स्‍कूल शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के बेहतर परिणाम

भोपाल, अगस्त 2014/ मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विगत 6-7 वर्ष के दौरान चली मुहिम के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। राज्य सरकार ने शालाओं और शिक्षकों की संख्या में वृद्धि के साथ ही बच्चों को स्कूल भेजने के लिए ‘स्कूल चलें हम अभियान’ का भी बेहतर संचालन किया है।

राज्य शासन ने बच्चों में सीखने की प्रक्रिया की समझ बढ़ाने के लिए शिक्षकों को हैदराबाद में प्रशिक्षण दिलवाया है। शिक्षक प्रशिक्षक की क्षमता संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है। उन्हें आई.आई.एम. लखनऊ और एल.बी.एस..एन.ए.ए. मसूरी जैसे संस्थान में प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक जिले की आवश्यकताओं एवं भौतिक परिस्थितियों को देखते हुए अकादमिक गुणवत्ता सुधार योजना लागू की गई है। कक्षा एक एवं दो को पढ़ाने वाले शिक्षकों की मूलभूत दक्षताओं के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिक्षकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिए आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई है। इसके लिए फीड बेक सर्वेक्षण आदि के आधार पर चिन्हांकित कठिन अवधारणाओं के मोनोग्राफ विकसित किये गये हैं। वर्ष 2013-14 में 2 लाख 31 हजार शिक्षक को सेवाकालीन प्रशिक्षण दिया गया।

शिक्षा की गुणवत्ता को केन्द्र में रखते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों एवं शालेय व्यवस्थाओं के सही मूल्यांकन के लिए प्रतिभा-पर्व का आयोजन भी पिछले कुछ वर्ष से किया जा रहा है। पर्व का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की सही-सही स्थिति ज्ञात करना, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार के लिए कार्यक्रम एवं रणनीति के निर्धारण, बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के प्रति शिक्षक, शिक्षा, प्रशासन एवं जन-प्रतिनिधियों को उत्तरदायी बनाना, उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्पूर्ण शिक्षित ग्राम योजना के तहत पुरस्कृत एवं लापरवाह अमले का उत्तरदायित्व निर्धारित करना शामिल है। इसके अलावा अपेक्षित दक्षता हासिल न कर पाने वाले बच्चों के लिए निदानात्मक कदम उठाना तथा शालेय व्यवस्था में समाज की भागीदारी को बढ़ाना आदि सम्मिलित है।

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए 16 हजार 5 प्राथमिक शाला में गतिविधि आधारित शिक्षण (एबीएल) तथा 14 हजार 280 माध्यमिक शाला में सक्रिय अधिगम विधि (एएलएम) कार्यक्रम भी चलाया गया है। इसी तरह 10 हजार 900 मिडिल शाला में गणित तथा विज्ञान किट की व्यवस्था की गई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की व्यवस्था इस वर्ष लागू की गई है। शालाओं के समग्र मूल्यांकन के लिए शाला दर्पण योजना को दमोह और उमरिया जिले में गत वर्ष लागू किया गया था। इस साल स्टेट बेंक के सहयोग से इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष भी ‘स्कूल चलें हम अभियान’ सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में ग्राम शिक्षा पंजी का अद्यतन एवं द्वितीय चरण में नामांकन अभियान चला। अब तीसरा और चौथा चरण शिक्षा की गुणवत्ता पर केन्द्रित है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप स्कूल चलें हम अभियान जन-आन्दोलन के रूप में चलाया जा रहा है। इसके साथ ही मौजूदा वर्ष को गुणवत्ता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

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