डॉ. अजय खेमरिया

मप्र में 26 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव यदि तय समय पर ही होंगे तो माना जाना चाहिए कि आचार संहिता जल्‍द ही लगने वाली है। ग्वालियर चंबल की जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होने है उन पर बीजेपी के प्रत्याशी तो लगभग तय है वहीं कांग्रेस ने भी भोपाल में कसरत कर प्रत्याशी चयन का काम पूरा कर लिया है। करीब एक दर्जन सीटों पर दोनों दलों से दलबदलू उम्मीदवार जनता से वोट मांगते नजर आएं तो अचंभित होने की कोई बात नहीं होगी।

जौरा सीट पर मानवेन्द्र गांधी यानी वृन्दावन सिंह सिकरवार के पुत्र कांग्रेस का चेहरा हो सकते हैं। पिछला चुनाव वे बसपा के टिकट पर सुमावली से लड़ चुके है। जौरा से पंकज उपाध्याय भी जोर आजमाइश में लगे है। निर्णय की डोर फ़िलहाल गांधी के पक्ष में झुकी हुई नजर आ रही है। पेंच सुमावली का भी यहां जुड़ा है क्योंकि सिकरवार परिवार का वहां प्रभाव अच्छा है अगर जौरा से मानवेन्द्र को टिकट मिलती है तो ऐदल सिंह कंषाना की घेराबंदी आसान होगी इसी फैक्टर से पंकज उपाध्याय यहां पिछड़ सकते है।

जौरा में बीजेपी पशोपेश में है पूर्व विधायक के पुत्र या भतीजे का चयन करें या किसी कैडर सदस्य को उतारे। वैसे यह सीट कभी भी बीजेपी के लिए अच्छी नहीं रही है। 2013 में पहली बार सूबेदार सिंह ही जीत पाए थे। सुमावली की सीट पर ऐदलसिह कंषाना के सामने कांग्रेस के अजब सिंह कुशवाह का लड़ना तय हो गया है। अजब सिंह 2013 में बसपा, 2018 में भाजपा से चुनाव लड़ चुके हैं।

दिमनी से कांग्रेस रविन्द्र सिंह तोमर को उतारने का निर्णय ले चुकी है।ं यहां कृषि राज्य मंत्री गिरिराज डंडोतिया के सामने उनकी चुनौती अच्छी होगी। अंबाह में बसपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे पूर्व विधायक सत्यप्रकाश सखवार को कांग्रेस का टिकट मिलना तय हो गया है। वे एक्टिव मोड पर गांव गांव घूम रहे हैं। बीजेपी के कमलेश जाटव की तुलना में वे मजबूत साबित हो सकते हैं। चर्चा यह भी है कि कमलेश जाटव का टिकट बदला जा सकता है, वे मुरैना की मेयर की टिकट के वादे पर अपनी दावेदारी छोड़ सकते है। ऐसी दशा में बीजेपी अशोक अर्गल या कमलेश सुमन को उतार अंबाह का गणित अपने पक्ष में कर सकती है।

मुरैना सीट पर पेंच अभी भी फंसा हुआ है। नॉन गुर्जर के विकल्प पर कांग्रेस पार्टी निर्णय नहीं कर पा रही है। राकेश मावई और प्रबल मावई के दबाव को दरकिनार कर डॉ. राकेश माहेश्वरी को उतारे जाने को लेकर पार्टी में अभी भी मंथन चल रहा है। मेहगांव की सीट पर राकेश चौधरी को लेकर अभी तक निर्णय नही हुआ है, लेकिन एक बात अंतिम है कि चौधरी चुनाव जरूर लड़ेंगे।

ग्वालियर जिले की डबरा सीट पर सत्यप्रकाशी परसेडिया का टिकट भी फाइनल कर दिया गया है वे भी बसपा से इसी शर्त पर कांग्रेस में आई थीं। ग्वालियर सीट पर अशोक शर्मा की जगह पार्टी ने सुनील शर्मा पर भरोसा करने का मन बना लिया है। अशोक शर्मा के लिए सुरेश पचौरी की वकालत कारगर साबित नहीं हुई है, यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से अशोक शर्मा जनसंपर्क नहीं कर रहे हैं। यानी ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न तोमर से सुनील शर्मा मुकाबिल होंगे।

शिवपुरी जिले की पोहरी सीट पर कांग्रेस ने ओबीसी फार्मूले को लगता है ड्राप कर दिया है। हरिवल्लभ शुक्ला के नाम पर स्थानीय विरोध के बावजूद सहमति लगभग बना ली गई है। पार्टी का एक वर्ग अखिल शर्मा, प्रद्युम्न वर्मा को लेकर अभी भी सक्रिय है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की टिकट हरिवल्लभ शुक्ल को ही मिलेगी।

भांडेर की सीट से फूलसिंह बरैया को टिकट देने का निर्णय राज्‍यसभा के नतीजे के साथ ही तय हो गया था। दूसरा अन्नू भारती और महेंद्र बौद्ध के झगड़े को देखते हुए भी कांग्रेस के पास बरैया से बेहतर विकल्प यहां नहीं था। वे बसपा टिकट पर यहां से एमएलए रह चुके हैं। करैरा में भी बसपा से आये प्रागीलाल जाटव बीजेपी के जसवंत जाटव को टक्कर देंगे। यह निर्णय भी लगभग हो चुका है।

बमौरी की सीट पर ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिसोदिया को पूर्व मंत्री के.एल. अग्रवाल टक्कर देंगे। कांग्रेस में दिग्विजयसिंह और कमलनाथ दोनों उनके नाम पर सहमत बताए गए हैं। यानी कांग्रेस यहां भी अपने कैडर को एडजस्ट नहीं कर पा रही है। सुमेर सिंह गढा, मान सिंह परसोदा अभी भी यहां जोर लगाए हुए हैं।

अंचल की ग्वालियर पूर्व, अशोकनगर, मुंगावली, गोहद की सीटों पर कांग्रेस को प्रत्‍याशियों के मजबूत विकल्प नहीं मिल पाए हैं, इसलिए यहां की तस्वीर फ़िलहाल स्पष्ट नहीं है।