रवि भोई

लगता है छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं के बीच तलवारें खिंच गई हैं और अब सत्ता-संगठन में दो फाड़ साफ़ दिखाई देने लगा है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पिछले करीब चार महीने से कयासबाजी का दौर चल रहा है। राजनीतिक उठापटक और गर्मागर्मी के बीच सितंबर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधायकों को दिल्ली ले जाकर शक्ति प्रदर्शन किया। अब कहा जा रहा है कि पिछले दिनों छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम, मंत्री ताम्रध्वज साहू, वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा एवं धनेन्द्र साहू ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से भेंट कर अपनी बातें रखी।

चर्चा है कि मोहन मरकाम ने अपने जिले कोंडागांव के एक पुलिस अधीक्षक द्वारा रिश्वत मांगने का मुद्दा श्रीमती गांधी के सामने रखा। मोहन मरकाम के आरोप के बाद सरकार ने कोंडागांव में पदस्थ उस एसपी को जशपुर भेज दिया और अब उन्हें कांकेर का डीआईजी बना दिया है। कोंडागांव मोहन मरकाम का विधानसभा क्षेत्र है और वह इसी डीआईजी के इलाके में है। वहीँ मुख्यमंत्री की रेस में शामिल स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पिछले कई दिनों से दिल्ली में हैं और वे सरकारी आयोजन ट्राइबल डांस फेस्टिवल में भी नजर नहीं आए।

टीएस सिंहदेव 31 अक्टूबर को अपने जन्मदिन पर भोपाल में रहेंगे। लोगों का कहना है कि राज्य स्थापना दिवस एक नवंबर के कार्यक्रम में भी वे शायद ही शामिल हों। वहीँ राज्य के कुछ मंत्री भी भूपेश बघेल की धारा से अलग बह रहे हैं। जशपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन में टीएस सिंहदेव के समर्थन में बात करने वाले पूर्व जिला अध्यक्ष पवन अग्रवाल के साथ धक्कामुक्की और शनिवार को राजीव भवन में एक महामंत्री के साथ एक निगम अध्यक्ष द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की घटना से साफ़ है कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कब क्या विस्फोट हो जाय किसी को पता नहीं है?

रीता शांडिल्य का कद घटा
भूपेश सरकार ने 2002 बैच की आईएएस रीता शांडिल्य को राजस्व सचिव के पद से हटाकर सचिव तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग बनाया है। नई पदस्थापना के साथ रीता शांडिल्य प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला की मातहत हो गईं। राजस्व विभाग में वे इंडिपेंडेंट थीं, उनके ऊपर न तो कोई प्रमुख सचिव था और न ही अपर मुख्य सचिव था। कहा जा रहा है खाली पड़ी सरकारी जमीन को बेचने में लेटलतीफी रीता शांडिल्य पर भारी पड़ गई। कलेक्टर कांफ्रेंस में कई कलेक्टर ने खाली पड़ी सरकारी जमीन को बेचने का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित होने की शिकायत की थी। भुइयां पोर्टल की खराबी के चलते धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन न होने का मामला भी रीता शांडिल्य के खिलाफ गया। रीता शांडिल्य की नई पोस्टिंग को लोग उनका कद घटने के तौर पर देख रहे हैं। उनकी जगह 2005 बैच के आईएएस नीलम एक्का को राजस्व सचिव बनाया गया है।

वाह रे कांग्रेसी नेता
पिछले रविवार को जशपुर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में कांग्रेस के नेता आपस में उलझे गए और उनमें धक्का-मुक्की हुई। कहते हैं प्रदेश के प्रभारी सचिव सप्तगिरि उल्का की मौजूदगी में घटित इस घटना को दिखाने और उसके बारे में लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के लिए जशपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष और एक कांग्रेस विधायक थाने पहुंच गए, पुलिस पर दबाव बनाया कि पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह तो “करे कोई, भरे कोई” वाली बात हो गई। घटना को देश भर के पत्रकारों ने कवर किया। सवाल है कि पुलिस किस-किस पर एफआईआर करेगी?  पर कहा जा रहा है कांग्रेस राज में कांग्रेसी नेताओं का पत्रकारों को संदेश है कि वे गांधी जी के तीन आदर्शवादी बंदर बन जाएं। याने बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो। बताया जाता है जशपुर के कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में पत्रकारों को न्‍योता ही नहीं था। घटना का वीडियो तो कुछ कांग्रेसियों ने ही बनाकर मीडिया को उपलब्ध कराया, उनके बारे में जिला अध्यक्ष और विधायक जी क्या संज्ञान लेंगे?

भाजपा में नई पीढ़ी की सक्रियता
छत्तीसगढ़ में इन दिनों भाजपा की नई पीढ़ी के नेताओं की सक्रियता ज्यादा देखने को मिल रही है। कवर्धा की घटना में राजनांदगांव के सांसद संतोष पाण्डे, अभिषेक सिंह और विजय शर्मा जैसे दूसरी पीढ़ी के नेता ज्यादा सक्रिय दिखे। कवर्धा मुद्दे पर विजय शर्मा का आत्मसमर्पण और जेल में भाजपा के बड़े नेताओं की वीआईपी मुलाक़ात चर्चा में है। बिलासपुर के सांसद अरुण साव, ओपी चौधरी और दूसरे ओबीसी नेताओं की गतिविधियां भी बढ़ गईं हैं। ट्विटर के जरिए भूपेश सरकार पर हमले करते अजय चंद्राकर भी दिखते हैं। कहते हैं भाजपा 2023 के विधानसभा चुनाव में पुराने चेहरों की जगह नए लोगों पर दांव लगाने वाली है। इस कारण पार्टी की दूसरी पंक्ति के नेताओं को काफी मौका मिल सकता है। ऐसे में दूसरी लाइन के नेताओं की सक्रियता स्वाभाविक है।

एक तीर से दो शिकार
इस साल जिलों में एक नवंबर को राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह में मंत्रियों की जगह संसदीय सचिव और विधायक मुख्य अतिथि होंगे। आमतौर पर जिलों में झंडावंदन हो या दूसरे कार्यक्रम, सभी में प्रभारी मंत्री को ही अतिथि बनाए जाने की परंपरा है, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लीक से हटकर प्रभारी मंत्रियों की जगह विधायकों को नवाज दिया। कहते हैं मुख्यमंत्री को कुछ मंत्रियों के राज्योत्सव से दूरी की भनक लग गई थी। इसके चलते मुख्यमंत्री ने संसदीय सचिवों और विधायकों को जिलों में राज्योत्सव का मुख्य अतिथि घोषित कर दिया। इससे विधायक तो खुश होकर मुख्यमंत्री का गुण-गान करने लगे हैं, वहीँ प्रभारी मंत्रियों को अपनी स्थिति भी समझ में आ गई। इसे ही कहते हैं एक तीर से दो शिकार करना।

कलेक्टर-एसपी की लिस्ट के संकेत
कलेक्टर और एसपी-आईजी कांफ्रेंस निपटने के बाद अब कुछ जिलों के कलेक्टर और एसपी बदले जाने के संकेत हैं। कहा जा रहा है कि कलेक्टर और एसपी में फेरबदल परफार्मेंस के अनुसार होंगे, पर कहा जा रहा है कि एक ही जगह दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके कलेक्टर- एसपी भी इधर-उधर हो सकते हैं। प्रशासनिक सर्जरी दीवाली के बाद हो सकती है। ।

कदम पीछे खींचना पड़ा मंत्री जी को
मुख्यमंत्री ने कलेक्टर कांफ्रेंस ली तो राज्य के मंत्री ने भी 28-29 को कलेक्टर कांफ्रेंस बुला ली। कहा जाता है कि कलेक्टरों को सूचना भी भेज दी गई और तैयारी करने के निर्देश भी दे दिए। जिस विभाग के मंत्री ने कलेक्टर कांफ्रेंस करने की सोची थी, कलेक्टर उस विभाग के पदेन उपसचिव होते हैं। पर अफसरों ने मंत्री जी समझाया कि कलेक्टर कांफ्रेंस करने का अधिकार तो केवल मुख्यमंत्री को है, तो मंत्री को मानना पड़ा और अपना विचार त्यागना पड़ा।
(लेखक छत्‍तीसगढ़ के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।)

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