राकेश अचल

आज सत्रह दिन बीतने के बाद एक बात मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि जादूगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लाख जतन कर लें, उनकी सरकार बचने वाली नहीं है और मुमकिन है कि 5 अगस्त से पहले उनकी सरकार गिर जाये। अब ये बात अलग है कि उनकी सरकार सचिन पायलट गिराएं या राज्यपाल या अदालत के फैसले, यानि सरकार को तो गिरना ही है। 11 जुलाई को लगा ग्रहण राजस्थान की सरकार को खाकर ही वापस जाएगा।

बीते अठारह दिन से राजस्थान की जनता के आदेश से खिलवाड़ चल रहा है और इसके लिए कोई एक व्यक्ति दोषी नहीं हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, केंद्र सरकार और पर्दे के पीछे से भाजपा इस खिलवाड़ के लिए दोषी हैं। भाजपा राजस्थान संकट के लिए कांग्रेस के आंतरिक कलह को वजह बताती है तो अशोक गहलोत भाजपा को और सचिन पायलट अशोक गहलोत को। राज्यपाल और अदालत अपनी-अपनी जगह पर हैं , उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। दोनों कायदे-क़ानून से बंधे हैं। ये बंधन अपने आप में अनूठा है।

कांग्रेस हाईकमान राजस्थान के संकट से वाकिफ थी लेकिन उसने समय रहते जरूरी एहतियात नहीं बरती। सब जानते थे कि मध्यप्रदेश के जनादेश को हड़पने के बाद भाजपा का अगला शिकार राजस्थान की गहलोत सरकार को बनाया जाएगा, फिर भी कांग्रेस हाईकमान सचिन को लेकर कोई फैसला नहीं कर पाया। सचिन को मनाने या पार्टी से बाहर करने का फैसला यदि समय पर हो जाता तो मुमकिन है कांग्रेस कि ये रेतीली सरकार बची रह जाती, लेकिन अब कोई सूरत नहीं बची है। अब अशोक गहलोत, सचिन और भाजपा के साथ-साथ राज्‍यपाल और अदालत के लपेटे में भी आ गए हैं। कांग्रेस का हाईकमान गहलोत सरकार के साथ खड़ा जरूर है लेकिन अब बाजी हाथ से निकल चुकी है।

राजनीति के मामले में पिछले छह साल से सत्तारूढ़ भाजपा की मोदी और शाह की जोड़ी एक कामयाब जोड़ी साबित हुई है। तमाम नाकामियों के बावजूद सरकारें हड़पने में इस जोड़ी का कोई सानी नहीं है। कांग्रेस में इस जोड़ी का मुकाबला करने वाली कोई जोड़ी नजर नहीं आती। चूंकि इस जोड़ी ने तय कर लिया है कि उसे राजस्थान सरकार गिराना है तो ये सरकार गिरकर ही रहेगी।

कांग्रेस मध्यप्रदेश की सरकार नहीं बचा सकी, कर्नाटक के नाटक में उसे नाकामी हाथ लगी और यही सब अब राजस्थान में होता दिखाई दे रहा है। भाजपा का कमाल है कि उसे हर सूबे में कांग्रेस के भीतर विभीषण मिल जाते हैं। मिलते जा रहे हैं। ईडी और सीबीआई से घबड़ाई बसपा सुप्रीमो भी अब विभीषण बनने पर विवश हैं।

राजनीति में भविष्यवाणी करना बहुत आसान नहीं तो बहुत कठिन भी नहीं होता, इसलिए मैं भविष्यवाणी के बजाय संभावना जताना चाहता हूँ कि राजस्थान सरकार को अब कोई ‘माई का लाल’ बचाने वाला नहीं है और इस सरकार के गिरते ही भाजपा का ‘कुरसी अश्वमेघ यज्ञ’ का घोड़ा महाराष्ट्र की ओर मुड़ जाएगा। महाराष्ट्र के नादान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भाजपा को सरकार गिराने के लिए न्‍योता दे चुके हैं।

भाजपा जनता को उलझाए रखने के लिए योजनाबद्ध तरीके से शिगूफे छोड़ने की तैयारी किये बैठी है। 5 अगस्त को राममंदिर का भूमि पूजन,15 अगस्त को कोविड वैक्सीन की घोषणा, बाद में रफाल लड़ाकू विमान का भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाना तो जगजाहिर है। आगे बिहार है, बंगाल है… भाजपा इन्हीं शिगूफों के सहारे अगले चुनाव यानि 2024  तक की यात्रा पूरी कर लेगी।

देश में जनादेश की अवमानना से मै आहत अवश्य हूँ लेकिन मैं इस तथ्य को भी अनदेखा नहीं कर सकता कि कांग्रेस के पास जनादेश को संभालने की कूवत नहीं बची है। कांग्रेस के कर्णधार से लेकर तमाम सेनापति या तो बुढ़ा गए हैं या उनमें  समर जीतने की सूझबूझ नहीं रही है। भाजपा से निराश जनता कांग्रेस से भी निराश है। विकल्प कोई है नहीं इसलिए सब भगवान के भरोसे है। बेचारा भगवान भी कब तक देश को बचा सकता है। फिलहाल सबकी नजर राजस्थान पर है लेकिन मेरी नजर अयोध्या पर है। अयोध्या में एक नया कांड जो होने वाला है जिसका अनुमान रामचरित मानस लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास को भी नहीं था। जय श्रीराम।