भारत को अपनी आजादी की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थ

विभाजन विभीषिका दिवस : आजादी के जश्न से पहले बंटवारे का दर्द, मानचित्र पर खींची रेडक्लिफ लाइन श्राप से कम नहीं

Partition Horror Day Radcliffe Line

विभाजन विभीषिका दिवस (Partition Horrors Day 14 August) : गुलामी की बेड़ी तोड़कर जब कोई देश आजाद हो जाए तो खुशी सातवें आसमान पर होती है। उस देश की आजादी के लिए लड़ने वाले लोग भगवान की तरह पूजे जाते हैं। देश के युवा जहां बेहतर भविष्य की कल्पना करने लगते हैं वहीं महिलाएं और बच्चे उच्च गुणवत्ता वाले जीवन के ख्वाब देखते हैं। आजादी भारतीयों को भी नसीब हुई लेकिन खुशी और जश्न की जगह भारत के हिस्से आया बंटवारे का दर्द। जिन घरों में आजादी दिवाली की तरह मनाई जानी थी वहां मातम पसरा था। सड़कों पर जिन्हें भारत माता के जयकारे लगाने थे वे अपनी जिंदगी की भीख मांग रहे थे।

भारत को अपनी आजादी की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। एक ब्रिटिश बैरिस्टर द्वारा भारत के महान नक्शे पर खींची गई रेखा ने करोड़ों भारतीयों के भाग्य को ही बदल दिया था। इस बंटवारे की त्रासदी को एक ब्रिटिश कवि डब्ल्यू.एच. ऑडेन ने अपनी कविता ‘विभाजन’ में बखूबी उकेरा है।

पढ़िए इस कविता का हिंदी अनुवाद...

निष्पक्ष था वह, जब आया इस मिशन पर,

इस धरती को पहले कभी न देखा, जिसे बांटना था उसे, 

दो समुदायों के बीच, जो थे उन्माद में डूबे,

अलग भोजन, अलग देवता, जो कभी न मिले।  

"समय कम है," लंदन में बताया गया था, 

"सुलह या तर्क की अब कोई गुंजाइश नहीं,

बंटवारा ही एकमात्र रास्ता है अब।

"वाइसराय का पत्र कहता है, 

"उनके साथ कम दिखें, तो बेहतर, 

हमने आपके लिए अलग ठिकाना तय किया। 

"चार जज दिए गए, दो मुस्लिम, दो हिंदू,

सलाह के लिए, पर अंतिम फैसला आपका।

एकांत में बंद, एक भव्य हवेली में, 

पुलिस रात-दिन बगीचों में हत्यारों से बचाव को,

वह जुट गया काम पर, लाखों की तकदीर तय करने,

नक्शे पुराने, जनगणना के आंकड़े गलत,

न समय था जांच का, न विवादित इलाकों को देखने का।

गर्मी थी तपती, पेचिश ने किया परेशान,

फिर भी सात हफ्तों में, तय हो गई सरहदें,

एक महाद्वीप बंट गया, अच्छे या बुरे के लिए।  

अगले ही दिन वह इंग्लैंड रवाना हुआ,

अच्छे वकील की तरह, केस को भूल गया। 

फिर कभी वापस न लौटा, उसे डर था,

क्लब में बताया था उसने, "कहीं गोली न मार दी जाए।"

(मूल अंग्रेजी कविता: डब्ल्यू.एच. ऑडेन, अनुवाद हिंदी में) 

सर सिरिल रेडक्लिफ की विभाजन में भूमिका :

यह उस फेमस कविता का मूल भाव मात्र है जिसे कवि डब्ल्यूएच ऑडेन ने 1966 में लिखा था। माना जाता है कि, यह कविता सर सिरिल रेडक्लिफ के बारे में है। ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत - पाकिस्तान के बीच सीमा तय की। डब्ल्यूएच ऑडे की यह कविता 'विभाजन', रैडक्लिफ और उनके काम की सर्वश्रेष्ठ आलोचनाओं में से एक है।

मानव इतिहास का सबसे बड़ा पलायन :

भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद 1947 से चला आ रहा है। जब नक्शे में दोनों देशों को अलग करने वाली लाइन - रेडक्लिफ खींची गई तो उसके परिणामस्वरूप दुनिया ने मानव इतिहास का सबसे बड़ा पलायन, बलात्कार, दंगे और नरसंहार जैसी त्रासदी देखी। इस तरह की अराजकता भारतीय उप महाद्वीप में पहले कभी नहीं देखी गई थी।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम जानेंगे आखिर किस तरह से एक सर सिरिल रेडक्लिफ ने भारत और पाकिस्तान का बंटवारा किया और कैसे यह लाइन कहलाई - The ‘Bloody’ Line...

पहली बार भारत आए रेडक्लिफ :

8 जुलाई, 1947 भारत की धरती पर पहली बार ब्रिटिश बैरिस्टर सर सिरिल रेडक्लिफ ने कदम रखा। इस व्यक्ति के हाथ में वो पेन था जिससे खिंचने वाली लाइन यह तय करती कि, कौनसा हिस्सा पाकिस्तान कहलाएगा और कौनसा भारत में रह जाएगा। 

सीमाएं निर्धारित करने के लिए पांच हफ्ते का समय  :

सर सिरिल रेडक्लिफ के पास स्वतंत्र भारत और पाकिस्तान के बीच सीमाएं निर्धारित करने के लिए बस पांच हफ्ते का समय था। उन्होंने दो सीमा आयोगों की अध्यक्षता की, एक पंजाब के लिए और दूसरा बंगाल के लिए, जिनमें दो मुस्लिम और दो गैर-मुस्लिम सदस्य थे। 

जिस व्यक्ति को नक्शे पर सीमा तय करनी थी उन्होंने पहले कभी भारत का दौरा नहीं किया था, न ही उन्हें देश की सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति की पर्याप्त समझ थी।

फिर सवाल ये उठता है कि, आखिर क्यों उन्होंने यह काम अपने हाथ में लिया :

इसके जवाब में कहा जाता है कि, उन्होंने इस कार्य को अपने राष्ट्र (ब्रिटेन) के लिए एक सेवा माना। सीमित समय सीमा और पुराने डेटा के आधार पर विभाजन जैसी आपत्तियों के बावजूद उन्होंने यह काम किया। जिस समय यह सब तय हो रहा था ब्रिटेन आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। दो विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन के आर्थिक संसाधन सिकुड़ने लगे थे। ब्रिटेन के अधिकारी भारत से अपना काम समेट कर जल्द से जल्द अपने देश लौट जाना चाहते थे। इसी के चलते उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा तय करने का काम एक ब्रिटिश बैरिस्टर को दिया।

अगले ही दिन ब्रिटेन वापसी :

भारी दबाव और बिना जमीनी हकीकत के बारे में जाने सर सिरिल रैडक्लिफ ने भारत को पाकिस्तान से अलग करने वाली रेखा खींच दी। इसके अगले दिन ही उन्होंने भारत छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने कभी भारत या पाकिस्तान की ओर पलटकर नहीं देखा। माना जाता है कि उन्होंने सरकार द्वारा दी गई फीस अस्वीकार की और फिर सेवानिवृत्त हो गए।

भारत - पाकिस्तान बंटवारे के बाद जो हुआ वो इतिहास की सबसे बड़ी मानव त्रासदी में से एक है। भारत और पाकिस्तान का बंटवारा सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए किसी श्राप से कम नहीं था। लोगों को यह पता ही नहीं था कि, उन्हें जाना कहां है? क्या भारत है और क्या पाकिस्तान?

खुलेआम सांप्रदायिक हिंसा हुई :

बंटवारे की आड़ में खुलेआम सांप्रदायिक हिंसा हुई। महिलाओं और बच्चों के साथ जो हुआ उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। लोग अपने घरों को छोड़कर बस अपनी जान बचाने के लिए भागते दिखाई देते थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि, उस समय सड़कों पर इंसानी भेष में कई जानवर भी घूम रहे थे।

लगभग 1.4 करोड़ लोग अपने घरों से विस्थापित हुए। शरणार्थी के रूप में, वे पैदल, रेलगाड़ी से या किसी भी साधन से यात्रा करते रहे। इस पलायन के कारण लगभग 10 लाख लोगों गई। आज तक रेडक्लिफ लाइन भारत - पाकिस्तान के बीच संघर्ष का कारण बनी हुई है। यह दुनिया की सबसे विवादित सीमा में से एक है। यूं तो 17 अगस्त 1947 को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा हुई लेकिन 14 अगस्त से सीमावर्ती क्षेत्रों से भीषण हिंसा की खबरें आना शुरू हो गई थी। जहां दिल्ली में सत्ता का हस्तांतरण चल रहा था वहीं सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सदी की सबसे बड़ी त्रासदी के गवाह बन रहे थे।

इन सभी ऐतिहासिक घटनाक्रमों के चलते अब भारत में स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) से पहले 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने अपनी जान गंवाई भारत के महान मानचित्र पर खींची गई एक मामूली सी रेडक्लिफ लाइन के चलते। वे ताउम्र आजादी के सुखद अनुभव का इंतजार करते रहे लेकिन आजादी के ठीक पहले लाखों लोग मारे गए और करोड़ो लोग सड़क पर आ गए।