सतीश जोशी

एक तरफ सरकार कांग्रेस के हाथ से फिसल गयी, मंत्री पद बडी मेहनत, मशक्कत के बाद मिला और पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तक का सफर तय कर लिया तो दूसरी तरफ विधायक जीतू पटवारी ने नया राग छेड़ दिया है। राग भी ऐसा कि विधानसभा उपचुनाव में बड़ी दूर तक तरंगें छोड़ेगा। जीतू ने फेंका ही कुछ ऐसा कि कांग्रेस देती रहेगी जवाब। वहीं इंदौर में भाजपा विधायक महेन्द्र हार्डिया को गम यह है कि सबसे ज्यादा जनता को पीड़ा उनके ही विधानसभा क्षेत्र में भोगनी पड़ रही है।

हाथों हाथ लिया
जीतू पटवारी का एक बयान सोशल मीडिया में खूब पसंद किया जा रहा है। उन्होंने कथित रूप से कह दिया कि आरक्षण पर फिर से विचार करना चाहिए और देना ही है तो आर्थिक आधार पर दिया जाए। उनका यह बयान सवर्ण समाज ने हाथों हाथ उठा लिया तो राऊ विधानसभा के दलित,  पिछड़े समुदाय ने उन पर तीर पर तीर छोड़ दिए। अब वे जवाब देते फिर रहे हैं कि मैंने जो कहा वह आधा अधूरा प्रचारित किया जा रहा है। मैंने आरक्षण खत्म करने की नहीं बल्कि सभी समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देने की बात कही। सवर्ण समाज ने स्वागत करते हुए उनसे कहा कि उन लोगों को आरक्षण नहीं मिले जो, दलित या पिछड़े हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं।

तो वे बच रहे
अब जीतू से जुड़े दलित पिछड़े नेता भी अपने-अपने क्षेत्र में अपने ही समाज में प्रताड़ित हो रहे हैं। सब सोशल मीडिया पर उछल रहे सवालों से बच रहे हैं तो जीतू के शुभचिन्तकों को यह समझ नहीं आ रहा कि कैसे समझाए? बहरहाल उपचुनाव में लोग चटखारे लेंगे,  बात ठंडी पड़ जाए फिर भी चुनाव तो चुनाव है, वहां ऐसे ही हथियार कारगर होते हैं।

हार्डिया बेचारे…
इंदौर पांच के विधायक महेन्द्र हार्डिया एक तो मंत्री पद नहीं मिलने से निराश हैं तो रोज उनकी विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा के दर्द से कराह रहे हैं। उनको लगता है मेरी विधानसभा क्षेत्र के व्यापारियों को सबसे ज्यादा तंग किया जा रहा है। बाजार बंद करने को लेकर उनसे न राय ली जा रही है न ही उनके सुझाव माने जा रहे हैं। उनके क्षेत्र में प्रशासन मनमानी कर रहा है। नगर निगम से जुड़ी तमाम समस्याओं को लेकर भी वे दुखी हैं। उनके क्षेत्रों में वार्डो की जनता परेशान है। पीने के पानी से लेकर स्ट्रीट लाइट और ड्रेनेज की समस्याओं तक की सुनवाई नहीं हो रही है। विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। प्रशासन के उपेक्षापूर्ण व्यवहार से कार्यकर्ता भी नाराज हैं। उन तक शिकायतों का अंबार पहुंच रहा है। उन्होंने तय किया है कि अब आक्रामक रुख अख्तियार करना ही पडेगा।

वही जो मतदाता चाहेगा
विधानसभा उप चुनाव में प्रदेश भर की 27 सीटों में शामिल डबरा विधानसभा सीट पर सियासत तेज हो गई है। चुनावी मैदान में उतरने के लिए दावेदार पूरा जोर लगाने में जुटे हुए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण स्तर तक अपनी-अपनी टीमें बनाई जा रही हैं और लगातार जनसंपर्क किया साधा जा रहा है। लेकिन इस बार क्षेत्र की जनता और मतदाता कुछ और ही सोचकर बैठे हैं।
मतदाताओं को अब परंपरागत नेता नहीं चाहिए। जनता को नए चेहरे की तलाश है। जो उनके बीच का हो। मतदाता कहते हैं कि जनता को अपना मानने वाले नेताओं को सिर्फ कुर्सी चाहिए। चाहे वह इस पार्टी में रहकर मिले या दल बदलने के बाद दूसरी पार्टी में मिले। लेकिन इस तरह के रवैए से लोगों का मोहभंग होता नजर आ रहा है। जो साफ कह रहे हैं कि उनको अब दलबदलुओं में कोई दिलचस्पी नहीं है।