भोपाल/ तेजी से बदलते जलवायु परिदृश्य, बढ़ती जनसंख्या और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच भविष्य की कृषि कैसी होगी-इस प्रश्न पर मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में मंगलवार को गंभीर वैज्ञानिक मंथन हुआ। ‘इंडियन बोटेनिकल सोसाइटी स्थापना दिवस’ के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर परमजीत खुराना ने कहा कि आने वाले वर्षों में खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी प्लांट जीनोमिक्स और जलवायु-अनुकूल फसलों का विकास है।

प्रो. खुराना ने आधुनिक कृषि की चुनौतियों और उनके वैज्ञानिक समाधान पर विस्तार से बात की। उन्होंने चावल और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की मैप-आधारित सीक्वेंसिंग को भविष्य की बेहतर और टिकाऊ कृषि की आधारशिला बताया। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन के दौर में परंपरागत खेती के तरीके पर्याप्त नहीं रह गए हैं और विज्ञान आधारित नवाचार ही किसानों और समाज को खाद्य संकट से बचा सकते हैं।

मानसरोवर विवि के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजीनियर गौरव तिवारी ने कहा कि इंडियन बोटेनिकल सोसाइटी जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठन के साथ इस तरह के विमर्श विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे। प्रो-चांसलर डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय ने इंडियन बोटेनिकल सोसाइटी की गौरवशाली यात्रा, उद्देश्य और इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्था दशकों से वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देती आ रही है।

मानसरोवर विवि और इंडियन बोटेनिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे विमर्श छात्रों को ज्ञान के साथ ही भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी तैयार करते हैं। कार्यक्रम में शिक्षाविद प्रो. अखिलेश पाण्डेय, कुलगुरु डॉ. ए. एस. यादव तथा प्रति कुलगुरु कर्नल एच. आर. रूहिल, रजिस्‍ट्रार डॉ. पुष्‍पेंद्र तिवारी सहित बड़ी संख्‍या में वैज्ञानिक, शिक्षाविद और विद्यार्थी शामिल हुए।

 

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