स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक: लक्ष्‍मीकांत

भोपाल, फरवरी 2013/ उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, लखनऊ एवं महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, भोपाल द्वारा आयोजित ‘‘स्वामी विवेकानंद के शिक्षा विषयक विचार : समग्र सामाजिक विकास के संदर्भ में’’ दो दिवसीय शोध संगोष्ठी का दीप जलाकर शुभारंभ किया।

श्री शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जन्म-दिवस के 150 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश में वर्ष भर कार्यक्रम किये जा रहे है। समग्र सामाजिक विकास के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचार नवनिर्माण के लिए सर्वाधिक प्रासंगिक है, उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। महापुरुषों को आज पहचानने की आवश्यकता है। संगोष्ठी में विद्वानों के विचार-विमर्श और चिन्तन से जो निष्कर्ष निकलेगा उसे क्रियान्वित करने का प्रयास किया जायेगा। ऐसे कार्यक्रम समाज को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। राज्य सरकार ने संस्कृत के उत्थान के लिए उज्जैन में महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना की है। उन्होंने जानकारी दी कि इस माह विश्व संस्कृत साहित्य उत्सव आयोजित किया जायेगा।

संगोष्ठी में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद अख्तर ने बीज वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हम चारित्रिक विकास नहीं करेंगे तब तक शिक्षा पूर्ण नहीं होगी। स्वामी विवेकानंद के विचारों से विद्यार्थियों और भावी पीढ़ी का चहुँमुखी विकास किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा के उद्देश्यों और जीवन के विकास के संबंध में विस्तार से अपने विचार व्यक्त किये। विद्वानों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों, शिक्षा और चिन्तन पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में अटलबिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनलाल छीपा ने स्वामी जी के महत्वपूर्ण विचारों से अवगत कराया। भारतीय शिक्षा प्रणाली पर अपने सुझाव दिए।

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