हिन्‍दी लेखक सृजन सम्‍मान से विभूषित

भोपाल, दिसंबर 2012/ संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने 13 हिन्दी लेखकों को डॉ. शंकरदयाल शर्मा सृजन सम्मान से सम्मानित किया। समारोह में वर्ष 2010 और 2011 के सृजन सम्मान दिये गये। समारोह में प्रसिद्ध चिन्तक, विचारक एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने ‘शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य और स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचारों की प्रासंगिकता’ पर ओजपूर्ण एवं प्रेरक व्याख्यान दिया।

समारोह में संस्कृति मंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से डॉ. शंकरदयाल शर्मा सृजन सम्मान में 51 हजार रुपये की राशि दी जायेगी। अभी 31 हजार रुपये दिये जाते हैं। फरवरी में उज्जैन में विश्व संस्कृत साहित्य संवाद होगा। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के हर-संभव प्रयास किये जा रहे हैं। कॉलेजों में अधोसंरचना विकास के लिये विश्व बैंक से भी सहयोग लिया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद जी के जन्म के 150 वर्ष पूरे होने पर वर्षभर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। संस्कृति मंत्री ने बताया कि 100 एकड़ में वीर भारत परिसर का निर्माण किया जा रहा है। इसमें प्राचीन भारत के इतिहास से लेकर वर्तमान तक के इतिहास का संग्रह होगा। प्रदेश की प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान काल तक के इतिहास, संस्कृति, समाज और कला के बारे में दो खण्ड लिखे जा चुके हैं। अंतिम खण्ड 4 माह में पूर्ण कर लिया जायेगा।

समारोह में श्री होसबाले ने ‘शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य और स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचारों की प्रासंगिकता’  पर बोलते हुए कहा कि स्वामीजी के अनुसार मनुष्य के आत्मा की अनुभूतियों और अंतिर्निहित गुणों को विकसित करना ही शिक्षा है। चरित्र के बल से ही एकाग्रता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने ब्रह्मचर्य और परिवेश के साथ जुड़ने पर भी जोर दिया। स्वामीजी ने शिक्षकों के बारे में कहा है कि शिक्षक को विषय मर्मज्ञ, चरित्रवान और विद्यार्थियों के प्रति विशुद्ध प्रेम रखना चाहिये। उन्होंने बताया कि स्वामीजी ने विज्ञान की शिक्षा, महिला शिक्षा और गरीबों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा है कि धर्म और अध्यात्म की शिक्षा भी इनके साथ जरूरी है। श्री होसबाले ने कहा कि शिक्षा की सिर्फ नीति नहीं बनाई जाये बल्कि उसे बेहतर ढंग से लागू भी किया जाये। उन्होंने कोठारी, मुदलियार और राधाकृष्णन आयोग की अनुशंसाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य स्कूल की कक्षाओं में निर्मित होता है। अमेरिका के राष्ट्रपति जैफरसन का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी पहचान फाउण्डर ऑफ यूनिवर्सिटी के रूप में बताने का आग्रह किया था। जैफरसन ने वर्जीनिया यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी।

संस्कृति मंत्री ने मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी द्वारा स्थापित डॉ. शंकदयाल शर्मा सृजन सम्मान-2010 से अर्थ शास्त्र में डॉ. वल्लभदास मेहता, राजनीति विज्ञान में प्रो.के.पी. सिंह, प्राणी विज्ञान में डॉ. जे.पी.एन. पाठक, वाणिज्य में डॉ. पी.के.जैन एवं डॉ. एम.एल.सोनी और रसायन शास्त्र में डॉ. चन्द्रशेखर गोस्वामी तथा श्रीमती प्रभा दीक्षित को सम्मानित किया।

समारोह में सृजन सम्मान-2011 से समाज शास्त्र में प्रो. श्रीनाथ शर्मा, गृह विज्ञान में श्रीमती संतोष बटालिया, सांख्यिकी में प्रो.एस.एल.कोठारी एवं डॉ. मिलिन्द कोठारी, भूगोल में डॉ. नरेन्द्र मोहन अवस्थी और गणित में डॉ. एस.एस. श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप प्रत्येक लेखक को 31 हजार रुपये का चेक, शाल, श्रीफल एवं सम्मान-पटि्टका प्रदान की गई। समारोह में सचिव उच्च शिक्षा श्री जे.एन. कंसोटिया और हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री गोविंदप्रसाद शर्मा ने भी विचार व्यक्त किये।

अतिथियों ने शिक्षा गुणवत्ता विशेषांक पत्रिका ‘रचना’, ‘राजा भोज एवं उनकी भोजशाला’, ‘शब्द’ और ‘सामाजिक अनुसंधान पद्धति’ पुस्तक का विमोचन भी किया।

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