बृजेंद्र श्रीवास्‍तव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में नवीन संसद भवन हेतु किया शिलान्यास अब चर्चा में है। चूंकि हमारे देश में हर चीज का बारीकी से विश्लेषण करने वालों की कमी नहीं इस कारण नवीन संसद भवन के दो मॉडल के वास्तु को लेकर तमाम शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ लोगों द्वारा यह कहा गया की वास्तु के हिसाब से पार्लियामेंट का त्रिकोणीय होना ठीक नहीं है। इसका जवाब अपने शोधपरक लेख के माध्यम से दिया देश के प्रसिद्ध ज्योतिर्विद व जीवाजी विश्यविद्यालय में कॉस्मोलॉजी व एस्ट्रोलॉजी के प्रोफेसर रहे बृजेन्द्र श्रीवास्तव ने। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यह शंका ही क्यों की गई है? क्‍योंकि नए संसद भवन का रूपांकन त्रिकोणीय नहीं षडकोणीय अर्थात छह कोनों का है।

बृजेंद्र जी ने संभवतः इसके पीछे विगत 50 वर्षों में ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के अल्पज्ञानियों द्वारा फैलाए गए तरह तरह के भ्रम ही मुख्य कारण बताए हैं। वे कहते हैं कि इन ज्ञानियों को छोड़िए, स्वयं जरा देश के विभिन्न प्रदेशों में बने प्राचीन राजप्रासादों को और उनके भग्न अवशेषों के लेआउट को ही देख लीजिए कि इनमें कितनी विविधता और भव्यता है। और फिर देश हित की सुरक्षा भवनों से कब से जांची जाने लगी है? कभी नहीं ।

किसी भी देश का हित व सुरक्षा केवल वास्तु से या अन्य किसी आधार पर निर्भर कभी नहीं रही है। देश का हित व देश की सुरक्षा तो सदैव से ही देश के नागरिकों के देश प्रेम, जागरूकता, और रक्षा के प्रति संकल्प पर ही निर्भर रहती आई है। भवन निर्माण में त्रिकोण की बात ही क्या 20 प्रकार के कोणों से राजप्रासाद निर्मित करने की बात तो वराहमिहिर ने ही लिखी है। वराहमिहिर के लिखे छठी सदी के ग्रंथ बृहत संहिता के वास्तु विद्या अध्याय क्रमांक 53 और प्रासाद लक्षण अध्याय क्रमांक 56 पढ़ने लायक हैं। इनमें मन्दिर, राजभवन व प्रासादों के निर्माण के वास्तु सिद्धान्त दिए गए हैं।

इसके प्रासाद लक्षण अध्याय के श्लोक 19 और 20 में बीस प्रकार के विभिन्न कोण और विभिन्न आकृतियों के प्रासाद निर्माण का विवरण दिया गया है जिनको पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन भारत में स्थापत्य कला architecture कितना कल्पनाशील और सृजनात्मक था। मेरु के आकार का भवन षडकोण का 12 मंजिल का होता है। मन्दर नाम का भवन षडकोण hexagonal होता है। यह 10 मंजिल का होता है।

समुद्र नाम का प्रासाद वृत्ताकार होता है जैसा कि वर्तमान संसद भवन है। ऐसा ही वृत्ताकार एवं स्तंभों वाला भवन मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में चौंसठ योगिनी मन्दिर है। वर्तमान संसद भवन के वास्तु रूपांकन अर्थात architect design करने वाले लुटियन की तारीफ तो सब करते हैं पर सैकड़ों वर्ष पुराने स्तंभों पर खड़े इस वृत्ताकार मन्दिर पर भी कुछ कहिए। श्लोक 24 में गरुड़ाकार भवन में गरुड़ की आकृति के साथ गरुड़ के पंख, मुख आदि को भी रूपांकन डिजाइन में शामिल किया गया है। श्लोक 28 में सिंह रूप भवन में 12 कोण बताए गए हैं। वराह मिहिर कहते हैं कि कुछ प्रसंगों में विश्वकर्मा और मय के निर्देशों में मतभेद है, ऐसी स्थिति में स्थपित architect को स्व-विवेक से काम करना चाहिए।-प्रासाद लक्षण अध्याय श्लोक 30।

वास्तु शास्त्र का अध्ययन करने और सम्पूर्ण भारत में बने पहले के भवनों के अवलोकन से यह स्पष्‍ट है कि भवनों के रूपांकन अर्थात डिजाइन में विविधता है, वे जलवायु के अनुरूप अनुकूलन हैं, उनमें अनोखी कल्पनाशीलता है और सौंदर्य दृष्टि है। जैसा कि एक सुप्रसिद्ध वास्तु शास्त्री ने कहा भी है कि भारतीय वास्तुशास्त्र में वास्तु के नियम कड़े और नियामक नहीं हैं बल्कि सुझाव रूप में हैं।

अमेरिका के रक्षा विभाग का भवन पंचकोणीय है, पेंटागन का नाम तो इसके पाँच कोण के आधार पर ही है। अमेरिका में हुए आतंकी हमले में यह भवन भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था। बृहत संहिता में तो केवल दो अध्याय मात्र हैं। इसके अलावा महाराजा भोज रचित समरांगण सूत्रधार नामक महाग्रन्थ एवं मयासुर का मय मतं भी वास्तु शास्त्र के प्रामाणिक महाग्रन्थ हैं। निष्कर्ष यह कि संसद के नए भवन का त्रिकोणीय स्वरूप वास्तु की दृष्टि से पूर्णतः सुसंगत है। इसलिए यह भवन देश हित में होगा।