हेमंत पाल

सिनेमा की कहानी में ट्विस्ट लाने के लिए किसी मौके की जरूरत महसूस की जाती है। इनमें सबसे आसान होता है, किसी त्‍योहार का प्रसंग लाकर कहानी का प्लॉट बदला जाए। होली और ईद दो ऐसे ही त्‍योहार हैं, जिन्हें फिल्म बनाने वालों ने अपनी तरफ से जमकर भुनाया। दोनों खुशियों वाले त्‍योहार हैं, जिनके बहाने दर्शकों को गाना-बजाना दिखाकर कहानी में ट्विस्ट लाया जाता रहा है। इस संदर्भ में ‘जख्मी’ से लगाकर ‘शोले’ और ‘सिलसिला’ तक को याद किया जा सकता है, जिनमें होली गीत के बाद एकदम कहानी का ट्रेक बदला था।

होली वैसे तो रंगों का त्‍योहार है, पर सिनेमा के शुरुआती समय में जब फ़िल्में श्वेत-श्याम हुआ करती थीं, तब भी होली प्रसंग फिल्माए और पसंद किए गए। फिल्मों में होली फिल्माने की शुरुआत 1944 में दिलीप कुमार की पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ में हुई। ये श्वेत-श्याम फिल्मों का दौर था। संयोग है कि जब फिल्मों में रंग भरे और होली फिल्माई गई, तब भी दिलीप कुमार ‘आन’ में निम्मी के साथ दिखाई दिए थे। फिल्मकारों को होली के बहाने एक मस्ती भरा गाना फिल्माने का मौका भी मिल जाता है।

अभी तक ‘होली’ नाम से सिर्फ दो फिल्में और ‘होली आई रे’ नाम से एक फिल्म आई है। ‘फागुन’ शीर्षक से भी दो फिल्में बनी। 1967 में ‘भक्त प्रहलाद’ फिल्म बनी जिसमें होली का धार्मिक आधार बताया गया था। कथानक को जटिल स्थिति से निकालने या ट्रेक बदलने के लिए होली दृश्यों का इतने बार इस्तेमाल किया गया, जिसकी गिनती नहीं है। यश चोपड़ा ने अपनी फिल्मों में बार-बार होली दृश्यों का उपयोग किया। 1981 में आई ‘सिलसिला’ के गीत ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली’ गीत को भी जटिल हालात को व्यक्त करने के लिए रखा गया था।

होली ने अमिताभ और रेखा को घुटन से बाहर आने का मौका दिया। फिल्म के पात्र प्रेम, दाम्पत्य और अविश्वास की जिस गफलत में फँसे थे, इस होली गीत ने उन्हें उस भूल-भुलैया से निकलने का रास्ता भी दिया था। 1984 में ‘मशाल’ में ‘होली आई होली आई देखो होली आई रे’ में अनिल कपूर और रति अग्निहोत्री के प्रेम के रंग को निखारा गया। साथ ही दिलीप कुमार और वहीदा रहमान के बीच मौन संवाद पेश किया।

ऐसा ही एक दृश्य यश चोपड़ा की ही फिल्म ‘डर’ में भी था। इसमें शाहरुख खान जूही चावला के प्रेम में जुनूनी खलनायक की भूमिका में हैं। वे किसी भी कीमत पर उसे पाना चाहते हैं। तनाव के बीच होली प्रसंग शाहरुख को जूही चावला को स्पर्श करने का मौका देता है। साथ ही कहानी को अंजाम तक पहुंचाने का भी अवसर मिलता है। ‘मोहब्बतें’ में यश चोपड़ा ने ‘सोहनी सोहनी अंखियों वाली’ से जोड़ियों के बीच होली सीक्वंस फ़िल्माया। राजकुमार संतोषी ने भी ‘दामिनी’ में होली को कहानी का मुख्य आधार बनाकर दिखाया था।

सिनेमा की दुनिया भेड़ चाल पर ज्यादा विश्वास करती है। जब होली दृश्य दर्शकों को लुभाने लगे तो इन्हें कथानक में शामिल करने की होड़ सी लग गई। ‘मदर इंडिया’ में शमशाद बेगम का गाया ‘होली आई रे कन्हाई’ अभी भी सुना और पसंद किया जाता है। वी. शांताराम ने अपनी चर्चित फिल्म ‘नवरंग’ में भी होली गीत ‘चल जा रे हट नटखट’ रखा जो महिपाल और संध्या पर फिल्माया गया था। 70 के दशक की फिल्मों में होली के बहाने कुछ अच्छे दृश्य फिल्मों में देखने को मिले। राजेश खन्ना पर ‘कटी पतंग’ में फिल्माया गाना ‘आज न छोड़ेंगे हम हमजोली’ निर्देशक ने उस सामाजिक बंधन को तोड़ने के लिए रखा था, जिसमें एक विधवा को समाज सभी रंगों से बेदखल कर देता है।

होली को लेकर जिस गाने का सबसे पहले जिक्र आता है, वह है 1940 में आई ‘औरत’ का गाना। निर्देशक महबूब खान की इस फिल्म में अनिल बिस्वास के संगीतबद्ध गाने ‘आज होली खेलेंगे साजन के संग’ और ‘जमुना तट श्याम खेले होरी’ हिंदी सिनेमा के पहले होली गीत माने जाते हैं। बाद में महबूब खान ने इस फिल्म की कहानी को ‘मदर इंडिया’ नाम से बनाया। इसमें भी होली का सदाबहार गाना ‘होली आई रे कन्हाई रंग छलके, बजा दे जरा बांसुरी’ था। उसके बाद गीता दत्त के गाए ‘जोगन’ के गीत ‘डारो रे रंग डारो रे रसिया’ सुपरहिट होली गीत बना।

श्वेत श्याम फिल्मों के दौर में भी होली के गाने दर्शकों को भाते थे। भले परदे पर रंग नजर न आते हों, लेकिन इन गीतों का जादू ऐसा होता था कि लोगों को परदे पर रंग बिरंगी होली का ही एहसास होता था। देश में बनी पहली टेक्नीकलर फिल्म ‘आन’ में दिलीप कुमार की अदाकारी के अलावा इस फिल्म के गाने ‘खेलो रंग हमारे संग’ ने लोगों पर खूब जादू किया। फिर तो होली के गानों का सिलसिला ही चल निकला।

रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’ में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की छेड़छाड़ वाला गाना ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ हर होली पर सुनाई देता है। 70 और 80 के दशक की फिल्मों में होली के गाने खूब बजे। इस दौरान बने सुपरहिट होली गीतों में ‘षड्यंत्र’ का गाना ‘होली आई रे मस्तानों की टोली’, फिल्म ‘राजपूत’ का गाना ‘भागी रे भागी रे भागी बृज बाला’, फिल्म ‘नदिया के पार’ का गाना ‘जोगीजी वाह जोगीजी’, फिल्म ‘कामचोर’ का गाना ‘मल दे गुलाल मोहे’ और फिल्म ‘बागबान’ का गाना ‘होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा’ कालजयी गीत बने। लेकिन, जो गाना सबसे ज्यादा हिट हुआ वह था फिल्म ‘सिलसिला’  में अमिताभ बच्‍चन की आवाज वाला गाना ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली रंग बरसे।’ ये गाना हिंदी सिनेमा का सबसे लोकप्रिय होली गीत माना जाता है।

‘कोहिनूर’ का गीत ‘तन रंग लो जी आज मन रंग लो’ भी पसंद किया गया था। ‘गोदान’ में भी एक होली गीत फिल्माया गया था। ‘आखिर क्यों’ का गीत ‘सात रंग में खेल रही है दिलवालों की टोली रे’ और ‘कामचोर’ के गीत ‘मल दे गुलाल मोहे’ के जरिए कहानी को आगे बढ़ाया गया। फिल्मों में होली का क्रेज पिछले दशक तक रहा। दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर की फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ का गाना ‘बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी’ खूब हिट हुआ। होली का अल्हड़ अंदाज इस गाने में बरसों बाद हिंदी सिनेमा के परदे पर दिखा। लेकिन, इसके बाद कोई होली का गाना अब तक नहीं बन सका।