सीहोर/ आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच ‘खाद्य, पोषण और स्वास्थ्य’ पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान तलाशने के उद्देश्य से सीहोर स्थित मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय और नासी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षा और चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने वर्तमान जरूरतों और सामाजिक कल्याण की भविष्य संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।

मानसरोवर मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो चांसलर डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय, कुलगुरु डॉ. ए. एस. यादव, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एस. सदावर्ते, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेदा के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल और रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पेंद्र तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य बदलती जीवनशैली के दौर में पोषण के महत्व को पुनर्स्थापित करना और वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से समाज को स्वस्थ दिशा देना है। कुलगुरु डॉ. ए. एस. यादव ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ बदलते भारत में अवसर तलाशने का संदेश दिया। डीन डॉ. एस. सदावर्ते ने कहा कि विज्ञान के माध्यम से ही राष्ट्र कल्याण संभव है, लेकिन विज्ञान के साथ मूल्यों और मानवता को सर्वोपरि रखना भी उतना ही आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

कार्यशाला के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य और पोषण के आधुनिक आयामों पर प्रकाश डाला। डॉ. एम. के. त्रिपाठी ने फंक्शनल और न्यूट्रास्युटिकल खाद्य उत्पादों के स्वास्थ्य लाभों को विस्तार से समझाया। प्रो. अलका चतुर्वेदी ने जैव विविधता को खाद्य सुरक्षा की आधारशिला बताया। डॉ. अशोक कुमार ने मेटाबॉलिक विकारों में पोषण आधारित हस्तक्षेप की भूमिका पर चर्चा की, जबकि प्रो. आर. एल. एस. सिकरवार ने मध्य प्रदेश के जंगली खाद्य पौधों को पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत बताया।

तकनीकी सत्रों में डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने बायोसेपरेशन तकनीक, डॉ. श्वेता चौहान ने सोया उत्पादों के पोषण मूल्य और डॉ. भारत मोढेरा ने उन्नत सर्कुलर पैकेजिंग तकनीक पर व्याख्यान दिया।

मानसरोवर समूह की कुलाधिपति श्रीमती मंजुला तिवारी और प्रति कुलाधिपति गौरव तिवारी ने आयोजन को छात्रों और शोधार्थियों के लिये अत्‍यंत उपयोगी बताते हुए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पेंद्र तिवारी ने आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे। यह सम्मेलन न केवल अकादमिक संवाद का मंच बना, बल्कि समाज को स्वस्थ और पोषण संपन्न बनाने की दिशा में वैज्ञानिक सोच को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास भी साबित हुआ।

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