मध्यमत विशेष

चाह थी सिर्फ तुम्हारी…

गिरीश उपाध्‍याय चाह थी सिर्फ तुम्हारी -------------- एक समय था जब सिर्फ और सिर्फ चाह थी तुम्हारी केवल तुम ही तुम बसी थी सपनों में तुम ही थीं मेरी प्रियतमा सिर्फ तुम्हारी ही हसरत थी...