हिन्दी प्रेमियों को मध्यप्रदेश की अनूठी सौगात

भोपाल, अगस्त 2014/ मध्यप्रदेश का अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय डॉक्टरी और इंजीनियरिंग के साथ ही साइंस की विभिन्न विधाओं, वाणिज्य और प्रबंधन की शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था की ओर अग्रसर है। इन विषयों को हिन्दी माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिये देश में प्रदेश का यह संभवत: पहला प्रयास है।

विश्वविद्यालय की स्थापना – एक नजर में

2 दिसम्बर, 2011 को मध्यप्रदेश विधानसभा में सर्वानुमति से अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय विधेयक पारित।

16 दिसम्बर, 2011 को राज्यपाल द्वारा विधेयक पर हस्ताक्षर।

19 दिसम्बर, 2011 को राजपत्र में प्रकाशन के बाद अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय स्थापित।

28 जून, 2012 को प्रो. मोहनलाल छीपा कुलपति नियुक्त।

ग्राम मुगालिया कोट में विश्वविद्यालय भवन के लिये 50 एकड़ भूमि आवंटित।

विश्वविद्यालय के पहले सत्र 2012-13 में 60 और दूसरे सत्र 2013-14 में 394 विद्यार्थी ने प्रवेश लिया। सत्र 2014-15 में नियमित पाठ्यक्रम के लिये 265 और एम.फिल-पीएच.डी के लिये 3770 विद्यार्थी ने पंजीयन करवाया है। प्रवेश के लिये विश्वविद्यालय में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रक्रिया प्रचलित है।

विश्वविद्यालय में ज्ञान-विज्ञान की विभिन्न विधाओं में पी-एच.डी. तथा एम. फिल के साथ ही स्नातकोत्तर, स्नातक, प्रतिष्ठा, पत्रोपाधि, प्रमाण-पत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किये गये हैं। इन उपाधियों और पाठ्यक्रमों के मूल्यांकन के लिये नवीनतम मूल्यांकन प्रणालियों का उपयोग किया गया है।

विश्वविद्यालय के अंतर्गत उपयोगी साहित्य का अन्य भाषाओं से हिन्दी में अनुवाद करना, प्रकाशन करना तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा में दृश्य और श्रव्य प्रणाली का उपयोग करते हुए, रोजगारपरक विषयों को संचालित करने की योजना है। इस प्रकार अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना है, जो समग्र व्यक्तित्व के विकास के साथ रोजगार, कौशल और चारित्रिक दृष्टि से विश्व-स्तरीय हो। छात्र-छात्राओं के लिये विश्वविद्यालय परिसर में ही छात्रावास निर्माण की भी योजना है।

प्रस्तावित अध्ययन शालाएँ

विश्वविद्यालय में हिन्दी बोली विशिष्ट अध्ययन केन्द्र, भारत विद्या अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र, भारत पारीय भारत अध्ययन केन्द्र, प्राचीन संस्कृति एवं सभ्यता अध्ययन केन्द्र, विश्व सभ्यता एवं संस्कृति अध्ययन केन्द्र, लोक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र, लोक स्वास्थ्य एवं वैकल्पिक चिकित्सा केन्द्र, दृश्य एवं श्रव्य केन्द्र, अनुवाद एवं प्रकाशन केन्द्र, महिला अध्ययन केन्द्र और छात्र अध्ययन केन्द्र की स्थापना भी प्रस्तावित हैं।

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश और देशवासियों के स्व-भाषा और सु-भाषा के माध्यम से ज्ञान की परम्परागत और आधुनिक विधाओं में शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था और हिन्दी को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिये 19 दिसंबर, 2011 को हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 6 जून, 2013 को भोपाल के समीप ग्राम मुगालिया कोट में विश्वविद्यालय भवन का शिलान्यास किया। भवन 50 एकड़ में बनेगा।

भारत ही नही विश्व के 22 देश के लगभग एक अरब लोग हिन्दी का प्रयोग करते हैं। संसार के लगभग 150 विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था है। फिजी तथा मारीशस में हिन्दी को द्वितीय राजभाषा का स्थान प्राप्त है। वर्धा (महाराष्ट्र) में भारत सरकार द्वारा महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय तथा मारीशस में विश्व हिन्दी केन्द्र की स्थापना की गई है। देश के 71 प्रतिशत वाशिन्दे हिन्दी समझ सकते हैं। कम्प्यूटर के लिये सबसे आसान लिपि हिन्दी भाषा की देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। कम्प्यूटर इंटरनेट में उपयोग के लिये हिन्दी के मात्र एक हजार चिन्ह की आवश्यकता है। इसकी तुलना में चीनी भाषा में एक लाख चिन्ह की आवश्यकता पड़ती है। अब यह भी प्रमाणित है कि हिन्दी शब्दावली की दृष्टि से विश्व की समृद्धतम भाषा ही नहीं सर्वाधिक वैज्ञानिक, सक्षम और सुविधाजनक भाषा भी है।

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