अजय बोकिल

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में एमएमएस का मामला काफी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यूनिवर्सिटी में हाल ही में हॉस्टल की एक छात्रा द्वारा सहपाठी छात्राओं के नहाते हुए वीडियो बनाकर उसे पुरुष दोस्तों को एमएमएस करने की घटना से समूचा देश और समाज विचलित और क्षुब्ध है। सिर्फ इसलिए नहीं कि चोरी छिपे बनाए गए ऐसे अश्लील वीडियो वायरल हुए हैं बल्कि इसलिए भी कि ये वीडियो एक छात्रा ने ही बनाया और भेजा। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब महिलाएं, महिलाओं के बीच भी सुरक्षित नहीं हैं?

अगर यहां भी सुरक्षित नहीं हैं तो सुरक्षा और निजी गोपनीयता के लिए वो किस पर तथा कैसे भरोसा करें? इस मामले में विवि प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी मामले को दबाने वाली ज्यादा लगती है। जब छात्राओं ने न्याय की गुहार लगाते हुए इसका कड़ा विरोध किया और ऊपर से दबाव पड़ा, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।

इस पूरे घटनाक्रम के तीन अहम बिंदु हैं। पहला तो लड़कियों के हॉस्टल में सुरक्षा प्रबंधों पर नए सिरे से विचार की जरूरत, दूसरा हॉस्टल में रहने वाली हर छात्रा की गतिविधि पर नजर की दरकार, (हालांकि यह बहुत कठिन काम है) और तीसरा गर्ल्स हॉस्टल की विश्वसनीयता फिर से कायम करना।

इस घटना के बाद विवि के हॉस्टलों में रहने वाली छात्राएं हॉस्टल छोड़कर चली गई हैं, वो शायद ही वापस आएं। आना चाहें भी तो उनके अभिभावक, जो खुद भी भीतर से हिले हुए हैं, इसकी अनुमति शायद ही दें। इसी के साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं हॉस्टल छोड़ रही हैं तो वो बाद में रहेंगी कहां? इससे छात्राओं के रहने की नई समस्या पैदा होगी, वो एक अलग मुद्दा है।

दरअसल इक्कीसवी सदी में मोबाइल संस्कृति अब जिस विकृत दौर में पहुंच गई है, चंडीगढ़ कांड उसका एक चेतावनी भरा उदाहरण है। इससे यह भी पता चलता है कि आत्मकेन्द्रित हमारी युवा पीढ़ी क्या सोचती है, संस्कारों का अर्थ उसके लिए क्या है और उसके मनोरंजन के तरीके क्या और कैसे हैं? वो शायद इस बात पर विचार के लिए भी तैयार नहीं है कि उनकी ऐसी घिनौनी हरकत से पूरा समाज किस तरह से कंपित होता है। यही नहीं मोबाइल एडिक्शन के इस महारोग में शीलता और अश्लीलता की पर्दादारी भी तकरीबन ध्वस्त हो चुकी है।

जिस चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल में यह सब कांड हुआ, वो एक निजी विवि है और दस साल पहले ही स्थापित हुआ। यह पंजाब राज्य की सीमा में आता है। यहां ज्यादातर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के छात्र हैं। आरोपी छात्रा भी मूलत: हिमाचल प्रदेश के रहने वाली है और उसकी अपने राज्य के दो युवाओं से ‘अश्लील दोस्ती’ थी।

इस पूरे मामले की जड़ में क्या है, इसके तार कहां-कहां तक फैले हैं, क्या यह पोर्न कारोबार के अंतरराष्ट्रीय जाल का हिस्सा है या फिर यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर अश्लील मनोरंजन का शगल है, इन सब बातों का खुलासा मामले की निष्पक्ष जांच से ही संभव है।

यहां बड़ा सवाल यह भी है कि संबंधित छात्रा ने ऐसा वीडियो क्यों बनाया? एक महिला के लिए महिला का स्नान करना कोई असामान्य और वीडियो रिकॉर्डिंग की बात नहीं है, जब तक उसे किसी पुरुष की दूषित निगाह से न देखा जाए। इसीलिए महिलाओं के स्नान घर और बाथरूम अलग होते हैं। बावजूद इसके वो छात्रा वीडियो बनाकर अपने ब्‍वॉय फ्रेंड को भेज रही थी तो इसके पीछे यकीनन कोई न कोई कारण रहा होगा। यह कोई दबाव हो सकता है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा भी।

भारत में कई महिलाएं अब पोर्न उद्योग का हिस्सा भी जाने-अनजाने में बन रही हैं और पैसा भी कमा रही हैं। यह मामला भी उसी से जुड़ा हो सकता है। आरोपी छात्रा हॉस्टल की महिला वार्डन की शुरुआती पूछताछ में पहले तो सब छुपाती रही, लेकिन ज्यादा दबाव बनाने पर उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने अपने दोस्तों के नाम भी बताए। उधर शिमला में उन दो कथित दोस्तों को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उनका कहना है कि उनके फेक अकाउंट से यह सब किया गया। सच्चाई क्या है, मामले की साइबर जांच में पता चलेगा।

मामले में अब जांच कमेटियों की रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। कलेक्टर ने तत्काल मामले की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया था। साथ ही एसडीएम के नेतृत्व में टीम बनाकर उसे सात दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उधर विवि ने भी दो हॉस्टल वार्डनों को सस्पेंड कर दिया है और जांच बैठा दी है। एडीजीपी गुरप्रीत कौर के नेतृत्व में महिला अधिकारियों की जांच टीम बनाई गई है।

सवाल यह भी है कि अगर कोई छात्रा ऐसे नाजायज वीडियो बना रही थी तो इसकी खबर विवि प्रशासन को क्यों नहीं लगी? बताया जाता है कि वो अश्लील वीडियो लीक होने के बाद यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के पास एक अंतरराष्ट्रीय कॉल भी आया, जिसमें कॉलर ने लड़की को यह कहकर धमकाया कि उसका वीडियो भी तैयार है। मुंह बंद न किया तो उसे भी वायरल कर देंगे।

इस मामले में पंजाब पुलिस का यह कहना गले उतरने वाला नहीं है कि युवती ने दोस्तों को नहाते हुए केवल अपना वीडियो भेजा, बाकी लड़कियों का नहीं। पुलिस का यह स्टैंड मामले को रफा-दफा करने का ज्यादा लगता है क्योंकि जब आरोपी छात्रा को अपना अश्लील वीडियो भेजने में झिझक नहीं थी तो दूसरी छात्राओं के वीडियो भेजने में क्यों होगी?

हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ ऐसे चल रहा था मानो रोजमर्रा की बात हो। उस आरोपी छात्रा ने एक क्षण के लिए भी यह नहीं सोचा कि जिस दिन इस खेल का भंडाफोड़ होगा, उसका नतीजा क्या होगा? खुद उस छात्रा के मां-बाप क्या सोचेंगे? वो छात्राएं कहां मुंह छिपाएंगी, जिनके वीडियो चुपके से बना लिए और भेज भी दिए गए।

यह कड़वी सचाई है कि आज हम उस दुनिया में जी रहे हैं, जब जीवन का कोई भी कोना रहस्य नहीं रह गया है। सब कुछ नेट पर उपलब्ध है। सरे आम बिक भी रहा है। इंटरनेट की दुनिया ने नैतिकता और अनैतिकता की लक्ष्मण रेखा को भी लगभग मिटा दिया है और इसका उल्लंघन करने वाला हर रावण बेशर्मी से हंस रहा है। इस घिनौने कांड का दोषी जो भी हो, लेकिन देश भर में हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं, कामकाजी महिलाओं के मन में इसने एक दहशत भर दी है।

देश में करीब 2 करोड़ छात्राएं उच्च अध्ययन कर रही हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। इनमें से लगभग एक तिहाई छात्राएं अलग-अलग हॉस्टलों में रहती हैं। चंडीगढ़ की घटना ने इन सब के सामने प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है कि उनकी निजता की सुरक्षा की गारंटी क्या है? हो सकता है कि आरोपियों का दोष सिद्ध हो जाए और उन्‍हें सजा भी मिले, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से हिली एक छात्रा द्वारा हॉस्टल छोड़ते समय किया गया एक कमेंट बहुत कुछ कहता है। उसने कहा कि-
‘’हो सकता है कि जांच में यह मामला झूठा भी निकले, लेकिन अश्लील धंधों में लिप्त लोगों को महिलाओं की ब्लैकमेलिंग का नया हथकंडा मिल गया है, उसका क्या?’’
(सोशल मीडिया पर लेखक की पोस्‍ट से साभार)
(मध्‍यमत)
डिस्‍क्‍लेमर- ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता, सटीकता व तथ्यात्मकता के लिए लेखक स्वयं जवाबदेह है। इसके लिए मध्यमत किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है। यदि लेख पर आपके कोई विचार हों या आपको आपत्ति हो तो हमें जरूर लिखें।
—————
नोट मध्यमत में प्रकाशित आलेखों का आप उपयोग कर सकते हैं। आग्रह यही है कि प्रकाशन के दौरान लेखक का नाम और अंत में मध्यमत की क्रेडिट लाइन अवश्य दें और प्रकाशित सामग्री की एक प्रति/लिंक हमें madhyamat@gmail.com  पर प्रेषित कर दें। – संपादक