स्वर्णिम मध्यप्रदेश का संकल्प

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मई 2010 में आयोजित विशेष सत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के सर्वांगीण और समावेशी विकास पर केन्द्रित 70 सूत्रीय संकल्प प्रस्‍तुत किया था। 14 मई 2012 को सर्वसम्मति से पारित यह संकल्‍प भविष्‍य के मध्‍यप्रदेश की रूपरेखा प्रस्‍तुत करता है।

इस विशेष सत्र में मध्‍यप्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने की दिशा में विधानसभा सदस्यों के जमीनी अनुभवों पर आधारित सुझाव मांगे गए थे। सत्र के पहले दिन 11 मई को मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत संकल्प पर तीन दिनों में 87 सदस्यों ने अपने विचार रखे। इनके अलावा 70 ऐसे सदस्यों ने लिखित में सुझाव प्रस्तुत किये जो समयाभाव के कारण सदन में अपनी बात नहीं रख सके थे।

विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प इस प्रकार है:-

इस सदन का मत है कि राज्य का कोई ऐसा सर्वांगीण एवं समावेशी विकास हो, जिससे प्रदेशवासियों का जीवन उत्तरोत्तर समृद्ध एवं खुशहाल बने तथा उन्हें अपनी क्षमताओं के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ कार्य करने और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का अवसर प्राप्त हो। उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह सदन संकल्प करता है कि हम प्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनायेंगे, मूलभूत सेवाओं के विस्तार के साथ अधोसंरचना का निरंतर सुदृढ़ीकरण करेंगे, निवेश का अनुकूल वातावरण निर्मित करेंगे, सबको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करायेंगे, महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति,पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं सामान्य निर्धन वर्ग को सशक्त कर उनकी विकास में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, सुदृढ़ सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाये रखेंगे तथा राज्य व्यवस्था का संचालन सुशासन के स्थापित सिद्धांतों पर करेंगे।

संकल्प के बिन्दु

1. प्रदेश की विकास दर को 9 से 10 प्रतिशत तक रखे जाने का प्रयास किया जाये।

2. चौबीस घंटे सिंगल फेस विद्युत प्रदाय तथा कृषि कार्यों के लिये 8 घंटे बिजली प्रदाय हेतु फीडर

विभक्तिकरण सहित आवश्यक अधोसंरचना निर्मित की जाये।

3. बिजली की उपलब्धता तथा गुणवत्ता में सुधार एवं बिजली की दरों में कमी करने के उद्देश्य से समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में वर्ष 2013 तक 9 प्रतिशत की कमी लायी जाये।

4. प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार के लिए वर्ष 2013 तक वर्तमान में स्थापित कुल क्षमता में न्यूनतम 5000 मेगावाट की वृद्धि की जाए।

5. गैर अपरम्परागत ऊर्जा के उत्पादन, उपकरणों एवं ऊर्जा संरक्षण के उपायों के प्रोत्साहन के लिए

अनुदान की व्यवस्था की जाये।

6. प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों को 4 लेन एवं जिला मुख्यालयों को 2 लेन सड़कों से जोड़ा जाये,

सभी ग्रामों को बारहमासी संपर्क सड़कों से जोड़ा जायेगा।

7. चिन्हित राजमार्गों के समुचित संधारण के लिए स्टेट हाईवे फण्ड का निर्माण किया जाये।

8. शासकीय भवनों के निर्माण के लिए परियोजना क्रियान्वयन इकाईयों का गठन किया जाये।

9. सुनियोजित विकास के लिए सभी शहरों के सिटी डेवलपमेंट प्लान तैयार कराये जायें।

10. नगरीय क्षेत्रों के विकास के लिए अधोसंरचना बोर्ड का गठन किया जाये।

11. सभी नगरीय निकायों को फायर ब्रिागेड की सुविधा उपलब्ध करायी जाये।

12. इंदौर एवं भोपाल में मैट्रो ट्रेन फिजिबिलटी सर्वे कराया जाये।

13. ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री पेयजल योजना प्रारंभ की जाए।

14. प्रत्येक ग्राम का मास्टर प्लान बनाया जाये।

15. आगामी 3 वर्षों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत भवन का निर्माण किया जाए।

16. आगामी चार वर्षों में सिंचाई की स्थापित क्षमता में 7.50 लाख हे. की वृद्धि की जाए।

17. सिंचाई की स्थापित क्षमता के समुचित उपयोग के लिए कमाण्ड एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम सहित सभी कारगर उपाय किये जाएं।

18. वैज्ञानिक आधारों पर जल के युक्तियुक्त दोहन की योजना बनायी जाए।

19. वैज्ञानिक कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य पत्रक (सॉइल हेल्थ कार्ड) तैयार किये जाएं।

20. किसानों को देय अनुदान की राशि सीधे उनके खातों में जमा की जाए।

21. उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल में आगामी 3 वर्षों में 5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि की जाए।

22. भण्डारगृह क्षमता तथा सुदृढ़ विपणन व्यवस्था के साथ प्रदेश को लाजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जाए।

23. प्रदेश की विपणन सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ किया जाए।

24. प्रदेश के सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिया जाए।

25. चिन्हित विकासखण्डों में चलित पशु चिकित्सालय चलाये जाएं।

26. दुग्ध क्रांति लाने के उद्देश्य से दुग्ध समितियों के गठन के साथ नये मिल्क रूट विकसित किए जाएं।

27. किसान क्रेडिट कार्ड के अनुरूप फिशरमेन क्रेडिट कार्ड पर तीन प्रतिशत ब्याज दर पर कार्यशील

पूंजी हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाए।

28. मछुआरों की मजदूरी दरों में वृद्धि की जाए तथा प्रभावित मछुआरों के पुनर्वास की नई नीति बनाई

जाए।

29. वन आधारित रोजगार को बढ़ाने के लिए वनों में टसर, लाख एवं चारागाह का विकास किया जाए।

30. वन्य जीवों के संरक्षण का कार्य प्रभावी तरीके से किया जाए।

31. पुनर्वास नीति का समग्र पुनरीक्षण कर किसानों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाये। भावी

परियोजनाओं में किसान की भूमि का अर्जन पांच लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से कम दर पर नहीं

किया जाए।

32. पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप में अभी तक हुए निवेश में आगामी तीन वर्षों में दुगनी वृद्धि की जाए।

33. खजिनों का मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही किये जाने को प्रोत्साहित करने की नीति बनायी जाए।

34. दिल्ली-मुंबई, भोपाल-इंदौर, भोपाल-बीना, जबलपुर-कटनी-सतना-सिंगरौली औद्योगिक कॉरिडोर का योजनाबद्ध विकास किया जाए।

35. प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में सृजित रोजगार में यथासंभव 50 प्रतिशत प्रदेश के मूल

निवासियों को उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की जाए।

36. प्रदेश में नियमित रूप से रोजगार मेलों का आयोजन किया जाए।

37. समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम बनाया जाए।

38. शासकीय प्राधिकरण द्वारा आवंटित ईडब्ल्यूएस आवास एवं भूखण्डों के विक्रय-पत्रों/पट्टों को स्टाम्प शुल्क से छूट प्रदान की जाए।

39. प्रत्येक आदिवासी विकास खण्डों में अंग्रेजी माध्यम की आश्रम शालायें संचालित की जाएं।

40. 50 से कम सीटों वाले आदिमजाति कल्याण विभाग के समस्त छात्रावासों को 50सीटर छात्रावासों में परिवर्तित किया जाए।

41. कपिलधारा से लाभान्वित अनुसूचित जाति के कृषकों को सिंचाई के लिए विद्युत/डीजल पम्प उपलब्ध कराया जाए।

42. आगामी 3 वर्षों में सभी जिलों में पिछड़े वर्ग के लिए 100 सीटर बालक छात्रावास उपलब्ध कराये जाएं।

43. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत राशि बढ़ाकर रुपये 10,000 की जाए।

44. प्रदेश में अटल बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन की स्थापना की जाए।

45. राज्य बीमारी सहायता निधि एवं दीनदयाल उपचार योजना का विस्तार किया जाए।4

46. वर्ष 2013 तक शिशु मृत्यु दर वर्तमान 72 से घटाकर 50 प्रति हजार एवं मातृ मृत्यु दर वर्तमान

335 से घटाकर 225 प्रति लाख करने का प्रयास किया जाए।

47. सकल प्रजनन दर को 2013 तक 2.6 करने का प्रयास किया जाए।

48. आवश्यकतानुसार पांच किलोमीटर के दायरे में हाई स्कूल की स्थापना की जाए।

49. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान सकल पंजीयन अनुपात को 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर आगामी तीन

वर्षों में 15 प्रतिशत प्राप्त करने का प्रयास किया जाए।

50. गुणवत्तायुक्त व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए आईटीआई का सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन किया जाए।

51. प्रदेश की बहुविध बोलियों यथा- बुंदेली, मालवी, निमाड़ी, बघेली, बैगा, भीली, कोरकू, गौंडी आदि के विकास व संरक्षण का कार्य किया जाए।

52. राज्य स्तर पर मेलों एवं वृहद् धार्मिक आयोजनों के विकास एवं संचालन के लिए प्राधिकरण गठित किया जाए।

53. खेल सुविधाओं का विस्तार पंचायत स्तर तक किया जाए।

54. मध्यप्रदेश खेल प्राधिकरण का गठन किया जाए।

55. पुलिस बल में चरणबद्ध तरीके से वृद्धि की जाए तथा इण्डिया रिजर्व बटालियन का गठन किया

जाए।

56. सेना के भूतपूर्व सैनिकों की एक सुरक्षा वाहिनी का गठन किया जाए।

57. अवैध वन कटाई, अवैध खनिज उत्खनन, बिजली चोरी, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण रोकने तथा

बीपीएल सूची में दर्ज अपात्र व्यक्तियों के नाम काटने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाए।

58. राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए भू-राजस्व संहिता में संशोधन किये जाएं।

59. ग्रामीण आबादी के पट्टे वितरित किये जाएं।

60. पंचायत सचिवों के जिला कैडर की स्थापना की जाए।

61. ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास मिशन आरंभ

किया जाए।

62. सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु बार कोडेड फूड कूपन योजना लागू की जाए।

63. राशन की दुकान प्रत्येक कार्य दिवस को खुली रखी जाए।

64. वैट के अधिकतम प्रकरणों को स्व-कर निर्धारण के दायरे में लाया जाये और कम्पोजीशन की सीमा 60 लाख रुपये की जाए।

65. पारदर्शी, जवाबदेह एवं संवेदनशील प्रशासन स्थापित करने के लिए व्यवस्था के लिए सूचना

प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग किया जाए।

66. एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली स्थापित की जाए।

67. राज्य में वांछित प्रशासनिक व्यवस्था में निरंतर सुधार की अनुशंसाएं करने का उत्तरदायित्व अटल

बिहारी वाजपेयी लोक प्रशासन संस्थान को सौंपा जाए।

68. प्रशासनिक अमले को पुरस्कृत एवं दण्डित करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए।

69. सिटीजन चार्टर को लोक सेवाओं के प्रदाय की गारंटी अधिनियम के रूप में लागू किया जाए।

70. शासकीय खरीदी पारदर्शी एवं उचित दरों पर करने के लिए वर्तमान व्यवस्था में यथोचित परिवर्तन किये जाएं।

यह भी प्रस्तावित है कि यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करे कि कृषि उत्पादों का वायदा बाजार

पूर्णत: बंद करने, प्रदेश के बीपीएल परिवारों की वास्तविक संख्या के अनुसार खाद्यान्न आवंटित करने,

आवासहीनों की संख्या के अनुरूप  इंदिरा आवास योजना  में राशि प्रदान करने,  ताप विद्युतगृहों की

आवश्यकता के अनुरूप उचित गुणवत्ता का कोयला प्रदान करने, प्रदेश  के वन क्षेत्रों के विकास के लिए कैम्‍पा ( सी.ए.एम.पी.ए.) की राशि विमुक्‍त करने, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन दिये जाने, इंदौर, दाहोद एवं अन्य रेल लाईन निर्मित करने तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं की पर्यावरण संबंधी अनुमतियां शीघ्र जारी की जाएं।

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