गिरीश उपाध्‍याय

पार्टी में अंदरूनी घमासान से जूझ रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सोमवार को आया एक बयान थोड़ा चौंकाने वाला है। राहुल ने अपने पुराने दोस्‍त और सांसद ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के पार्टी छोड़कर जाने का जिक्र करते हुए युवा कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में कहा कि भाजपा ने सिंधिया को बैकबेंचर बना दिया है वे वहां कभी सीएम नहीं बनेंगे। यदि उन्‍हें सीएम बनना है तो कांग्रेस में लौटकर आना होगा।

यह संयोग ही है कि राहुल ने सिंधिया को ठीक एक साल बाद याद किया है। इससे पहले सिंधिया ने पिछले साल 11 मार्च को कांग्रेस छोड़ दी थी और उसके ठीक बाद राहुल गांधी ने एक संक्षिप्‍त लेकिन भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था-‘’ज्‍योतिरादित्‍य उन गिनेचुने लोगों में से थे जो मेरे घर कभी भी आ सकते थे। हम दोनों एक साथ कॉलेज में थे।‘’

उसके बाद राहुल सिंधिया प्रकरण पर अब थोड़ा खुलकर बोले हैं। युवक कांग्रेस की कार्यकारिणी के कार्यक्रम में जब एक कार्यकर्ता ने उनसे पूछा कि जो लोग पार्टी छोड़कर चले जाने के बाद लौटकर आते हैं उन्‍हें अच्‍छी भूमिका मिल जाती है। इस पर राहुल का जवाब था- सिंधिया आज कहां पहुंच गए हैं। एक समय वे हमारे साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व में थे। अब भाजपा ने उन्‍हें बैकबेंचर बना दिया है। आप लिखकर रख लें, भाजपा में रहते हुए वे कभी सीएम नहीं बनेंगे, इसके लिए उन्‍हें कांग्रेस में ही वापस आना होगा।

इसके साथ ही राहुल ने यह भी खुलासा किया कि भाजपा में शामिल होन से पहले सिंधिया उनसे मिले थे। सिंधिया को कांग्रेस के साथ काम करते हुए संगठन को मजबूत बनाने का विकल्‍प रखा गया था। मैंने (राहुल) उनसे कहा था आने वाले समय में आप मुख्‍यमंत्री बनेंगे, लेकिन उन्‍होंने दूसरा रास्‍ता चुन लिया। अब भाजपा में उनकी पोजीशन क्‍या है यह किसी से छिपा नहीं है।

राहुल के इस बयान पर मंगलवार को ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की बहुत संक्षिप्‍त लेकिन तीखी प्रतिक्रिया आई। सिंधिया ने कहा- ‘’राहुल गांधी जिस तरह आज सोच रहे हैं, यदि वैसा ही उन्‍होंने उस समय सोचा होता तो आज हालात कुछ और होते…।‘’ आपको याद होगा कि सिंधिया ने पार्टी में अपनी उपेक्षा को कारण बनाते हुए पिछले साल इन्‍हीं दिनों कांग्रेस छोड़ दी थी और उनके पार्टी छोड़ने का नतीजा यह हुआ था कि कांग्रेस को मध्‍यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्‍व वाली सरकार गंवानी पड़ी थी।

इस एक साल में मध्‍यप्रदेश में राजनीति में बहुत पानी बह गया है। सिंधिया समर्थक जो 22 विधायक पार्टी छोड़ गए थे उनमें से अधिकांश दुबारा चुनाव जीतकर आ चुके हैं। इतना ही नहीं उनमें से कई शिवराजसिंह के नेतृत्‍व वाली भाजपा सरकार में फिर से मंत्री भी बन गए हैं। सिंधिया को भाजपा ने राज्‍यसभा का सदस्‍य बनवा दिया है और राजनीतिक हलकों में यह बात अकसर कही जाती है कि सिंधिया ने भाजपा में आने के बाद ‘अपने लोगों’ के हितों के लिए पूरी लड़ाई लड़ी है।

पर इस सारी राजनीतिक कथा का ताजा बिंदु राहुल गांधी के हालिया बयान का वो अंश है जिसमें वे कह रहे हैं कि भाजपा में रहते हुए सिंधिया कभी मुख्‍यमंत्री नहीं बन सकते, आप लिखकर रख लीजिये, यदि उन्‍हें मुख्‍यमंत्री बनना है तो उन्‍हें कांग्रेस में लौटना ही होगा। तो क्‍या यह माना जाए कि राहुल गांधी, सिंधिया को एक बार फिर अपने साथियों सहित दलबदल करने और शिवराज सरकार को गिराकर मध्‍यप्रदेश में फिर से कांग्रेस की सरकार बनवाने का न्‍योता दे रहे हैं? और क्‍या इसके एवज में वे सिंधिया को मुख्‍यमंत्री पद ऑफर कर रहे हैं?

राहुल का यह कहना कि सिंधिया को यदि मुख्‍यमंत्री बनना है तो उन्‍हें कांग्रेस में आना होगा, और इसके साथ ही भाजपा में सिंधिया की पोजीशन बैकबेंचर जैसी बताना, यह दर्शाता है कि राहुल गांधी या तो सिंधिया से अब भी कोई उम्‍मीद लगाए बैठे हैं या फिर वे उन्‍हें उस कुर्सी का ऑफर देर ललचा रहे हैं, जो कुर्सी सिंधिया को कांग्रेस में रहते हुए कभी नहीं मिली या कि राहुल ने उन्‍हें नहीं दी थी।

पर क्‍या सिंधिया राहुल की बात को कोई तवज्‍जो देंगे? ऐसा लगता नहीं है। सिंधिया पहले ही एक बार दलबदल कर बहुत कुछ सुन और सह चुके हैं। गद्दार जैसा आरोप भी… 19 साल वे जिस पार्टी में रहे, उसे छोड़ने के बाद उसी पार्टी के उनके पुराने सहयोगियों और कभी उनकी कृपादृष्टि पाने को आतुर रहने वाले लोगों तक ने उनके बारे में क्‍या क्‍या नहीं कहा, वे शायद कभी नहीं भूलेंगे। और वैसे भी अब उनका ध्‍यान भाजपा में अपना मुकाम और अहमियत बनाने पर है। इसलिए राहुल गांधी को यह सपना नहीं पालना चाहिए कि सिंधिया फिर से कांग्रेस में आ जाएंगे और जिस तरह उन्‍होंने अपने साथियों के साथ कांग्रेस छोड़ी थी, उसी तरह वे एक साल के भीतर ही भाजपा भी छोड़ देंगे और एक बार फिर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने की राह बन जाएगी।

दरअसल राहुल गांधी का ताजा बयान कांग्रेस में एक बार फिर तेजी से बदल रहे अंदरूनी हालात और पार्टी से लगातार हो रहे पलायन से निपटने की उलझन को बताता है। लेकिन यह इस बात का भी संकेत देता है कि राहुल गांधी सही समय पर सही निर्णय करने में लगातार चूक रहे हैं। वरना एक साल बाद उन्‍हें सिंधिया प्रकरण में यह कहने की जरूरत नहीं होती कि ज्‍योतिरादित्‍य को मुख्‍यमंत्री बनना है तो वे कांग्रेस में आएं।

हैरत इस बात की है कि बात उन्‍हीं ज्‍योतिरादित्‍य की हो रही है जिनके बारे में साल भर पहले भी राहुल जानते थे (जैसाकि उनका खुद का बयान कह रहा है) कि उनका सखा मुख्‍यमंत्री बनना चाहता है। यानी संकट का पता होते हुए भी राहुल उस समय मामले का समाधन नहीं खोज पाए थे। और यह बात सिंधिया के ताजा बयान से भी उजागर होती है कि जो बात राहुल आज कह रहे हैं यदि वैसा उन्‍होंने उस समय सोचा होता तो हालात आज कुछ और होते। दरअसल राहुल गांधी के साथ दिक्‍कत यही है कि वे देर से भी आते हैं और दुरुस्‍त भी नहीं आते… उनका ताजा बयान भी यही दर्शाता है।