भारतभूषण आर. गांधी

इटारसी/ रविवार को इटारसी में जारी दो सूचियों में लगभग 50 कोरोना संक्रमित लोगों की पुष्टि हुई है। हालांकि एक सूची में एक नाम ऐसा भी है जिसकी मृत्यु इस सूची के जारी होने से पहले ही हो चुकी है। ईश्वर ब्रास बैंड वाले अजय देव्हारे जो क्वारनटाइन सेंटर जवाहर नवोदय विद्यालय पवारखेड़ा में भरती थे उनके वहां रहने के दौरान ही उनके मित्र राजेश सोनी की मृत्‍यु हो गई थी। उन्‍होंने खुद सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा था- हमें बता दिया होता तो हम भी तुम्हारे साथ चल देते। बाद में अजय की भी कोरोना संक्रमण से मृत्‍यु हो गई।

अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है कि कोरोना को कंट्रोल कर पाना शासन के बस की बात नहीं रही। क्योंकि अब न तो लॉकडाउन के दौरान की गई जिम्मेदारी तय करने वाली कवायद हो रही है और न ही स्थानीय प्रशासन संक्रमित लोगों को बाहर निकलने से रोक पा रहा है। लॉकडाउन-1 के दौरान कन्टेनमेंट क्षेत्र बनाये जाते थे, सीसीटीवी कैमरे लगाकर उन एरिया को वॉच किया जाता था, जो अब नहीं हो रहा है। संक्रमण का ठीकरा अब व्यापारियों और सामान्य जन पर फोड़ा जा रहा है। शनिवार को व्यापारियों के साथ बैठक करके जिस प्रकार के निर्णय क्षेत्रीय विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा और अनुविभागीय अधिकारी एम.एस. रघुवंशी की मौजूदगी में लिए गए उनका उल्लंघन भी कुछ व्यापारियों ने किया। जानकारी यह भी है कि संक्रमित व्यक्ति के परिवार के अन्य सदस्यों ने अपने घरों से भी व्यापार किया और शहर में घूमते भी नज़र आये।

स्थानीय प्रशासन ने जिन शासकीय कर्मचारियों को कोरोना की चैन का रिकॉर्ड बनाने का जिम्मा दिया है, बड़ी संख्‍या में कोरोना पॉजिटिव लोगों के सामने आने के बाद उन पर काम का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ गया है। एक दिक्कत यह भी है कि प्रशासन ने समस्‍या से निपटने को लेकर स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं और नामचीन लोगों से अभी तक कोई संपर्क भी नहीं किया है। आमजन प्रशासन में किन लोगों से संपर्क करें इसकी भी कोई खास जानकारी देने के प्रयास नहीं किये जा रहे हैं। लोगों को प्रशासनिक स्तर पर जानकारी मिलने में दिक्कत हो रही है, वहीँ जिन परिवारों से संक्रमित निकल रहे हैं वो भी सेल्फ क्वारनटाइन होने के शासन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। जब तक जानकारी मिलती है तब तक उनके परिवार के लोग सैकड़ों लोगों के संपर्क में आ चुके होते हैं।

संक्रमण की चपेट में आए लोगों की गैर जिम्मेदाराना हरकत किसे बताएं लोगों के लिए यह भी बड़ी परेशानी बन गया है, वर्षों से जिन पड़ोसियों के साथ मेलजोल रहा है उनके संक्रमित होने के बावजूद उन्हें किस प्रकार से समझाएं। साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि जब से लोगों को सेल्फ क्वारनटाइन की आजादी मिली है तब से लोग संक्रमित होते हुए भी संयम नहीं रख रहे हैं, घर पर नहीं रुक रहे हैं और बाहर निकल कर संक्रमण फैलाने का काम कर रहे हैं।

ऐसे में स्थानीय प्रशासन को पहले से ज्यादा मुस्तैदी से कोरोना संक्रमण रोकने का जिम्मा लेना था पर वो सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। और कोरोना का संक्रमण अपना भयावह रूप दिखाता चला जा रहा है। जरूरी हो गया है कि स्थानीय प्रशासन जल्द से जल्द ऐसे उपाय करे कि संक्रमित लोग फील्ड में न आएं। लोगों की शिकायतें सुनने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को अलग से तैनात कर उनकी जानकारी क्षेत्रवार सार्वजनिक की जाए और कन्टेनमेंट जोन बनाने की प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ किया जाए वरना त्योहारों की दृष्टि से बाज़ार और ग्राहक दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अक्तूबर और नवम्बर महीनों में प्रशासन को इमरजेंसी जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है।