राकेश अचल 

भारत का केंचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग) नियम-कायदों से बंधा है इसलिए जब तक नियम-कायदे नहीं कहेंगे वो किसी को कदाचरण करने से नहीं रोक सकता। हमारे राजनीतिक दल भी इस सत्य से वाकिफ हैं इसलिए वे भी इसका पूरा-पूरा लाभ उठाने में लगे हुए हैं। बात मध्यप्रदेश की है, यहां निकट भविष्य में 25 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है और इन उपचुनावों के लिए मुख्य प्रतिद्वंदी सत्तारूढ़ भाजपा तथा कांग्रेस धार्मिक सूत्रों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन कोई इन्हें रोकने-टोकने वाला नहीं है।

हमारे यहां नियम है कि जब तक चुनावों की तिथियां घोषित नहीं होतीं तब तक आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होती अर्थात तब तक आप जो कदाचार करना चाहें धड़ल्ले से कर सकते हैं। केंचुआ आपसे कुछ भी नहीं कहेगा। कांग्रेस के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और अब शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट को उनके घर में घेरने के लिए दोनों पार्टियां नरम हिन्दुत्व के रास्ते पर हैं। भाजपा ने अपने नेता ‘तुलसी सिलावट’ की ब्रांडिंग के लिए ‘तुलसी’ को ही हथियार बनाया है, वहीं कांग्रेस शिवलिंग के सहारे  है।

उपचुनाव जीतने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा ने ‘हर हर मोदी, घर घर तुलसी’ अभियान शुरू किया है, जिसमें तुलसी के पौधे वितरित किये जा रहे हैं जबकि दूसरी ओर कांग्रेस ‘हर हर महादेव, घर घर महादेव’ अभियान से लोगों के दरवाजे पर दस्तक दे रही है। चूंकि सावन का महीना है इसलिए मतदाताओं को सांवेर में कांग्रेस छोटे छोटे शिवलिंग बांट रही है, पार्टी का लक्ष्य 51 हजार शिवलिंग बांटने का है। शिवलिंग के साथ तांबे का स्टैंड, पूजन सामग्री, प्रसाद और शिवलिंग की घर में स्थापना और पूजन कैसे करें, इसकी विधि भी है।

भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में आये पुराने नेता प्रेमचंद गुड्डू भाजपा पर हमलावर हैं, कहते हैं ये हमारी नकल कर रहे हैं, नकल में अकल चाहिये। हमने घर-घर में रजिस्ट्रेशन किया है, हमारा उद्देश्य है शांति रहे, अमन रहे, इसलिये घर घर में बाबा महाकाल की स्थापना कर रहे हैं। भाजपा इस सीट पर उपचुनाव में ‘हर-हर मोदी, घर-घर तुलसी’ अभियान के साथ उतरी है, जिसके तहत बीजेपी नेता घर-घर जाकर तुलसी के पौधे बांट रहे हैं। तुलसी के पौधे का धार्मिक महत्व है, कोरोना काल में औषधीय भी, तीसरा बीजेपी नेता और सांवेर से विधायक रह चुके सिलावट का पहला नाम भी ‘तुलसी’ है।

इस अभियान को लेकर नेताओं के अपने-अपने तर्क-कुतर्क हैं तुलसी सिलावट कहते हैं कि- तुलसी सांवेर के हर आंगन में है, सांवेर से मेरा बरसों का रिश्ता है। ये हमारे संगठन का काम है। मैं कभी किसी का नाम नहीं लेता। धर्म और संस्कृति में राजनीति शोभा नहीं देती, तुलसी जिस आंगन में जाती है सारी बीमारी खुद खत्म हो जाती है।

सांवेर के इस चुनाव प्रचार अभियान से आप कल्पना कर सकते हैं कि मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा क्या है? क्या प्रदेश के और देश के चुनाव आयोग को ये सब दिखाई नहीं देता। केंचुआ भले ये न देखे पुलिस तो ये देख रही है, लेकिन बेचारी पुलिस क्या करे, जब सरकार ही इस अभियान के पीछे खड़ी हो। मेरे ख्याल से केंचुआ को समय से पहले भी अपनी शीतनिद्रा से बाहर आकर इस तरह के अभियानों के खिलाफ काम करना चाहिए।