नई दिल्ली। जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को एक विचित्र सी गुड़िया मिली। बड़ी सी आंखों वाली इस गुड़िया को उन लोगों ने जरूर देखा होगा जो एनीमे देखने में रूचि रखते हैं। इस गुड़िया का नाम दारुमा है। जापान में इसे आप मॉल, रेस्टोरेंट और घरों में आसानी से देख सकते हैं। भारत - जापान वार्षिक शिखर वार्ता के 15वें संस्करण में प्रधानमंत्री मोदी को यह गुड़िया भेंट स्वरुप मिली।
क्या यह गुड़िया चमत्कारी है, इसका जापान में क्या महत्त्व है, जापान द्वारा भारत को दारुमा गुड़िया देने का क्या महत्त्व है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़िए यह पूरा लेख...।
'सात बार गिरो, आठ बार उठो' - यह कहावत जापान में इसी दारुमा गुड़िया से प्रेरित है। ये सौभाग्य और दृढ़ता की प्रतीक है। बड़ी सी गोल आंखों वाली ये गुड़िया पांचवीं शताब्दी के चीनी भिक्षु बोधिधर्म से प्रेरित है। इस गुड़िया की बनावट ऐसी है कि, अगर आप इसे थोड़ा सा भी धक्का देंगे तो गिरने की बजाए गुड़िया सीधी खड़ी हो जाती है।
जापान में दारुमा गुड़िया पूजी जाती है। घरों और दुकानों में भी इसे रखा जाता है। मान्यता है कि, ये गुड़िया लक्ष्य पूरी करने की प्रेणना देती है। व्यापार से जुड़े लोग इसे खासतौर पर अपनी दुकानों में रखते हैं। ये गुड़िया लोगों को कभी न हारने की भी हिम्मत देती है।
दारुमा गुड़िया जब किसी व्यक्ति को मिलती है तो एक आंख पर रंग भर दिया जाता है। इसी के साथ एक मनोकामना मांगी जाती है। जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो वह व्यक्ति दूसरी आंख में रंग भर देता है। जापान के लोगों का मानना है कि, खाली आंख लक्ष्य की याद दिलाती है।
साल के अंत में लोग इस गुड़िया को मंदिर में सौंप देते हैं। एक समारोह में मंत्रोच्चार के बाद पुजारी सम्मान से गुड़िया जला देते हैं। इसे पुराने साल के अंत और नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। परीक्षा पास करनी हो, बीमारी ठीक होनी हो या जापान में चुनाव हों, हर समय लोग गुड़िया से आशीर्वाद की कामना करते हैं।
अब जानिए गुड़िया की बनावट से जुड़ी और बारीकियां...
दारुमा गुड़िया के न हाथ हैं न पैर...वजह है चीनी बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म की तपस्या। बोधिधर्म ने जापान में जेन बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। कुछ किवदंतियों के अनुसार बोधिधर्म ने 9 साल तक तपस्या की। इसके चलते उनके हाथ पैर सूख गए। बोधिधर्म का केवल सिर का हिस्सा दिख पाता था। इसी के चलते गुड़िया में भी सिर के अलावा शरीर का कोई अन्य हिस्सा नहीं होता।
गुड़िया मुख्यतः लाल रंग से बनती है। ये रंग बिलकुल वैसा होता है जैसा बौद्ध भिक्षु पहनते हैं। ये रंग सौभाग्य और समृद्धि के साथ - साथ सुरक्षा का भी प्रतीक है। अब कई अन्य रंग भी फैशन में हैं।
दारुमा गुड़िया को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि, इस पर फुकु-इरी लिखा है। इसका अर्थ है भाग्य लाना। गुड़िया की दाढ़ी और भौंहें भी विचित्र हैं। ये सारस और कछुए के आकार की बनी है।
भारत के प्रधानमंत्री मोदी को दारुमा गुड़िया देने के निहितार्थ...
बीते कुछ समय से भारत आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहा है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दूसरा कार्यकाल भारत के चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। रूस से तेल खरीदने के चलते अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। इस टैरिफ के कारण भारतीय उद्योग कठिनाई का सामना कर रहे हैं। कई लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि, भारत द्वारा तेल खरीदने के कारण यूक्रेन - रूस संघर्ष जारी है।
डॉनल्ड ट्रम्प के लिए यह युद्ध रुकवाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उनके समर्थकों से उन्होंने वादा किया था कि, दूसरी बार सत्ता में आते ही पहले ही दिन वे युद्ध रुकवा देंगे। एक अन्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति का नोबल पीस प्राइज ऑब्सेशन हैं। वे किसी भी हाल में शांति का सर्वोच्च पुरस्कार चाहते हैं। इसके लिए वे कई बार यह दावा भी कर चुके हैं कि, उन्होंने भारत - पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रुकवाया।
इस सब के चलते फिलहाल भारत कठिन समय से गुजर रहा है। ऐसे में दारुमा गुड़िया हर इस भारतीय के लिए प्रेरणा है जो विकसित राष्ट्र का सपना मन में संजोए हुए है।