जयराम शुक्‍ल 

रीवा/ विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय अभियान को यथार्थ के धरातल पर उतारने के उद्देश्य से अध्ययन दल ने बुंदेलखंड क्षेत्र की यात्रा की। वहाँ के ऐतिहासिक स्थलों, वहां के जनजीवन की मुश्किलों, प्राकृतिक संसाधनों की लूट का अध्ययन किया व विद्वतजनों से विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय पर विमर्श किया। अध्ययन मंडल में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक-विचारक जयराम शुक्ल, देश के जानेमाने पर्यावरणविद्, वन्य विशेषज्ञ डा.एसपीएस तिवारी, आर्गेनिक कृषि नवाचार में वैश्विक स्तर पर काम करने वाले प्रणवीरसिंह हीरा जी शामिल थे।

विन्ध्य, विन्ध्यवासिनी व विन्ध्यप्रदेश आज भी बुंदेलखंड के हृदय में अंकित है। विन्ध्यवासिनी वहां की आराध्य देवी हैं व वस्तुतः विन्ध्यप्रदेश के नाम की उत्पत्ति 13 मार्च 1948 को नौगांव में हुई। कैबिनेट सचिव वीपी मेनन की अध्यक्षता में बुंदेलखंड की 34 रियासतों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों/इलाकों के भारतीय संघ में विलय की सहमति दी व नये राज्य का नाम विन्ध्यप्रदेश प्रस्तावित किया गया। 35वां राज्य रीमा था जो शामिल हुआ।

एक गंभीर राजनीतिक षड़यंत्रवश बुंदेलखंड बनाम बघेलखण्ड का विभाजन किया गया तथा विन्ध्य को रीवा संभाग मात्र से चस्पा कर दिया गया, जबकि मूल विन्ध्य बुंदेलखंड ही है। भौगोलिक रूप से विन्ध्य क्षेत्र वह है जो विन्ध्यन वैली में बसा है। विन्ध्यन वैली का सबसे विस्‍तृत हिस्सा बुंदेलखंड में है।

उत्तरप्रदेश में बुंदेलखंड को राज्य बनाने की बात चल रही है। यहां हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड का कोई जिला उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड में शामिल नहीं होना चाहता। बुंदेलखंड के गाँधी लक्ष्मीनारायण नायक और हमारे जननायक यमुनाप्रसाद शास्त्री ने विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय की कल्पना के साथ ही ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग का प्रस्ताव संसद में रखा था। विधानसभा में 10 मार्च 2000 के विन्ध्यप्रदेश के संकल्प में बुंदेलखंड क्षेत्र के सभी विधायकों ने न सिर्फ़ सहमति दी अपितु विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय के पक्ष में तर्क व तथ्य भी रखे। यह विधानसभा की कार्यवाही में दर्ज है।

18 मार्च 2000 को श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी व लक्ष्मी नारायण नायक की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ नेता विधायक मगनलाल गोईल (टीकमगढ) विधायक उमेश शुक्ल (छतरपुर) विधायक राजेन्द्र भारती (दतिया) कैप्टन जयपाल सिंह (पन्ना) सहित विन्ध्यप्रदेश के तीन चौथाई विधायकों, जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विन्ध्यप्रदेश राज्य के पुनरोदय का संकल्प लिया गया।

आज नौगांव के धुबेला संग्रहालय में हमारी साझी संस्कृति संग्रहीत है। बुंदेलखंड के तमाम नगरों व कस्बों में विन्ध्य के नाम के प्रतिष्ठान हैं। कई छोटे-बड़े अखबार हैं जो विन्ध्य के शीर्षक से निकलते हैं। यही हमारा ऐक्य है। खनिज संसाधनों की लूट, विकास की अनदेखी, शोषण राजनीतिक उपेक्षा, गरीबी, भुखमरी इन सभी दर्द के रिश्‍तों से समूचा विंध्यप्रदेश आज भी आबद्ध है। हमारे साझे दुख-सुख हैं, हमारी समस्याएं साझी हैं और विन्ध्यप्रदेश के पुनरोदय का प्रयत्न भी साझा है।

जहाँ तक प्रकृतिक व नैसर्गिक संसाधनों का सवाल है तो म.प्र. 531 टाइगर्स के साथ टाइगर स्टेट है। 200 से अधिक टाइगर विंध्याचल में पाए जाते हैं। सफ़ेद बाघ तो यहां का ही गौरव है। विंध्य पर्वत श्रृंखला गुजरात से ले कर म.प्र होते हुए बनारस तक लगभग 1085 किमी. में फैली है। केन, बेतवा, टमस, सोन, नर्मदा, जुहिला, पार्वती, कालीसिंध, छोटी महानदी, बिछिया, बीहर आदि नदियां 12 महीने बहती हैं। 35 प्रतिशत जल संसाधन इन्हीं नदियों में हैं।

विंध्य प्रदेश में 365 दिनों में से लगभग 360 दिन सूर्य चमकता है। इसका विकास सौर्य ऊर्जा के हब के रूप में हो सकता है। यहां सैकड़ों वनस्पति विहीन पहाड़ियों में गुढ़ की भाति सोलर प्लांट्स लगाए जा सकते हैं। विंध्य के अकेले सिंगरौली जिले में 22025 वर्ग किमी. में 9121 5 मिलियन टन कोल रिज़र्व हैँ। अकेले सिंगरौली में भारत का 14 प्रतिशत कोयला उत्पादन प्रति वर्ष होता है।

लाइम स्टोन, बाक्साइट, ग्रेनाइट, बालू, हीरा यहां तक कि यूरेनियम का भंडार भी हैँ यहां। लघु वनोपज में तो पूरे प्रदेश में यह अव्‍वल है। भोपाल में विंध्य हर्बल उत्पाद के नाम पर लघु वनोपज प्रोसेसिंग केंद्र है जहां सारा कच्चा माल विंध्य से ही जाता हैँ। खजुराहो, बांधवगढ़ व पन्ना टाइगर रिजर्व, ह्वाइट टाइगर सफारी विश्वस्तरीय टूरिज्म डेस्टिनेशन हैं। विन्ध्यप्रदेश में वह सब कुछ है जो एक विकसित राज्य के लिए आवश्यक है। इसके पुनरोदय की बात जनजन तक पहुंच रही है। छात्र-युवा-किसान-मजदूर सभी के हृदय में अब विन्ध्य प्रदेश की चाहत धड़कने लगी है। (मध्‍यमत)
डिस्‍क्‍लेमर- ये लेखक के निजी विचार हैं।
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