भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते ने कहा कि भारत का स्व ही भारत को जिंदा रखता है, यदि यह स्व हमने मिटा दिया तो हम भी कमजोर हो जायेंगे। भारत की स्वाधीनता का संघर्ष हमारी समझ से कहीं अधिक व्यापक, मजबूत और त्यागपूर्ण था। वे शनिवार को मातृभाषा समारोह में ‘स्वाधीनता संग्राम का सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी स्वरूप’ विषय पर आयोजित बौद्धिक विमर्श ‘संज्ञान’ को संबोधित कर रहे थे। दो दिवसीय मातृभाषा समारोह का आयोजन मातृभाषा मंच की ओर से अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

इस अवसर पर श्री विस्पुते ने भारत के स्व के लिए 500 वर्षों की लड़ाई पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 1498 में वास्को डी गामा के आगमन से लेकर 1961 तक गोवा के मुक्ति हेतु हुए संघर्षों के इतिहास को जानने के लिए सभी से आग्रह किया। साथ ही त्रावणकोर राज्य के राजा मार्तंड वर्मा द्वारा डच सेना को पराजित करने की बात बताई। देश की स्वाधीनता के लिए कार्य करने वाले राजा और रंक सभी के योगदान पर विस्तार से विचार व्यक्त किये। स्वाधीनता संघर्ष की कहानी को कई प्रामाणिक तथ्यों के साथ बताया जिन पर आम जनमानस ध्यान ही नहीं देता। इसके साथ ही उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन के कई नायकों और उनके उल्लेखनीय कार्यों को रेखांकित किया।

सार्थक और प्रभावी शिक्षा के लिए जरूरी है मातृभाषा : उषा ठाकुर
मातृभाषा समारोह के तहत सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया। इस दौरान रविंद्र भवन मुक्ताकाश मंच से कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कलाकारों द्वारा दी गई। कार्यक्रम की मुख्‍य अतिथि संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने मातृभाषा समारोह की सराहना करते हुए कहा कि विश्व में कई शोध यह प्रमाणित करते हैं कि प्रभावी और सार्थक शिक्षा के लिए मातृभाषा ही श्रेष्ठ मध्यम है, समाज और देश इसी से विकास कर सकता है।

स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पर सुश्री ठाकुर ने कहा कि हमें अपने-अपने प्रदेशों में स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वाले सभी वर्गों, श्रेणियों और क्षेत्रों के नायकों की जानकारी जुटाकर नई पीढ़ी को प्रदान करना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी स्वाधीनता का महत्व समझ सके और अपने देश को समर्थ, सशक्त, और सुरक्षित रखने के लिए योगदान सुनिश्चित कर सके।