12 वर्षों से निशुल्क योग के जरिए स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहीं योगदूत शैलजा
उज्जैन/ स्कूल की घंटी बजने के बाद अधिकांश शिक्षक घर लौट जाते हैं, लेकिन उज्जैन की शिक्षिका शैलजा रिछारिया का दिन तब भी खत्म नहीं होता। पिछले 12 वर्षों से वे अपना समय, अपना वाहन और अपनी जेब से खर्च कर लोगों को नि:शुल्क योग सिखा रही हैं। हजारों लोगों तक स्वस्थ जीवन का संदेश पहुंचा चुकीं शैलजा के लिए योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम है।
दौलतगंज हाई स्कूल क्रमांक-2 में सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका शैलजा रिछारिया अध्यापन के साथ-साथ योग सेवा का दायित्व भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। योग में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त शैलजा बताती हैं कि उनकी इस यात्रा को नई दिशा तब मिली, जब उन्होंने भोपाल स्थित योग प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लिया। प्रदेश के चुनिंदा जिलों के शिक्षकों के साथ हुए इस प्रशिक्षण ने योग के प्रति उनकी समझ को और व्यापक बनाया। इसके बाद योग केवल व्यक्तिगत अभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनसेवा का माध्यम बन गया। भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों में वे उन चुनिंदा लोगों में हैं जिन्होंने सीखी हुई विद्या को लगातार समाज के बीच पहुंचाया।
विद्यालय की प्राचार्य आरती अग्रवाल हमेशा उनका उत्साह बढ़ाती हैं। यही कारण है कि योग शिविरों में नियमित समय देने के बावजूद उनके विषय का परीक्षा परिणाम लगातार शत-प्रतिशत रहता है। उनका मानना है कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल कक्षा तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति भी होती है। पति राकेश कुमार रिछारिया, जो सदायड़ा हाई स्कूल में शिक्षक हैं, सहित परिवार के अन्य सदस्य भी नियमित योगाभ्यास करते हैं और इस सेवाभावी अभियान में सहभागी हैं।
पिछले डेढ़ वर्ष से माता मंदिर स्थित मुख्यमंत्री नि:शुल्क योग प्रशिक्षण केंद्र में जिला योग अधिकारी के रूप में नियमित सेवाएं दे रही हैं। यह उनकी आधिकारिक जिम्मेदारी है, लेकिन इसके समानांतर पिछले 12 वर्षों से पूरी तरह स्वैच्छिक रूप से भी योग सेवा जारी है। मक्सी रोड स्थित रतन एवेन्यू में करीब डेढ़ वर्ष तक उन्होंने रहवासियों को नि:शुल्क योग सिखाया। विभिन्न क्लबों, विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, केंद्रीय भेरूगढ़ जेल तथा जिले के अनेक विकासखंडों में आयोजित योग शिविरों में भी बिना किसी मानदेय के लगातार भाग लेती रही हैं। कोविड काल में विभाग की ओर से ऑनलाइन योग कक्षाएं संचालित कर लोगों को घर बैठे योग से जोड़ा।
100 से अधिक योग प्रशिक्षक तैयार किए
केवल स्वयं योग सिखाने तक ही उनका कार्य सीमित नहीं रहा। पिछले 12 वर्षों में वे 100 से अधिक योग प्रशिक्षक तैयार कर चुकी हैं। इनमें से अनेक आज पेशेवर योग प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। स्वयं आज भी 'जो आएगा, वह पाएगा' की भावना के साथ निशुल्क योग सिखाने में विश्वास रखती हैं।
अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को योगाभ्यास करा चुकी शैलजा की सेवाभावना को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2024 में उन्हें राज्य स्तरीय 'योगिनी अवार्ड' से सम्मानित किया। इसके अलावा महापौर, नगर निगम सभापति, सुभाषचंद्र बोस जयंती समारोह समिति सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं ने भी उन्हें सम्मानित किया है। वे विभिन्न योग प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका भी निभाती रही हैं।
बढ़ रहा है योग के प्रति लोगों का विश्वास
पिछले एक दशक में योग के प्रति लोगों का विश्वास और आकर्षण उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इसका श्रेय वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मिली वैश्विक पहचान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा योग को लगातार दिए जा रहे प्रोत्साहन को देती हैं। उनका कहना है कि जब देश और प्रदेश का नेतृत्व स्वयं योग अपनाता है तो समाज में भी उसका सकारात्मक संदेश पहुंचता है।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दशहरा मैदान में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय कार्यक्रम में भी वे अपने साथी योग प्रशिक्षकों संगीता राय और अशोक इंदरिया के साथ हजारों विद्यार्थियों और योग साधकों को योगाभ्यास कराएंगी। शहर की अनेक संस्थाएं भी इस अवसर पर योग संबंधी आयोजन करेंगी।
"डॉक्टर कहते हैं, तब लोग योग की ओर आते हैं"
योग को वे केवल शरीर को स्वस्थ रखने का अभ्यास नहीं, बल्कि तन और मन दोनों को संतुलित रखने वाली जीवन पद्धति मानती हैं। उनका कहना है कि अधिकांश लोग तब योग की ओर आते हैं, जब डॉक्टर इसकी सलाह देते हैं, जबकि इसे बीमारी के बाद नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की नियमित दिनचर्या के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
नियमित योगाभ्यास से उनके शिविरों में आने वाले अनेक लोगों की शुगर नियंत्रित हुई है। थायराइड, सायटिका, डिप्रेशन, मानसिक तनाव तथा महिलाओं की कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
वे कहती हैं, "मैं पिछले 12 वर्षों से अपना समय और धन इसलिए दे रही हूं कि लोग अस्पताल पहुंचने से पहले योग तक पहुंचें। जिस दिन लोग बीमारी के बाद नहीं, स्वस्थ रहने के लिए योग अपनाने लगेंगे, उस दिन मेरी सेवा सफल मानी जाएगी।"