पत्रकार ने याद दिलाया आशुतोष के गाल पर पड़ा थप्‍पड़

आम आदमी पार्टी के प्रवक्‍ता और पत्रकार टर्न्ड नेता आशुतोष इन दिनों दिल्‍ली के पूर्व मंत्री संदीप कुमार के सैक्‍स स्‍कैण्‍डल को लेकर लिखे गए अपने एक ब्‍लॉग के कारण सुर्खियों में हैं। इस ब्‍लॉग में वे एक तरह से संदीप कुमार की हरकत का बचाव करते नजर आते हैं। आशुतोष के इसी ब्‍लॉग को लेकर एक पत्रकार ने उन्‍हें 20 साल पहले की एक घटना याद दिलाई है। उस घटना में बसपा के संस्‍थापक कांशीराम ने आशुतोष के गाल पर एक जोरदार थप्‍पड़ जड़ा था। आप भी पढि़ए उस घटना की याद दिलाने वाला प्रकाश नारायण सिंह का यह ब्‍लॉग जो हमने एबीपी न्‍यूज से साभार लिया है-

आम आदमी पार्टी के माननीय आशुतोष जी,

आपको खबर मिली या नहीं? सीडी में ‘आपसी सहमति’ से दिखने वाली महिला शिकायत करने थाना पहुंच गई है। कह रही है मंत्री जी ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर शोषण किया। महिला ने आरोप लगाया है राशन कार्ड बनवाने और नौकरी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया गया है। महिला का ये भी कहना है कि उसे कोल्ड ड्रिंक में कुछ मिलाकर दिया गया। अब जवाब देने की बारी आपकी है, क्योंकि आपकी ‘आपसी सहमति’ की थ्योरी की भद्द पिट गयी।

मीडिया पर सवाल उठाते हुए आप इसे निजता का उल्लंघन बताते हैं। पेशेवर पत्रकारिता छोड़ चुके हैं आप तो शायद भूल रहे होंगे। मैं याद दिलाता हूं आपके गाल पर 20 साल पहले जोरदार थप्पड़ कांशीराम ने जड़ा था। अब याद कीजिए कि उस वक्त दलित चिंतक, वरिष्ठ नेता कांशीराम ने क्या आरोप लगाया था? ठीक वही जो इस वक्त आप लगा रहे हैं। निजता का उल्लंघन। खैर.. आप जरा कांशीराम से ध्यान हटाकर अपने तत्कालीन संपादक को याद कीजिए। उस वक्त आपके संपादक ने क्या कहा था? वही संपादक जिन्हें टीवी पत्रकारिता का सिरमौर माना जाता है। मुझे उस वक्त के कुछ वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि तब एसपी सिंह ने कहा था कि हमारा काम है नजर रखना.. यह निजता का उल्लंघन नहीं है। हम नजर रखेंगे। केजरीवाल की मेहरबानी से मिलने वाली कुर्सी की लालच में दोहरा मापदंड तो मत अपनाइए।

आपके साथी और केजरीवाल सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री संदीप कुमार की कई महिलाओं के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें और हमबिस्तर होते हुए सीडी एबीपी न्यूज के दफ्तर में आती है तो एबीपी न्यूज ने पत्रकारिता के मापदंड को उच्च बनाये रखते हुए सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल और आरोपी मंत्री से लगातार उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया। आपके मंत्री और मुख्यमंत्री दोनों की जवाब देने के बजाए मुंह छुपाते फिरे। फिर ट्विटर पर चहचहाते हुए आपके ‘देवता’ ने पीठ थपथपाई कि हमें संदीप कुमार की ‘आपत्तिजनक’ सीडी मिली है। हम उन्हें हटा रहे हैं। जैसा कि आजकल सियासत में हो रहा है नेता जी बंसी बजाते हैं फिर उनके पीछे पीछे ताता थैया करने की होड़ लग जाती है। इसी होड़ में उपमुख्यमंत्री जी आते हैं बताते हैं, ‘देखिए हमनें आधे घंटे में हटा दिया’। तो भैया जब मुख्यमंत्री जी खुद सीडी को आपत्तिजनक मान कर मंत्री को पद से हटा दिये तो सवाल आप एबीपी न्यूज और मीडिया से क्यों पूछ रहे हैं। क्या मंत्री का सेक्स सीडी आने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा हटाना हेडलाइन नहीं बनना चाहिए?  आप पूर्वांचल से हैं आपको ये कहावत पता होगी, खेत खाए गदहा, मार खाए जोलहा। हटाया मुख्यमंत्री जी ने उपदेश आप मीडिया को देने लगे।

निजता का अर्थ है किसी व्यक्ति का यह तय करने का उचित अधिकार कि किस हद तक वह गैरों के साथ अपने बारे में बांटेगा। कैबिनेट मंत्री संदीप कुमार की कई महिलाओं के साथ  आपत्तिजनक तस्वीरें, हमबिस्तर होते हुए एक महिला के साथ सेक्स सीडी निजता है या सार्वजनिक हित का टकराव। यह बहस का मसला नहीं है स्पष्ट है जब आपका मंत्री ताकतवर है किसी महिला के साथ संबंध बनाता है और उसकी वीडियो रिकार्डिंग करता है तो यह जांच का विषय है। और अगर वही वीडियो रिकार्डिंग सामने आती है, तो खबर भी है। सार्वजनिक हित वाला पहलू ज्यादा महत्वपूर्ण है और इस लिहाज से इस सीडी को सार्वजनिक करना जरूरी था।

दूसरी बात कि मीडिया के नैतिक पैमाने पर आपको फख्र होना चाहिए कि जब उसका मुख्यमंत्री हटा देता है तब मीडिया ने सीडी चलाई। निजता के अधिकार का सम्मान होना चाहिए लेकिन किसी ताकतवर के कुकृत्य को ढंकने के लिए इसे हथियार नहीं बनने देना चाहिए।

आप तो पढ़े लिखे हैं.. काफी अनुभवी भी हैं। आपको दुनिया के उदाहरण से समझाता हूं यदि आपके इगो को ठेस ना पहुंचे तो। अमेरिकी प्रेस ने राष्ट्रपति जॉनसन की खराब हो चुकी किडनी पर विस्तृत रिपोर्ट छापी थी। यह पूरी तरह व्यक्तिगत मामला है, लेकिन इसे इस आधार पर उचित ठहराया गया कि राष्ट्रपति की सेहत का सीधा संबंध वियतनाम युद्ध से है, इसलिए जनता को जानने का पूरा हक है।

सियासत की मंडी में आप मंजे हुए व्यापारी बन चुके हैं। जिस तरह के कुतर्कों को आप बचाव का हथियार बना रहे हैं उससे आपका खोखलापन भी सामने आ रहा है। मुझे भरोसा है कि आपको पता होगा नकली आचरण वाली राजनीति की उम्र लम्बी नहीं हो सकती है। संदीप के सेक्स स्कैंडल पर जिस तरह के उपदेश आप दे रहे हैं वो आपकी सोच पर सवाल उठा रहा है। क्योंकि कभी ना कभी, आपने भी अपने जूनियर साथियों को यही बताया होगा कि दोहरा मानदंड सबसे बड़ी अनैतिकता है।

 

 

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