हिन्दी हमारी एकता का प्रतीक: राष्ट्रपति

भोपाल, जून 2013/ राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि सामाजिक कल्याण और विकास के कार्यक्रमों की सफलता भाषा पर निर्भर है। हिन्दी भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। राष्ट्र को जोड़ने में हिन्दी का महत्वपूर्ण योगदान है। देश के विश्वविद्यालय नैतिक मूल्यों की स्थापना का अभियान चलायें। नवाचारी संस्कृति विकसित करें। श्री मुखर्जी यहां अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में संबोधित कर रहे थे। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल राम नरेश यादव ने की मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान विशेष रूप से उपस्थित थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि हिन्दी माध्यम से तकनीकी विषयों की शिक्षा प्रदान करना अच्छी पहल है। हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार को बधाई देते हुये कहा कि इसका नाम वरिष्ठ राजनेता और प्रखर विद्वान अटल बिहारी बाजपेयी के नाम से रखा गया है, जिन्होंने हिन्दी भाषा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। राष्ट्रपति ने अपेक्षा की कि यह विश्वविद्यालय श्री बाजपेयी के महान आदर्शो पर चलेगा तथा हिन्दी और अन्य क्ष़ेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देगा। श्री मुखर्जी ने कहा कि हिन्दी के माध्यम से तकनीकी विषयों की शिक्षा प्रदान करने की जरूरत है।

महिलाओं और बच्चों के प्रति बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नैतिक मूल्यों की स्थापना का अभियान चलाये। देश के प्रति प्रेम, दायित्व का निर्वाह और सभी के साथ सच्चाई और ईमानदारी तथा आचरण में जिम्मेदारी की भावना हो आज ऐसे युवाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक समय भारत के तक्षशिला, नालंदा और विक्रम शिला जैसे विश्वविद्यालयों में दुनियाभर के विद्यार्थी अध्ययन के लिये आते थे। तेरहवीं सदी तक भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे था। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिये विश्वविद्यालय शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिये विशेष कदम उठाये। राज्यपाल रामनरेश यादव ने कहा कि यह हिन्दी विश्वविद्यालय दुनिया में अपने ढंग का अनूठा होगा। इसमें दुनिया की सभी महत्वपूर्ण भाषाओं के पठन-पाठन की व्यवस्था होगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आज एक संकल्प, एक सपना साकार हुआ है। हिन्दी भाषी प्रदेशों में केवल दो प्रतिशत लोग अंग्रेजी बोलते हैं। अंग्रेजी ज्ञान की कमी के कारण प्रतिभाओं को पिछड़ने नहीं देंगे।

नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि विश्वविद्यालय को तीन प्रमुख कामों की जिम्मेदारी लेनी होगी। हिन्दी की गरिमा बढ़ाना होगी। भारतीय भाषाओं के साहित्य हिन्दी भाषा में और हिन्दी साहित्य को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का काम करना होगा। हिन्दी की शुद्धता को बचाना होगा। उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियां शुरू हो गयी हैं।

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