2017 तक खुले में शौच समाप्त करने का लक्ष्य

भोपाल, अगस्त 2014/ मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 तक प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों से ‘खुले में शौच” को पूर्ण रूप से समाप्त करवाने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार के सामने नगरों में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती है। इसको गंभीरता से लेकर गठित मुख्य मंत्री शहरी स्वच्छता मिशन की गतिविधियाँ निरंतर चल रही हैं। राज्य सरकार ने दृष्टि पत्र-2018 में भी शहरी स्वच्छता को महत्वपूर्ण स्थान दिया है।

मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन के अंतर्गत शहरों में गरीब वर्ग के लिये व्यक्तिगत शौचालय तथा आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण भी करवाया जा रहा है। साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं मैला निपटान प्रबंधन के कार्य भी करवाये जा रहे हैं। शहरों में समग्र स्वच्छता की व्यवस्था के हर-संभव प्रयास किये जा रहे हैं। अभी तक इस योजना के अंतर्गत 140 नगरीय निकाय में 92 हजार 406 व्यक्तिगत शौचालय तथा 608 सामुदायिक शौचालय के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। इन शौचालयों के निर्माण पर 208 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत आयेगी। चालू माली साल में इसके लिये 87 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन के पूर्व राज्य के नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता की स्थिति को उन्नत करने एवं नगरीय पर्यावरण में सुधार लाने के लिये एकीकृत नगरीय स्वच्छता कार्यक्रम वर्ष 2009 में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इस कार्यक्रम को वर्ष 2012-13 में मिशन के रूप में अपग्रेड कर अगले पाँच साल के लिये 459 करोड़ 44 लाख रुपये की कार्य-योजना बनाकर क्रियान्वित किया जा रहा है। मिशन के तहत आगामी पाँच वर्ष में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों के लिये साढ़े तीन लाख व्यक्तिगत स्वच्छ शौचालय बनाये जायेंगे। इसके अलावा 390 सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय के निर्माण का लक्ष्य भी रखा गया है।

राज्य शासन ने आधुनिक तथा वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को निजी जन-भागीदारी के अंतर्गत क्षेत्रीय लैंड फिल साइट के माध्यम से क्रियान्वित करवाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाये हैं। इसके पहले चरण में कटनी नगर निगम तथा उसके समीप जिले में स्थित नगरीय निकायों के लिये घर-घर से कचरा एकत्रित करके वैज्ञानिक क्षेत्रीय लैंड फिल साइट तक कचरे के डिस्पोजल के कार्य के लिये कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश के अन्य नगरों की कार्य-योजना भी तैयार की गई है।

रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से ग्वालियर शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजना का क्रियान्वयन करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त इंदौर में एशियाई विकास बैंक तथा जेएनएनयूआरएम के समन्वित स्रोतों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य भी हो रहा है। नगरीय क्षेत्रों को कचरा-मुक्त करवाने की दिशा में मिशन के तहत महेश्वर एवं नामली नगर परिषद द्वारा शत-प्रतिशत घरों से कचरा एकत्रीकरण के द्वारा जैविक खाद बनवाने की कार्यवाही भी की जा रही है। 100 दिन की कार्य-योजना में भी सभी नगर निगमों के 2 वार्ड में घर-घर से कचरा एकत्र करने का कार्य भी आरंभ किया गया है।

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