकित हो गये।

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिये ऑनलाइन पद्धति का उपयोग प्रारंभ किया गया है। इनमें ऑनलाइन पटवारी परीक्षा की सफलता विशेष रूप से उल्लेखनीय है। प्रदेश में राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित परीक्षाओं को छोड़कर शेष सभी परीक्षाओं को ऑनलाइन करने के प्रयास किये जाएंगे। आई.टी. के बिना शिक्षा अधूरी है। आज ग्रामीण क्षेत्र के किसान भी मोबाइल के द्वारा विभिन्न सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। खराब विद्युत ट्रांसफार्मर एस.एम.एस. से बदले जा रहे हैं। समाधान ऑन लाइन और गवर्नेंस वनडे जैसे कार्यक्रमों से भी ग्रामीण जन लाभांवित हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग और अधिक बढ़ाया जाये। शासन की सेवाओं को प्राप्त करने के लिये चक्कर लगाना खत्म किया जाना चाहिये। खसरे की नकल ऑनलाइन देने की व्यवस्था बनाने की जरूरत है।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नवनिर्मित स्टेट डाटा सेंटर भवन देश के पाँच सर्वश्रेष्ठ आई.टी. भवन में से एक है। इसमें विश्व की आधुनिकतम तकनीक का उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को ई-गवर्नेंस वाले देश के पाँच राज्यों में से एक राज्य का गौरव प्राप्त है। इस क्षेत्र में अभी और अधिक कार्य करने की संभावनायें हैं। विद्यालयीन शिक्षा को आई.टी.फ्रेंडली बनाने के सुझावों को विभाग द्वारा तैयार किया गया है। इन प्रस्तावों पर विशेषज्ञों से परामर्श उपरांत अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा।

मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम अध्यक्ष प्रेमशंकर वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी का तेजी के साथ विकास हो रहा है। राज्य की नई आई.टी.नीति से आई.टी. क्षेत्र में 300 करोड़ रूपये के एम.ओ.यू. हुये हैं। इनके क्रियान्वित होने पर करीब 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत उद्बोधन सूचना प्रौद्योगिकी सचिव हरिरंजन राव ने किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सभी प्रकार की विभागीय आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। कार्यक्रम में बताया गया कि राज्य डाटा सेंटर का निर्माण 56 करोड़ रूपये की लागत से हुआ है। इसमें भूकम्परोधी तकनीक के इस्तेमाल के साथ मिसाइल हमले से बचाव के प्रबंध भी किये गये हैं। सेंटर में मध्यप्रदेश शासन के सभी विभागों के डाटा सहित प्रदेश के साढ़े सात करोड़ लोगों की आधारभूत जानकारी संग्रहित रहेगी।

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