3 करोड़ ग्रामीण महिलाएँ आजीविका मिशन से जुड़ीं

भोपाल, अक्टूबर 2014/ देश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की शुरूआत से अब तक पिछले तीन वर्ष में 3 करोड़ एक लाख 3 हजार 895 गरीब ग्रामीण महिलाएँ जुड़ चुकी हैं। यह महिलाएँ 25 लाख 66 हजार 203 स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। इन्होंने अब तक स्वयं की बचत से 5978 करोड़ भी जमा कर लिये हैं। इस राशि से समूह की सदस्य महिलाओं के आर्थिक उत्थान की गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। समूहों को गत वर्ष 2013-14 में 21 हजार 876 करोड़ रुपये का बेंक लिंकेज भी उपलब्ध करवाया जा चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा बेंक-मित्र योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में यह जानकारी दी गई। कार्यशाला में 17 राज्य के 80 प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। कार्यशाला में तय किया गया कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अपने-अपने प्रदेशों में बेंक-मित्र योजना के क्रियान्वयन के लिये कार्य-योजना और नीति तैयार करेंगे। मौजूदा वित्तीय वर्ष में मार्च माह तक सारे देश में 5000 से अधिक बेंक-मित्र बनाये जायेंगे। यह बेंक-मित्र स्व-सहायता समूहों तथा उनकी सदस्य महिलाओं और बेंकों के बीच बेहतर समन्वय का काम करेंगे।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य आजीविका फोरम श्री एल.एम. बेलवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 16 अक्टूबर, 2014 को राज्य-स्तरीय बेंकर्स सलाहकार समिति की बैठक में बेंक-मित्र योजना का अनुमोदन किया था। मध्यप्रदेश द्वारा लागू की गई बेंक-मित्र योजना की सफलता के आधार पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने सारे देश में इसे लागू करने का फैसला लिया और मात्र कुछ ही दिनों में भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला का यह आयोजन हुआ है।

श्री बेलवाल ने बताया कि प्रदेश में मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 से अब तक स्व-सहायता समूहों को 888 करोड़ का बेंक लिंकेज मुहैया करवाया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में 22 हजार 608 स्व-सहायता समूह की 2 लाख 20 हजार महिला सदस्य के 263 करोड़ का बेंक लिंकेज उपलब्ध करवाया गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 10 हजार 626 स्व-सहायता समूह की 9 लाख 4 हजार 224 महिला सदस्य को 115 करोड़ रुपये का बेंक लिंकेज करवाया जा चुका है। बेंक लिंकेज उपलब्ध करवाने और गरीब महिलाओं के आर्थिक उत्थान में योजना बेहद प्रभावी सिद्ध हुई है। मिशन से जुड़े हजारों ग्रामीण गरीब परिवार की वार्षिक आय एक लाख से भी अधिक हो गई है।

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