भारतभूषण आर. गाँधी

जिस तरह इटारसी नगर में पिछले एक सप्ताह में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ी है उससे अब तो लोगों को सबक ले ही लेना चाहिए। इटारसी बाजार के जो हाल हैं उसे देखकर तो लगता नहीं है कि लोग सोशल डिस्टेंस या मास्क लगाने की शर्त का पालन कर रहे हैं। जबकि बार बार कहा जा रहा है कि जब भी बाज़ार जाएं या घर के बाहर किसी काम से निकलें तो सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करें और लोगों के संपर्क में आने से पहले या लोगों के नजदीक जाते समय मास्क जरूर पहने रहें।

जब अप्रैल महीने में कोरोना संक्रमण के केस बड़ी संख्या में निकल कर आये थे और अधिकतम 37 पर जा पहुंचे थे, तब वे दो तीन मोहल्लों से ही थे। लेकिन इस बार अनेक मोहल्लों से संक्रमण के केस सामने आये हैं। साथ ही ग्राम जमानी भी 4 केस के कारण नया कन्टेनमेंट एरिया बन गया है। इस बार व्यापारी वर्ग और इनके परिवारों से संक्रमण के केस ज्यादा आए हैं।

जब इटारसी में संख्या 20 के अंदर थी और विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने एसडीएम व अन्‍य प्रशासनिक अधिकारियों तथा व्यापारियों के साथ बैठक करके तय किया था 15 तारीख से 1 सप्ताह का लॉक डाउन किया जाए, लेकिन बैठक में अनुपस्थित रहे कुछ व्यापारियों ने बाद में इस पर आपत्ति जताई। इससे पहले जिला अधिकारियों की प्रदेश स्तर पर हुई वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग में लॉक डाउन न किये जाने का निर्णय लिया जा चुका था। राज्य सरकार का मानना है कि लॉक डाउन के बगैर किस तरह से कोरोना से निपटा जाये इस दिशा में हरसंभव प्रयास करने पड़ेंगे।

इटारसी सहित होशंगाबाद की चिंता को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव फैज अहमद किदवई ने जिले में अनेक स्थानों पर दौरा किया। वे इटारसी अस्पताल और कोविड सेक्टर भी गए। इससे साफ जाहिर है कि सरकार को प्रदेश के हर क्षेत्र सहित होशंगाबाद जिले के इटारसी के लोगों की कितनी चिंता है।

दूसरी ओर चिंता का विषय यह है जिस प्रकार इटारसी के वाशिंदे सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाते दिखाई देते हैं और मास्क न पहनने की जिद पर इधर-उधर घूमते दिखाई देते हैं उससे तो ऐसा लगता है कि इन्हें विश्वास है कि इटारसी को प्रभु का विशेष वरदान मिला हुआ है और यहां कुछ नहीं होगा। लेकिन जो हुआ है उससे अब सबक लेने की बहुत जरूरत है वरना प्रशासन ने अगर फिर से सख्ती की तब उसे झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा।

व्यापारी वर्ग को भी तय करना पड़ेगा कि जिस प्रकार से लॉक डाउन के विरोध में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय गए थे वहीं अब वे लॉक डाउन की मांग के लिए भी आगे आएं। वरना जिस तरह से हालिया संक्रमण मामलों में व्यापारी ही खुद चपेट में आये हैं, उनकी संख्या में लगातार वृद्धि होती रहेगी और उनके परिवारों को किसी भी अनहोनी के लिए तैयार रहना होगा। जिस तरह से इसी एक सप्ताह में संक्रमित मरीजों की संख्या आधा सैकड़ा हो गई है उसे रोक पाना बड़ी चुनौती होगी। शासन स्तर पर कोरोना की रोकथाम के लिए उठाये गए क़दमों का रोना आज तक रोया गया है, तो भविष्य में संख्या बढ़ जाने के बाद क्या खुद के नाम पर रोया जायेगा, यह सोचना होगा।

इटारसी के अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल करते हुए 11 कंटेनमेंट क्षेत्र बन गए हैं, इन पर नजर रखने के लिए इटारसी थाने के बगल में सीसीटीवी सर्विलेंस कक्ष बनाया गया है। यहां तैनात टीम एसडीएम सतीश राय के निर्देशन में काम करते हुए संक्रमण चैन तोड़ने और संक्रमित लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री तैयार कर संपर्क में आए लोगों पर भी नज़र रखेंगे।

इटारसी के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में लोग अक्सर इस बात को उठाते रहे हैं कि अस्पताल में मशीन आने के बावजूद टेस्टिंग नहीं की जा रही है। जो लोग टेस्टिंग कराना चाहते हैं उन्हें कोई ना कोई बहाना करके टरका दिया जाता है।  गौरतलब है कि होशंगाबाद जिले के इटारसी सहित दो बड़े नगरों के अस्पतालों में कोरोना टेस्टिंग की मशीन आकर इंस्टाल हो चुकी। दावा किया गया है कि इसमें महज़ एक-डेढ़ घंटे के अंदर रिजल्ट आ जाते हैं फिर भी लोगों का टेस्ट ना किया जाना अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

इस बात को प्रमुख सचिव किदवई ने भी मीडिया के सामने माना है कि जांच की रफ़्तार बहुत कम है, इसे बढ़ाया जाएगा। दूसरी ओर यह भी सच है कि सामान्य व्यक्ति संक्रमण के मामूली लक्षण आने पर टेस्ट नहीं करवाना चाहता, न ही किसी को अपने स्वास्थ्य के बारे में बताना ही चाहता है। ऐसा लगता है कि लोग ही जानबूझकर या अनजाने में जानकारी छुपा कर अपनी और दूसरों की जिंदगी के लिये अनहोनी का कारण बन रहे हैं।

अब यह जरूरी हो गया है कि न केवल प्रशासन पूरी तरह से सख्ती अपनाए बल्कि लोग भी कोरोना महामारी से बचने के लिए अपनी जिम्मेदारी को ठीक तरीके से समझें और शासन के बताए गए सभी नियमों का पालन करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें मास्क पहनें, मोहल्ले में सोशल गैदरिंग ना करें, मंदिरों में एकत्र ना हों और यदि आसपास के लोगों से मिलना जरूरी है तो उस स्थिति में पूरी सावधानी बरतें।

आरोग्य सेतु ऐप अभी भी लोगों की सहायता करने में प्रभावी सिद्ध होता दिखाई नहीं दे रहा। इसमें केवल वही डाटा दिखाई दे रहा है जिसमें सेल्फ टेस्ट से सम्बंधित जानकारी अपलोड हुई है। ऐप में हमेशा हैंडसेट का ब्लूटूथ ऑन रखने को कहा जाता है लेकिन ब्लूटूथ के जरिये किसी को कोरोना संक्रमण क्षेत्र के नज़दीक जाने पर अलर्ट साउंड या सिग्नल मिला हो इसका कोई उदाहरण सुनने में भी नहीं आया है। वहीँ शहर में अभी भी हजारों लोगों ने आरोग्य सेतु ऐप को अपने मोबाइल सेट्स में इनस्टॉल नहीं किया है। शासन स्तर पर इस ऐप को और कारगर बनाने की जरूरत दिखाई दे रही है।

बहरहाल यह सब हमारे ही हाथ में है कि हम कोरोना से निपटने के लिए कैसे और कितनी ईमानदारी के साथ अपने आपको सजग रखते हैं।