राकेश अचल 

फीनिक्स के नए घर में बच्चों के लिए बागीचे में रखने के लिए आये झूले पर नजर पड़ी तो सर चकरा गया। ये झूला भी मेड इन चाइना निकला। इस झूले को संयोजित करने में दो घंटे लगे। बड़ी ही नफासत से बना ये झूला भारत में भी कम लागत पर बनाकर अमेरिका में बेचा जा सकता है लेकिन भारत चीन जैसी आक्रामकता के साथ न अभी चीन की बराबरी कर पा रहा है और न चीन के लिए चुनौतियाँ खड़ी कर पा रहा है। अमेरिका और भारत के लिए चीन एक जिन्न से कम नहीं है।

दुनिया भर को कोविड-19 नाम की जानलेवा बीमारी परोसने वाले चीन ने दुनिया के कारोबार को हिला दिया, लेकिन दुनिया चीन की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त नहीं कर पाई। महाबली अमेरिका समेत दुनिया के तमाम छोटे-बड़े देशों के बाजार चीनी माल से अटे पड़े हैं। चीन दुनिया की हर जरूरत की चीजें बनाकर बेचने में सक्षम है। महाबली अमेरिका में क्या नहीं बन सकता, लेकिन फिर भी अमेरिका में खिलौनों  से लेकर इलेक्ट्रानिक्स तक चीन से बनकर आ रहे हैं। चीन गुणवत्ता की हर परीक्षा पास करते हुए दुनिया के बाजारों में प्रवेश करता है और जहाँ उसे चोर दरवाजे मिलते हैं वहां उनसे घुसकर अर्थव्यवस्था पर वार कर रहा है।

अमेरिका में बड़बोले पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के बाद नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति जो बाइडन के समक्ष भी चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्‍पर्धा तेज हो गई है। व्‍हाइट हाउस ने यह बात स्‍वीकार की कि बाइडन प्रशासन चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्‍पर्धा में लगा हुआ है। व्‍हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से माना कि बाइडन प्रशासन चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्‍पर्धा में संलग्‍न है। साकी ने कहा कि चीन का मकसद अमेरिका के दीर्घकालिक तकनीकी लाभ को कम करना है। व्‍हाइट हाउस का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कहा गया है कि बाइडन प्रशासन चीन के प्रति काफी उदार रवैया अपना रहा है। इसके बाद बाइडन प्रशासन की ओर से यह बयान सामने आया है। बाइडन प्रशासन ने संकेत दिया है कि चीन के साथ उसका संघर्ष जारी है

चीन के बारे में दुनिया जानती है, थोड़ा-बहुत मैं भी जानता हूँ, मैंने चीन के बाजार देखे हैं, इसलिए कह सकता हूँ कि चीन दुनिया के साथ ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ वाली रणनीति के तहत काम करता है। कुछ समय पहले जब अमेरिका और भारत ने चीन की मुश्कें कसना शुरू की थीं तब चीन ने   एशिया-प्रशांत के कुछ चुनिंदा देशों से दोस्‍ती बढ़ाने का प्रयास शुरू कर दिया था । इस कदम के तहत चीन ने भारत सहित अन्‍य देशों से आयातित सामान पर शुल्‍क खत्‍म करने या घटाने का फैसला किया था। अमेरिका के साथ चीन का व्यापार तमाम पाबंदियों के बावजूद कम नहीं हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में दुनिया का शीर्ष देश बन गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए चीन दुनिया का वो देश बन गया है जहां सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। इससे पहले अमेरिका प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिहाज़ से शीर्ष देश था। लेकिन बीते साल यहां विदेशी कंपनियों का प्रत्यक्ष निवेश लगभग आधे से भी कम रहा। यही वजह है कि अब चीन एफ़डीआई निवेश के मामले में नंबर एक हो गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, चीनी कंपनियों में प्रत्यक्ष निवेश चार प्रतिशत तक बढ़ा है। इन आंकड़ों से एक और बात जो स्पष्ट हो रही है वो ये है कि विश्व के आर्थिक मंच पर चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

हमारी चिंता का कारण ये है कि कोरोना वायरस ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को धराशायी कर दिया है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से साल 2020 में दुनिया की अर्थव्यवस्था में सबसे तेज़ गिरावट देखने को मिली है। करोड़ों लोगों की या तो नौकरी चली गई है या फिर कमाई कम हो गई है। सरकारें अर्थव्यवस्थाओं को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए अरबों डॉलर लगा रही हैं। हालांकि साल 2021 में आर्थिक रिकवरी अभी भी बेहद अनिश्चित है। एक शुरुआती अनुमान के मुताबिक, चीन की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ फिर से बढ़ने लगी है। लेकिन दुनिया के कई अमीर देशों के लिए साल 2022 तक पूरी रिकवरी होने में शायद मुश्किलें आएं।

गैर-बराबरी भी बड़े पैमाने पर बढ़ रही है। 651 अमेरिकी अरबपतियों की नेटवर्थ 30 फीसदी बढ़कर 4 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, विकासशील देशों में 25 करोड़ लोगों को बेहद गरीबी का सामना करना पड़ सकता है और शायद दुनिया की आधी वर्कफोर्स को अपनी आजीविका के साधन से हाथ धोना पड़ा है। महामारी को रोकने की रफ्तार का पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन पर गहरा असर होने वाला है।

अमेरिका में यह बहस तब तेज हो गई जब, रिपब्ल्किन पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज ने एक वीडियो जारी कर यह आरोप लगाया है कि चीन को लेकर बाइडन प्रशासन का रुख नरम है। दरअसल, हाल में बाइडन प्रशासन ने चीन से जुड़े शोधकर्ताओं तथा अकादमी क्षेत्र के लोगों के खिलाफ जांच रोकने या उन्‍हें माफी देने के संकेत दिए थे। इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी ने चीन के साथ संबंधों में उदारता का आरोप लगाया है। इस समय डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन के बीच विवाद बढ़ गया है। जेन साकी ने कहा कि हमें चीन के उद्देश्‍यों के बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए, जो अमेरिका के दीर्घकालिक लाभ को कम करने के लिए है। राष्‍ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती है। प्रेस सचिव ने कहा है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने अपने सहयोगियों के समक्ष वार्ता के दौरान यह बात रखी।

अमेरिका के बाद भारत में चीन की दादागीरी बरकरार है। भारत सरकार ने भी कहने के लिए चीन के खिलाफ अनेक प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां कीं, लेकिन चीन पर कोई असर नहीं पड़ा। चीन ने अरुणाचल में एक गांव ही बसा दिया और भारत सरकार कुछ नहीं कर पायी। भारत सरकार का आत्मनिर्भरता का नारा भी केवल नारा ही साबित हुआ। आने वाले दिनों में भी स्थितियों में कोई सुधार होगा ऐसा नजर नहीं आ रहा है। भारत और अमेरिका के साझा प्रयास ही चीन के जिन्‍न को बोतल में बंद कर सकते हैं अन्यथा ये जिन्‍न तबाही मचाने से चूकने वाला नहीं है।