आकाश शुक्‍ला

जब हमें अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना होती है, तब हमारी प्राथमिकता सर्वोच्च योग्यता वाले शिक्षक और सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में बच्चे को शिक्षा दिलवाने की रहती है, हम कभी शिक्षक की जाति, धर्म या वह किस क्षेत्र से आता है, इस पर ध्यान नहीं देते, यह बात पूरे देश में शिक्षकों की भर्ती पर लागू होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में एक मामले की सुनवाई करते समय यह कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21A के संदर्भ में शिक्षा की गारंटी के अधिकार के तहत बच्चों को दी जाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परिकल्पना की जाएगी, जो यह दर्शाता है कि शिक्षकों को मेधावी और सर्वोत्तम होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक अध्यापकों की भर्ती से जुड़े एक मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा मित्र एसोसिएशन द्वारा दायर की गई अपीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और मोहन एम. शांतनागौदर की पीठ ने कहा कि सहायक शिक्षक भरती परीक्षा ATRE- 2019 में 65-60 फीसदी अंक तय करना पूरी तरह से वैध और न्यायसंगत है। स्कूलों में शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद को, विशेष रूप से स्कूलों या कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए व्यक्तियों की योग्यता निर्धारित करने का अधिकार है।

ATRE -2019 के साथ-साथ परीक्षा की प्रकृति और उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए, कट ऑफ को, सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध प्रतिभा को आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के चयन के लिए राज्य की ओर से यह प्रयास पूरी तरह से न्यायोचित है। बच्‍चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों को मेधावी और सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। कोई भी प्रक्रिया जो सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से लागू होती है और सबसे अच्छी प्रतिभा को तैयार करने के लिए डिज़ाइन की गई है, उसे मनमाना या अतार्किक नहीं कहा जा सकता है। हमारे विचार में, सरकार ने इस तरह का कट ऑफ तय करके अपने अधिकार का उपयोग किया है।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण करने और सर्वोच्च योग्यता प्राप्त मेधावी शिक्षकों का चयन करने का समर्थन करता है, जिससे छात्र छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक मिल सके। इस मामले मे शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण पर कोई फैसला नहीं दिया गया है केवल शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के संबंध में निर्णय दिया गया है, परन्तु यह मामला एक नई बहस को जन्म देगा जो उचित भी है। बहस में कई सवाल उठ सकते हैं जैसे-

  1. क्या हमारी सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण जैसी व्यवस्था के कारण न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने की आवश्यकता है?
  2. क्या हम आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं के साथ शिक्षा में आरक्षित वर्ग के योग्य उम्मीदवारों का चयन करते समय न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण कर उच्च गुणवत्ता वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का चयन कर सकते हैं?
  3. क्या स्कूली एवं उच्च शिक्षा संस्थान में शिक्षकों की भर्ती के समय आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं सर्वोत्तम शिक्षकों के चयन में बाधक है?
  4. शिक्षकों के चयन में सर्वोत्तम शिक्षकों का चयन न कर छात्र छात्राओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने में हमारी व्यवस्थाएं क्‍या बाधक बन रही हैं?
  5. जब हम उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों को विदेश भेजने में नहीं हिचकते जहां उनकी जाति, धर्म और भाषाएं तक हमारे देश से मेल नहीं खाती, और शिक्षकों की जाति धर्म और राष्ट्र तक हमसे अलग हैं, तो हमारे देश में शिक्षकों की भर्ती केवल योग्यता के आधार पर क्यों नहीं होती?
  6. क्या छात्र-छात्राओं को संविधान के अनुच्छेद 21 क के तहत उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है एवम् इसके लिए वर्तमान शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में परिवर्तन आवश्यक है?

इन सभी सवालों का एक जवाब है कि शिक्षकों की भर्ती में सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले शिक्षकों को प्राथमिकता देकर हम सामान्य, अनुसूचित जाति एवं जनजाति,  पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों में से सर्वोत्तम योग्यता वाले शिक्षकों का चयन कर छात्र-छात्राओं का भविष्य उज्जवल बना सकते हैं एवं उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर सकते हैं, जो उनका संवैधानिक अधिकार भी है। योग्यता किसी जाति धर्म, क्षेत्र और राष्ट्र के बन्धन में नहीं होती, इसलिए राष्ट्र के निर्माण और उन्नति के लिए योग्य शिक्षक पहली आवश्यकता है जो योग्य छात्र-छात्राओं व देश का निर्माण कर सकते है।

शिक्षकों की नियुक्ति में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण अति आवश्यक है, जिससे हमें सर्वोत्तम योग्यता वाले शिक्षकों के चयन में मदद मिलेगी। सर्वोत्तम योग्यता वाले शिक्षक का चयन जाति, धर्म, क्षेत्र के आधार पर कभी नहीं होना चाहिए। हर जाति, धर्म एवं क्षेत्र में सर्वोत्तम योग्यता वाले शिक्षक उपलब्ध है, उनकी योग्यता का सम्मान करते हुए उनकी नियुक्ति की जाना चाहिए जिससे हर जाति, धर्म और क्षेत्र के छात्र-छात्रा, योग्य शिक्षकों से बेहतर शिक्षा प्राप्त कर देश के भविष्य को उज्जवल कर सकें। ‘धन पर केवल धनी का अधिकार होता है, परंतु योग्यता पर समाज का अधिकार होता है।’