के. विक्रम राव

लोकोक्ति थी कि खेल की भावना यदि राजनति में आ जाये तो कटुता घटेगी, सौहार्द बढ़ेगा। संभवत: ईमानदारी भी गहरायेगी। आज ठीक उलटा हो रहा है। खेल को राजनीति ने ज्यादा कदाचारी बना डाला है। 22 अगस्त 2022 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फुटबाल खेल संघ के मामले पर दिये गये निर्णय से यह बात और स्‍पष्‍ट होती है। अब खेल में सियासत की विशेषतायें, तुच्छतायें प्रवेश कर गई हैं। लूटतंत्र, परिवारवाद, गबन आदि के फलस्वरूप भ्रष्टाचार का कौतुक, खेला, तमाशा सभी की खामियां इसमें दिखने लगी हैं। घिन होती है।

इस मसले पर सर्वोच्च न्यायालय के तीन-सदस्यीय खण्डपीठ के अध्यक्ष धनंजय यशवंत चन्द्रचूड का निर्णय बड़ा खास है साथ ही तीव्र और दूरगामी भी। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड ढाई माह बाद भारत के प्रधान न्यायाधीश नामित होंगे। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड ने राष्ट्र पर उपकार किया कि आल-इंडिया फुटबाल फेडरेशन के अध्यक्ष पैंसठ-वर्षीय प्रफुल मनोहरभाई पटेल को अध्यक्ष पद से बिना किसी मुरव्वत के हटा दिया। पूछा जा सकता है कि इतना गंभीर फैसला क्यों? तो प्रफुल पटेल की कारगुजारी ही इसकी जिम्मेदार है। प्रफुल पटेल बारह बरस से बिना मतदान कराये अध्यक्ष बने बैठे रहे। इस संस्‍था का देशव्यापी बजट भी अरबों रुपये का है। कोर्ट ने प्रफुल पटेल को अपदस्थ कर नयी संचालन समिति गठित कर दी।

तो आखिर ऐसी नौबत आई क्यों? दरअसल भारत सरकार के महाधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि दोषियों (गबन के अपराधियों) के खिलाफ सख्त कदम उठाये। खेल के व्यापार में प्रवेश से पहले प्रफुल पटेल मनमोहन सिंह मंत्रिपरिषद में नागरिक उड्डयन के राज्यमंत्री थे। सरकारी उपक्रम एयर इंडिया की पटेल ने बधिया ही बैठा दी। मोदी काबीना के पूर्व मंत्री रहे प्रकाश जावेडकर के शब्दों में प्रफुल पटेल ने एयर इंडिया का सर्वनाश कर दिया था। इसके नतीजे में केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने मुम्बई में उनके वाणिज्यीय भवन आदि का अधिग्रहण कर लिया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस के इस प्रमुख नेता पर आरोप रहा कि वे कुख्यात माफिया और तस्कर दाउद इब्राहीम के सरगना इकबाल मिर्ची के हमजोली हैं। कालेधन का धंधा जोरशोर से चलाया है। निदेशालय ने अक्टूबर 2012 में पटेल को करीब बारह घंटों तक अपने भवन में जिरह, सवाल-जवाब हेतु बुलाया था। उनकी बडी फजीहत हुई थी। कहा गया कि मुम्बई के नामीगिरामी अवैध धंधों में लिप्तता में पटेल का नाम भी शुमार होता है।

मगर प्रफुल पटेल को देश हमेशा जिस बात के लिए याद रखेगा वो है एयर इंडिया का बेडा गर्क करने में उनका अपार योगदान। सारे मुनाफे के रूट पर जहाज उड़ाने की अनुमति पटेल ने निजी उद्योगपतियों को दे दी थी। एयर इंडिया को केवल घाटे की उड़ानें दी गईं। उदाहरणार्थ लखनऊ से पटना केवल पचास मिनट की उड़ान होती है, मगर इन दोनों राजधानियों को वाया दिल्ली जोड़ा गया। अर्थात एयर इंडिया दूना किराया लेता है। कौन मूर्ख होगा जो ऐसी यात्रा करेगा?

निजी जहाज जहां बीस घंटों की दैनिक उड़ान भरते हैं वहीं सरकारी एयर इंडिया केवल नौ घंटे ही चलती है। लाभ कहां से होता?  मुम्बई एयरपोर्ट के आस पास की बेशकीमती भूमि को ऊंचे दाम लेकर निजी हाथों में बेच दिया। मुम्बई में स्थापित पंजाब-महाराष्ट्र सहकारिता बैंक के करोड़ों के घोटाले में पटेल का नाम चमका था। पटेल के आदेश पर साठ खरब रुपये के नये हवाई जहाज को एक घटिया कम्पनी जिसकी कुल सम्पत्ति अठारह हजार करोड़ की थी, को खरीदने के लिये दे दिया गया।

बैंक उद्योग में तो पटेल ने करिश्मा ही कर दिया। वे टेलिफोन पर ऋण मंजूर कर देते थे। तुर्रा यह है कि वरिष्ठतम राजनेता शरदचन्द्र गोविंदराव पवार के पटेल शिष्य रहे। गत वर्ष पटेल ने एक सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित कर दिया था। उसका मजमून था कि शरद पवार को अगला प्रधानमंत्री बनाया जाये। वे ही वरिष्ठतम तथा योग्यतम दावेदार हैं।

एक समाचारपत्र के स्तंभकर की तब टिप्पणी थी कि रही सही कोर कसर शरद पवार पूरी कर देंगे। समूची भारतभूमि ही रेहन पर चली जायेगी। ईश्वर भारत पर दयालु है। शरद पवार राष्ट्रपति पद का नामांकन तक नहीं कर सके। प्रफुल पटेल और शरद पवार की तरह लालू यादव और फारूक अब्दुल्लाह भी खेल व्यापार से नाम कमा चुके हैं। आरोप है कि मुम्बई क्रिकेट के नाम पर शरद पवार काफी सम्पत्ति बना चुके हैं।

लालू यादव बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सर्वेसर्वा रहे। चारा व्यापार का उनका अनुभव काफी लाभप्रद साबित हुआ। खेल में भी उसी चारा घोटाला के गुर लालू ने अपनाये। खूब कमाया। उधर कश्मीर के फारूक अब्दुल्लाह से तो प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीनगर क्रिकेट के घोटाला में घंटों पूछताछ की थी। तो खेल के नाम पर सीनाजोरी करने वाले ये राजनेता कई गुल खिला चुके है। अब न्यायाधीश यशवंत चन्द्रचूड सबकी खबर लेंगे। मगर तब तक देश तो कंगाल हो चुका होगा।(मध्‍यमत)
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