भोपाल/महात्मा गांधी हमें एक वैकल्पिक दुनिया का रास्ता दिखाते हैं जिस पर चलकर हम अपने युग की तकलीफ़ों से मुक्ति पा सकते हैं। प्रसिद्ध चिंतक- लेखक शुमाखर ने ‘ स्माल इज ब्यूटीफुल’ किताब में दुनिया को सुन्दर बनाने के जो उपाय सुझाए हैं, महात्मा गांधी ने बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में ही ‘हिन्द-स्वराज’ में उन्हीं बातों का संकेत किया था।

रवीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलाधिपति संतोष चौबे ने यह विचार भोपाल के जहांगीराबाद स्थित लोहिया सदन के पुस्तकालय के शुभारम्भ अवसर पर व्यक्त किये। प्रख्यात समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर के प्रयासों से स्थापित लोहिया सदन पुस्तकालय में गांधी जयंती के अवसर पर दो कक्षों का लोकार्पण किया गया। ललितपुर के जाने माने चिकित्सक प्रख्यात समाजवादी चिंतक स्वर्गीय शादी लाल दुबे की स्मृति को समर्पित कक्ष का उद्घाटन मदन जैन ने व समालोचक विजय देव नारायण साही की स्मृति को समर्पित कक्ष का उद्घाटन जयंत सिंह तोमर ने किया।

रघु ठाकुर की उपस्थिति में आयोजित दो सत्रों के इस आयोजन में जाने माने मीडिया विश्लेषक पुष्पेन्द्रपाल सिंह, प्रसिद्ध सिनेमा विशेषज्ञ अजित राय, जाने माने पत्रकार सुधीर सक्सेना, साहित्यकार बलराम गुमास्ता, छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक एम. डबल्यू. अंसारी विशेष रूप से उपस्थित थे। लोहिया पुस्तकालय की निदेशक डाक्टर शिवा श्रीवास्तव, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विन्देश्वरी पटेल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्यामसुन्दर यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।

संतोष चौबे ने कहा कि जब हम समानता की बात करते हैं तो वह वैश्विक स्तर पर समझौतों में भी लागू होना चाहिए। उन्होंने डाटा के नियंत्रण के विषय में चिंता जताई और कहा कि हमें विचार के साथ साथ सक्रियता भी दिखानी है। रघु ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि मौजूदा विश्व की सभी समस्याओं का इलाज गांधी के रास्ते पर चलकर ही मिलेगा। पुष्पेन्द्र पाल सिंह ने महात्मा गांधी की प्रासंगिकता पर कहा कि आज रघु ठाकुर जैसे नायकों में ही गांधीजी की झलक मिलती है। अजित राय ने कहा कि गांधीजी विश्व सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण विषय रहे हैं।

इस अवसर पर चम्पारण में महात्मा गांधी की जान बचाने वाले बतख मियां पर केन्द्रित एम. डबल्यू. अंसारी की लिखी हिन्दी किताब का विमोचन किया गया जिसमें शायर मंजर भोपाली विशेष रूप से उपस्थित थे।