गिरीश उपाध्‍याय

सूर्य के दक्षिणायन से उत्‍तरायण होने का पर्व अभी दो दिन पहले ही बीता है। इस पर्व को मकर संक्रांति भी कहा जाता है और ज्‍योतिष के अनुसार इस समय सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। उनके गमन की दिशा दक्षिण से उत्‍तर की ओर होने लगती है। यह पर्व शीत और ग्रीष्‍म ऋतु के संक्रांति काल का भी है। सूर्य का उत्‍तरायण होना ग्रीष्‍म ऋतु की शुरुआत माना जाता है। ग्रीष्‍म ऋतु नई ऊर्जा और नवोन्‍मेष का प्रतीक भी है क्‍योंकि इसी समय पेड़ पौधों में नई कोपलें भी फूटती हैं।

इस बार की संक्रांति पूरी मानवता के लिए जीवन की नई ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। भारत में तो इसका और भी विशेष महत्‍व है क्‍योंकि इसी समय भारत में कोरोना महामारी का स्‍वदेशी टीका तैयार होकर आया है। कोविड टीकाकरण कार्यक्रम आज यानी 16 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। पिछला पूरा साल कोरोना महामारी के संक्रमण का शिकार रहा था लेकिन यह नया साल संक्रमण से संक्रांति की ओर बढ़ने का है। कोरोना वैक्‍सीन के निर्माण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुसीबत या संकट कितना भी बड़ा हो, उससे जूझने और निपटने का मनुष्‍य का हौसला हमेशा 21 ही साबित होता है।

पूरे देश की तरह मध्‍यप्रदेश में भी कोरोना वैक्‍सीन के टीके लगाने की पूरी तैयार कर ली गई है। राजधानी भोपाल में टीके की खेप पहुंच चुकी है और कई अन्‍य शहरों में पहुंच रही है। राज्‍य सरकार ने टीकाकरण के लिए व्‍यापक पैमाने पर इंतजाम किए हैं। इन इंतजामों में टीके के भंडारण और रखरखाव की सुविधाओं के अलावा टीका लगाने के सुरक्षित और व्‍यापक प्रबंध भी शामिल हैं।

कोरोना टीकाकरण को लेकर सरकार और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की तैयारियां अपनी जगह हैं लेकिन यह समय सिर्फ सरकारी एजेंसियों और स्‍वास्‍थ्‍य अमले के ही तैयार रहने का नहीं है। मानवता को बचाने के इस महाअनुष्‍ठान में हम सबकी, पूरे समाज की भी उतनी ही जिम्‍मेदारी और भागीदारी है। बल्कि कुछ मायनों में तो सरकार और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों से भी ज्‍यादा। यह समय सावधानी और जिम्‍मेदारी से व्‍यवहार करने का है।

कोरोना टीके को लेकर हमारे वैज्ञानिकों ने बहुत मेहनत की है। जो भी टीका बना है वह हमारी वैज्ञानिक क्षमता और बड़े से बड़े संकट से आत्‍मनिर्भर होकर निपटने का सर्वश्रेष्‍ठ उदाहरण है। ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि हमारे वैज्ञानिकों की इस महान उपलब्धि पर हमारी ही कुछ नासमझियों और नादानी के कारण पानी फिर जाए। भारत की साख को बट्टा लगे।

इस काम में सरकार की तो अपनी भूमिका है ही लेकिन समाज और खासतौर से मीडिया की भी बहुत बड़ी जिम्‍मेदारी है। टीके को लेकर दी जाने वाली खबरों और उसके बारे में की जाने वाली बात में हमेशा यह सावधानी बरतनी होगी कि कहीं उस बात का संपूर्ण टीकाकरण कार्यक्रम पर ही विपरीत असर न हो जाए। ऐसे में अफवाहों से बचने की सबसे ज्‍यादा जरूरत है। कहीं ऐसा न हो कि हम खबरों और सूचनाओं की ठीक से पुष्टि किए बिना उन्‍हें प्रचारित और प्रसारित कर दें और लोग टीका लगवाने से ही हिचकने लगें।

हाल ही में मीडिया में कुछ ऐसी खबरें आई हैं जिनमें टीकाकरण अभियान को नकारात्‍मक रूप से प्रभावित करने की पर्याप्‍त गुंजाइश है। ऐसी खबरों को हरसंभव तरीके से जांच परखकर और उनकी प्रामाणिक एवं तार्किक व तथ्‍यात्‍मक जानकारी लेकर प्रसारित किया जाना चाहिए। खबर देने की जल्‍दबाजी या हड़बड़ी पूरे समाज का, पूरी मानवता का बहुत बड़ा नुकसान कर सकती है। निश्चित रूप से लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी जानकारी देना मीडिया का काम है, लेकिन यह समय ऐसी किसी भी जानकारी को बहुत ठोक बजाकर उपयोग करने का है। यदि कोई बात लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को विपरीत रूप से प्रभावित कर रही है तो उसे अवश्‍य ध्‍यान में लाया जाना चाहिए, लेकिन उसकी प्रस्‍तुति ऐसी कतई न हो कि उससे टीके के प्रति डर या आतंक का माहौल बने, लोग टीका लगवाने से ही कतराने लगें।

हमें याद रखना होगा कि जब भी किसी बीमारी की, खासतौर से किसी महामारी की दवा पहली बार उपयोग में लाई जाती है तो उसके कुछ अप्रत्‍याशित परिणाम भी देखने को मिलते हैं। लेकिन ऐसे हर मामले में यह सावधानी जरूरी है कि हम अपवादों को नियम न बनाएं। सौ में से यदि एक दो लोगों को विपरीत असर होता है तो उसे दवा या टीके की असफलता के रूप में प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई विपरीत असर हुआ भी है तो एकदम से टीके को दोषी ठहराने या उस पर उंगली उठाने से पहले कारणों को अच्‍छी तरह जांच लिया जाना चाहिए। हो सकता है विपरीत असर का कारण कुछ और ही हो और हम अनजाने में टीके को दोषी ठहराकर पूरे अभियान पर ही पानी फेर दें।

दूसरी तरफ सरकारों और टीकाकरण अभियान में लगे लोगों व एजेंसियों के लिए भी जरूरी है कि वे ऐसी हर खबर को गलत बताने या उसका खंडन करने की जिद लेकर न बैठें। कोई भी विपरीत सूचना यदि आई है तो आधिकारिक स्‍तर पर भी उसकी पूरी गहराई और गंभीरता से जांच होनी चाहिए। विपरीत खबरों को आंख मूंदकर खारिज करने से भी टीकाकरण अभियान को उतना ही नुकसान होगा जितना आंख मूंदकर किसी भी विपरीत प्रभाव के लिए टीके को जिम्‍मेदार ठहरा देना।

कोराना वैक्‍सीन सिर्फ महामारी से बचाव का उपाय ही नहीं है यह बड़े से बड़े संकट से निपटने के मनुष्‍य के हौसले और आत्‍मविश्‍वास का प्रतीक भी है। मानव सभ्‍यता का भविष्‍य बचाए रखने के लिए जरूरी है कि इस हौसले और आत्‍मविश्‍वास के जज्‍बे को कोई चोट न पहुंचे। यह काम पूरे समाज की सकारात्‍मक सहभागिता से ही संभव हो सकता है। उम्‍मीद की जानी चाहिए कि करोना वैक्‍सीन लगाने के अभियान में हमें ऐसी सकारात्‍मक सहभागिता हर स्‍तर पर देखने को मिलेगी।(मध्‍यमत)