बाबर पर प्रस्तावित सत्र के बहाने भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल की फंडिंग, प्रशासनिक भूमिका और वैचारिक एजेंडे पर उठे गंभीर सवाल। लेखक, अखबार और सिस्टम आमने-सामने, मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा।
Madhyamat
2026-01-13 18:12:48
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