भारतभूषण आर. गाँधी

इटारसी को लेकर कई बार कहा जाता है कि ये सभी प्रकार के मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने वाला शहर है। मुद्दा कोई भी हो, चाहे सामाजिक या राजनैतिक, हर किसी बात पर प्रतिक्रिया देता है। थोड़ा सा सोच कर देखेंगे तो ये सही भी लगेगा और शायद यही कारण रहा होगा जिसके चलते इटारसी के पूर्व विधायक पंडित गिरिजाशंकर ने कहा था कि इटारसी एक जीवंत शहर है, हर एक बात पर रियेक्ट करता है।

पूर्व विधायक पंडित गिरिजाशंकर शर्मा (संझले भैया) की बात पर गौर करें तो अब भी इटारसी ऐसा ही है जैसा पहले था। यानि अब भी इटारसी हर किसी बात पर रियेक्ट करता है। लेकिन मैं इसमें एक बात जोड़कर कहना चाहूँगा कि इटारसी सिर्फ रियेक्ट करता है, उससे आगे कुछ करने के मामले में उसकी हालत बाकी हिंदुस्तान जैसी ही है। यानि यहां का रियेक्‍शन दूध में आये तात्‍कालिक उबाल जैसा है, जो जरा से पानी के छींटे पड़ते ही ठंडा हो जाता है।

एक सप्ताह के घटनाक्रम को देखें तो आपको यह बात सही भी लगेगी। व्यापारियों के प्रतिनिधि दल ने विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा और एसडीएम सतीश राय के साथ सोमवार को बैठक में 15 जुलाई से एक सप्ताह के लॉक डाउन के लिए सहमति तत्काल दे दी थी पर बाद में अन्य व्यापारियों के साथ बैठे तो उनके लॉक डाउन न किये जाने के पक्ष में भी तत्काल रियेक्ट करके सहमति दे दी। लॉक डाउन का विरोध करने वाले व्यापारी संगठनों में सराफा व्यापारी संगठन भी शामिल था।

इस बैठक में लॉक डाउन न करने के सुझाव को लेकर डॉ. शर्मा को कॉल लगाया गया, लेकिन तब तक जिला एवं प्रदेश स्तर के अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग में कहीं भी लॉक डाउन न करते हुए वैकल्पिक कदम उठाने का निर्णय हो चुका था। इस पर भी तत्काल रिएक्शन देते हुए व्यापारियों ने कहा कि लॉक डाउन के विरोध में अलग अलग संगठन ज्ञापन बनाकर एसडीएम को देंगे और अगली सुबह देने पहुँच भी गए। इस पर एसडीएम सतीश राय का बयान जारी हुआ कि अभी लॉक डाउन का कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है।

लेकिन इटारसी वालों के इस रिएक्शन से कुछ भी हासिल नहीं हुआ। सराफा रोड से लगे दूसरी लाइन से दसवीं लाइन तक के एक बड़े क्षेत्र को और नए केस निकल आने के कारण, कन्टेनमेंट एरिया घोषित कर दिया गया। इसके बाद सराफा व्यापारी संगठन ने फिर शहर के नेचर के अनुरूप रियेक्‍ट करते हुए आगामी बृहस्पतिवार तक स्वेच्छा से अपने व्यवसाय बंद करने का निर्णय ले लिया। हालाँकि इस मामले में सिर्फ रियेक्‍शन ही नहीं एक्सीक्यूशन भी हुआ जिसका श्रेय सराफा व्यापारी संगठन की लीडरशिप को दिया जाना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर पार्क और मिनी गाँधी स्टेडियम के बीच के मुख्य मार्ग में स्टेडियम की दुकानों को शासन द्वारा बंद कराये जाने के निर्णय पर रिएक्शन ऐसे व्यापारियों की ओर से आया है जिनके व्यापार पर उनकी दुकान बंद होने से कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने वाला।

ऐसे में यह बात फिर सच साबित होती है कि इटारसी सिर्फ रियेक्ट करती है, एक्ट नहीं करती। यदि ऐसा नहीं था तो जब स्टेडियम की दुकानों में सबसे ज्यादा व्यापारिक गतिविधि करने वाले दुकानदारों और उनके घर वालों के संक्रमित होने और अन्य दुकानदारों द्वारा सोशल डिस्टेंस का पालन न करते हुए लापरवाहियों बरतने के बाद प्रशासन द्वारा उठाये गए कदम पर रियेक्ट ही क्‍यों किया गया। क्‍या वहां के  व्‍यापारियों द्वारा भी सराफा व्यापारी संगठन की तर्ज पर खुद ही इसका समर्थन नहीं कर देना चाहिए था।

बहरहाल देश और प्रदेशों की राजनीति भी कोरोना काल में बहुत कुछ सीख रही है और इसी सीखने सिखाने में इटारसी सहित पूरा देश सुधर कर सामने आए तो समाज का कुछ भला होगा। हो सके तो सब कुछ ठीक होने का इंतज़ार करने की जगह खुद को थोडा ठीक करने पर ध्‍यान दिया जाना चाहिये। देश हमेशा किसी एक राजनीतिक पार्टी का नहीं रहने वाला है। ये हमारा देश है और इसमें रहने के तौर तरीकों के लिए हमें खुद को तैयार करना चाहिए। साथ ही अपने सरोकारों को पहचान कर आगे कदम बढ़ाना चाहिए।