भोपाल/ विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश के मनस्वी पत्रकार स्व. माणिकचन्द्र वाजपेयी ‘मामाजी’ के जन्मशताब्दी वर्ष पर पांचजन्‍य द्वारा प्रकाशित विशेषांक ‘माणिक जैसे मामाजी’ का विमोचन कार्यक्रम शनिवार को भोपाल में हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि अमूर्त विचार-भावनाएं किसी ना किसी व्यक्ति के माध्यम से मूर्त रूप लेती हैं, इस नाते हम जब मामाजी के संदर्भ में विचार करते हैं तो देखते हैं कि उन्‍होंने भारत की सनातन परंपरा, जीवन मूल्‍य और व्‍यवहार को अपने जीवन में आदर्श रूप में धारण किया। मामाजी जैसे समर्पित लोग कभी यश की अपेक्षा नहीं करते, वह अदृश्य रहकर अपना कार्य करते रहते हैं। मामाजी ने बस हमारी सनातन परंपरा के मूल्यों को अपने जीवन में उतारा, और यही कारण है कि जो उनके पास आया उनसे प्रभावित होता गया।

श्री सोनी ने बताया कि मामाजी ऐसे दूरदर्शी संपादक थे जिन्होंने 26 जून को आपातकाल लगने के 2 दिन पहले ही आपातकाल के बारे में सचेत कर दिया था। उन्होंने संपादकीय में लिख दिया था कि ऐसी काली रात आने वाली है जब संवैधानिक अधिकार छीन लिए जायेंगे और लोगों के मुंह बंद कर दिए जायेंगे। मामाजी की लेखनी में यह गहराई इसलिए थी, क्योंकि उनका जीवन समाज के प्रवाह के साथ एकरूप था।

आज हमारे सामने आवधारणाओं का संकट खड़ा हुआ है, पश्चिम का विचार या विभेदीकरण का दृष्‍टिकोण बलवान होता दिखाई देता है। इससे हम सभी को सचेत रहने और जाग्रत होने की जरूरत है। हमें समझना होगा कि भारत के हित में क्‍या है और क्‍या नहीं। भारत में आदिकाल से ही हर व्यक्ति के जीवन का मूल यही रहा है कि वह दूसरों के हित में कितना कुछ कर सकता है। भारत के जीवन में मनुष्य आखिरी समय तक ऐसा जीवन जीता था कि वह दूसरे के लिए अधिकतम काम आए। दूसरे के लिए जीना ही भारतीय जीवन मूल्य और जीवन पद्धति है।

उन्‍होंने कहा कि आज हम पर पश्चिम का प्रभाव दिखता है, लेकिन कोरोना ने हमको बहुत कुछ पुन: सोचने पर विवश किया है। इस दौरान सबसे ज्यादा कोई शब्द सर्च हुआ है तो वह अध्‍यात्‍म है। वास्‍तव में यही भारत का अधिष्ठान है और यही उसका जीवन मूल्य। इसीको सही मायनों में मामाजी ने  जिया और हम सभी को भी जीने की आवश्‍यकता है। वास्तव में हमको दुनिया में इसी आध्यात्मिक जीवन मूल्‍य को प्रमुखता से पहुंचाने की जरूरत है। भारत का विचार, भारत का समाज विश्व के कल्याण के लिए है। मामाजी की प्रेरणा इसका निमित्त बने, यही आज के दिन मैं कामना करता हूं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वदेश के पूर्व संपादक जयकिशन शर्मा ने कहा कि मामाजी का जन्म, उनका पत्रकारिता में आना यह सब पूर्व निर्धारित था। इसका निर्धारण सृष्टि ने किया था। मामाजी एक वृहद् लक्ष्य की पूर्ति के लिए आये थे। उनका जीवन अत्यंत सामान्य था और वह स्वदेश के प्रधान संपादक होते हुए भी साइकिल से घूमा करते थे। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार एक बड़े नेता की कुछ अश्लील तस्वीरें लीक हो गईं। उसकी कुछ प्रतियाँ स्वदेश के रिपोर्टर के हाथ लगीं लेकिन मामाजी ने यह कहते हुए उन्‍हें छापने से साफ इनकार कर दिया कि हम इस तरह की खबरों से अपना प्रचार नहीं चाहते। वे मूल्‍यों की पत्रकारिता करते थे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार लाजपात आहूजा ने किया।