डॉ. बशीर बद्र नहीं रहे। उर्दू अदब का एक बेहद नरम, बेहद आत्मीय और मानवीय अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया। उनके योगदान को याद करता गिरीश उपाध्याय का यह आलेख।
Madhyamat
2026-05-29 11:10:34
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