अमरावती/ कोविड संक्रमण का गहरा असर स्कूली शिक्षा पर पड़ा है। इस असर को कम करने के लिए राज्य सरकारों ने अपनी ओर से कई प्रयास किए है। यूनिसेफ के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सभी प्रयासों के बावजूद अकेले महाराष्ट्र के 40 फीसदी बच्चे शिक्षा से दूर हैं। इस समय स्कूल शुरू करने को लेकर चर्चा व प्रयासों का दौर जारी है। इस बीच स्कूल व शिक्षकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है कि बच्चों को विद्यालयों में कैसे लाया जाए। इन चुनौतियों से निपटने में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। मीडिया को चाहिए कि वह सरकार, शिक्षा विभाग व शिक्षकों द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों को जनमानस तक पहुंचाए। साथ ही पालकों में जनजागृति निर्माण करे। शिक्षाविदों ने एक स्वर में यह राय व्यक्त की।

मंगलवार को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) पश्चिम विभाग, अमरावती व यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में मीडिया के विद्यार्थियों के लिए ‘प्राथमिक स्कूलों का पुनर्आरंभ : संभावनाएं व बाधाएं’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में  यूनिसेफ मध्यप्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी, स्वाति मोहपात्रा, यूनिसेफ महाराष्ट्र की शिक्षा विशेषज्ञ रेशमा अग्रवाल, यूनिसेफ मध्यप्रदेश के शिक्षा विशेषज्ञ एफ.ए. जामी व आईआईएमसी, पश्चिम विभाग के क्षेत्रीय निदेशक प्रो.अनिल सौमित्र प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित थे।

संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने कहा कि मीडिया के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह विषय को समझे। साथ ही बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने में किए जा रहे प्रयासों व हकीकत को तथ्यों के साथ आगे लाए। इसके लिए उन्हें ग्राउंड स्तर पर जाकर विशेष खबरों को लिखना होगा। ताकि खबरों के माध्यम से पालक व विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक रूप से जनजाग्रति निर्माण हो सके।

एफ.ए. जामी ने कोविड संक्रमण के बाद निर्मित हुई स्थिति को रखते हुए कहा कि कोविड संक्रमण के प्रारंभ से ही प्राथमिक स्कूल बंद रहे। इससे बच्चों की पढ़ाई रुक गई। नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है। बच्चों पर इसका काफी असर हो रहा है। उनमें तनाव निर्माण हुआ है। कई सारी गतिविधियां बंद होने से बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है। यही नहीं स्कूल शुरू करने के दौरान बच्चों में अज्ञात भय निर्माण हो रहा है।

भय यह है कि स्कूल जाने के बाद अगली कक्षा के पाठ को सीख पाएंगे या नहीं। इसका बड़ा कारण बच्चों का मानसिक स्वास्थ प्रभावित होना है। बच्चों के साथ ही पालकों पर भी इसका असर हुआ है। साथ ही शिक्षक भी इससे प्रभावित हुए हैं। उन पर काफी दबाव बढ़ा है। उन्हें सीमित संसाधन के बीच अधिक कार्यबोझ वहन करना पड़ रहा है।

रेशमा अग्रवाल ने कहा कि स्कूल शुरू करने को लेकर प्रयास किए तो जा रहे है, लेकिन इसे लेकर कुछ सवाल भी हैं कि आखिर स्कूल कैसे शुरू किए जाएं। इनका जवाब खोजने के साथ ही यह जरूरी है कि सबसे पहले सभी शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का टीकाकरण हो। उन्हें कोविड व्यवहार का प्रशिक्षण दिया जाए। ताकि वे बच्चों के साथ ही उनके पालकों को प्रशिक्षित कर सके। मीडिया के साथ मिलकर जनजाग्रति अभियान चलाया जाए। स्कूलों में स्वच्छता से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन हो।

स्वाति मोहपात्रा ने स्कूल व पालकों के बीच एक संतुलन निर्माण करने पर जोर दिया। प्रो. अनिल सौमित्र ने कार्यक्रम की प्रस्‍तावना रखी। वेबिनार का संचालन डॉ. कायनात काजी ने किया। आभार आईआईएमसी अमरावती के सहयोगी प्रोफेसर विनय सोनुले ने माना। वेबिनार में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी व पत्रकारिता के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।